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‘नारायण को जपने वाला नारायण को जान न पाया’

Faridabad Updated Sat, 13 Oct 2012 12:00 PM IST
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फरीदाबाद। ‘माया पति की इस माया का भेद जगत कभी जान न पाया, जग की रचना करने वाला स्वयं रचना से मिलने आया, अहंकार की जीत न होती ये ही विष्णु ने समझाया, नारायण को जपने वाला नारायण को जान न पाया’। नारद मोह का मर्म समझाती इन पंक्तियों के साथ बृहस्पतिवार रात को एनएच-एक स्थित विजय रामलीला में रामायण की कहानी आगे बढ़ी।
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महर्षि नारद की भूमिका नवीन अरोड़ा ने निभाई। भगवान विष्णु की अनुराग कुमार, कामदेव की अरुण भाटिया, इंद्र की वैभव कुमार और विश्वमोहिनी की भूमिका सौरभ कुमार ने अदा की। महर्षि नारद को सबक सिखाने के लिए जब भगवान विष्णु ने उन्हें कुरूप बनाया, तो इसे अपने साथ छल मानते हुए नारद ने कहा कि जिस तरह स्त्री वियोग में वह तड़प रहे हैं, उसी प्रकार विष्णु को भी तड़पना पड़ेगा। इस प्रसंग पर कलाकारों ने दर्शकों की खूब तालियों बटोरी।

महर्षि नारद ने भगवान विष्णु से हरि से चेहरा मांगा और उन्होंने उनका अहंकार तोड़ने के लिए बंदर सा कुरूप चेहरा बना दिया। नारद जी ने श्राप दिया कि बंदर ही एक दिन विष्णु की सहायता करेंगे। निर्देशन विश्वबंधु शर्मा ने किया।

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