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रागों के शृंगार में लयबद्ध हुई रामलीला

Faridabad Updated Tue, 16 Oct 2012 12:00 PM IST
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फरीदाबाद। राग भैरवी, भीम प्लासी, शिव रंजनी, दरबारी और पीलू आदि को सुनना है, तो एक नंबर में चल रही विजय रामलीला कमेटी में चले आएं। यहां इन सब रागों को रामलीला के प्रसंगों में सुंदर ढंग से पिरोया गया है।
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विजय रामलीला कमेटी की करीब 62 साल से संचालित होने वाली रामलीला में दर्शक रामलीला के साथ ‘रागलीला’ यानी क्लासिकल गीत-संगीत का भी खूब मजा ले रहे हैं। दरअसल, 46 साल से भी अधिक वक्त से रामलीला के मंच पर सक्रिय विश्वबंधु शर्मा ने यह कमाल कर दिखाया है। वह मशहूर संगीतकार नौशाद के शागिर्द रहे हैं, इसलिए उन्होंने रामायण को कई रागों में ढाला है। हर मौके पर उस वक्त के मुताबिक राग में पिरोकर गीत पेश करने से इस मंचन में और जान पड़ गई है।
गंधर्व महाविद्यालय दिल्ली से सात वर्ष तक संगीत की शिक्षा लेने वाले इसके निर्देशक शर्मा ने खुद परिस्थितियों के मुताबिक लाइनों को लिखकर और कंपोज करके उसे इसमें शामिल किया है। रामलीला को भावपूर्ण बनाने का यह अनूठा प्रयोग लोगों को खूब भा रहा है। कई बार तो रामभक्त इन लाइनों में अपने जीवन की कहानी समझते हुए भाव विह्वल हो जाते हैं। उनकी आंखों से आंसू छलक पड़ते हैं।


क्लासिकल कंपोजिंग के कुछ उदाहरण
-रानी कौशल्या-राम को वनवास जाते वक्त : ‘भरी दुनिया में मेरे भाग में तन्हाई है, आज ममता के लिए कैसी घड़ी आई है, तू चला वन को मेरी जान पे बन आई है’ (राग भीम प्लासी)।
-राजा दशरथ मरण पर : ‘दिन कभी ऐसे आएंगे मालूम न था, एक-एक करके बिछड़ जाएंगे मालूूम न था। ये जमीं वैसी है ये चांद तारें वैसे ही हैं, ये जहां वैसा है सारे नजारे वैसे हैं। आशियां अपने उजड़ जाएंगे मालूम न था’ (प्रथम प्रहर का राग अहीर भैरव)।
-वनवास में राम : ‘प्रण पालन करने मैं चला मुझे वन को जाने दे, 14 बरस की ही बात है दिन यूं कट जाएंगे, आशीष से मैय्या तेरी सब दुख छंट जाएंगे, आन जो रघुवंश की है वो आन निभाने दे’ (राग शिवरंजनी)।
-सीता जी वनवास के समय : ‘संग तेरे राम मेरे जाएंगे अब प्राण मेरे, प्राण का आधार तुम हो, जीत तुम हो हार तुम हो, मैं डरूं तूफां से कैसे जब मेरे पतवार तुम हो’ (राग दरबारी)।
- कैकेयी रानी पर : ‘सूरजकुल का दीप बुझाने चली है देखो कैकेयी रानी, रामलला के जिस पलने की खींची थी ममता ने डोरी, उस पलने को आग लगाकर ममता बन गई आज अघोरी’(राग भैरवी)।
-राम के वियोग में सीता : ‘चंद्रमा मद भरा क्यों झूमे बादल में अब कहां वो खुशी मुझ बिरहन के दिल में, जब से बिछड़ी अपने पिया से नींद नहीं मोरे नैनन में’ (राग दरबारी)।
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