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‘मर्यादा’ में रहेंगे रामलीला के पात्र

Faridabad Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
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फरीदाबाद। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम हमारे संस्कृति पुरुष हैं। इसलिए उनकी लीला का मंचन करने जो भी उतरेगा उसे मर्यादा में रहना होगा। कमेटियों ने कलाकारों को शाकाहारी भोजन करने, जमीन पर सोने एवं ब्रह्मचर्य का पालन करने को कहा है।
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रामलीला के दौरान लोग श्रीराम, लक्ष्मण, सीता एवं हनुमान जी के पात्रों के रूप में भगवान को देखते हैं। हर रोज रामलीला शुरू होने से पहले मंच पर उनकी आरती उतारी जाती है। इसलिए कमेटियों की ओर से कोशिश रहती है कि इन भूमिकाओं को निभाने वाले लोग भी कम से कम इस दौरान सात्विक जीवन जीएं। इसलिए कहीं कोई व्रत कर रहा है और कहीं कोई जमीन पर सो रहा है।

शिव मंदिर रामलीला कमेटी की ओर से प्रेस कॉलोनी में मंचित की जाने वाली रामलीला में श्रीराम की भूमिका अदा करने वाले विजय डोगरा नौ दिन तक फलाहारी व्रत रहेंगे। संचालक प्रवीण कुमार ने बताया कि हनुमान, लक्ष्मण एवं सीताजी का रोल अदा करने वाले शाकाहारी भोजन करेंगे, जमीन पर सोएंगे और ब्रह्मचर्य का पालन करेंगे।
एक नंबर में विजय रामलीला कमेटी की ओर से संचालित रामलीला में सभी कलाकारों के लिए कड़े नियम हैं। ताकि, मंच पर आने वाले हर कलाकार का मन शुद्ध हो। इसके सह निर्देशक सौरभ कुमार बताते हैं कि 17 दिन तक कलाकारों के घर प्याज-लहसुन तक नहीं खाया जाता। सब ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं और जमीन पर सोते हैं।


आज राम मेरे घर आए....
-एक नंबर की रामलीला के राम, लक्ष्मण, सीता एवं हनुमानजी तो लोगों के घर बुलाए जाते हैं, जहां उनकी आरती उतारी जाती है, चरण पखारे जाते हैं। रामलीला के दौरान ही शहर के लोग मनौती मानते हैं। जिनकी पूरी हो जाती है वह भरत मिलाप के दिन रामजी को अपने घर बुलवाते हैं। भक्त अपने घर में साक्षात भगवान के दर्शन करके निहाल होते हैं। हर साल 50 से 60 घरों में रामजी के चरण पड़ते हैं। इसलिए भी इन लोगों की शुद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाता है।


‘हम प्रभु श्रीराम की लीला दिखा रहे हैं इसलिए अंदर से मन भी उतना ही पवित्र, निश्छल होना चाहिए। ताकि, लोगों की जो श्रद्धा है वह बेकार न जाए। इस लीला की गरिमा कायम रहे’।
-रितेश कुमार, सेक्टर-15 की रामलीला के श्रीराम



‘शाकाहारी भोजन सात्विक आहार में आता है। इससे विचार सही रहते हैं। संयम रहता है। यदि मन शुद्ध रखना है तो उसके लिए व्यवहार भी वैसा ही होना चाहिए’।
-डॉ. सुरेंद्र दत्ता, फिजिशियन

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