डबुआ से लापता दो बच्चे बलरामपुर में मिले

Faridabad Updated Sun, 30 Sep 2012 12:00 PM IST
फरीदाबाद। पांच दिन पूर्व डबुआ कालोनी से लापता हुए तीन बच्चों में से एक शनिवार की सुबह अपने घर लौट आया है, जबकि दो अन्य बच्चे यूपी के बलरामपुर में मिले हैं। बलरामपुर में मिले बच्चों ने तीन लोगाें द्वारा चाकू की नोंक पर अपहरण किये जाने की बात यूपी पुलिस को बताई है, जबकि घर लौटे छात्र ने अपने आप ही घर से जाने की बात कही। स्थानीय पुलिस भी अपहरण की घटना से इनकार कर रही है।
गाजीपुर रोड डबुआ कालोनी निवासी तरुण शुक्ला (12) पुत्र शिव प्रकाश शुक्ला, जतिन उर्फ नीलू (8) पुत्र रामावतार, सागर (8) पुत्र मनोज इसी कालोनी के प्रभात पब्लिक स्कूल में पढ़ते हैं। मंगलवार को यह तीनों अचानक लापता हो गए थे। शनिवार की सुबह साढ़े पांच बजे सागर अपने घर लौट आया। उधर, शुक्रवार रात्रि साढे़ दस बजे तरुण शुक्ला, जतिन के साथ यूपी के बलरामपुर में रहने वाले अपने जीजा जयकरण व बहन सविता मिश्रा के पास पहुंच गया।
तरुण शुक्ला ने यूपी पुलिस को बताया कि वह 25 सितंबर को घर से निकलने के बाद टाउन पार्क पहुंचे थे और वहां फव्वारे के लिए बने स्थान में वे तीनों नहाए। उसी दौरान तीन लोग इनके पास आए और चाकू दिखाकर अपने कब्जे में कर लिया। तरुण ने बताया कि उन्हें नशे की गोलियां खिला दी गईं। अगले दिन उनकी आंख खुली तो वह हरिद्वार में थे। तीनों बदमाशाें ने इनसे कहा कि तुम्हारे पिता के पास बहुत पैसे हैं। इसके बाद इनकी पिटाई भी की और फिर नशे की गोली खिला दी।
तरुण ने यूपी पुलिस को बताया कि इसके बाद उनकी आंख कानपुर में स्टेशन पर खड़ी ट्रेन में खुली तो उन्होंने देखा कि अपहरणकर्ता ट्रेन के बाहर प्लेटफार्म पर खड़े हैं। इसके बाद यह तीनों ट्रेन से उतरकर भाग खडे़ हुए। और गोंडा की ओर से आ रही ट्रेन में चढ़ गए। ट्रेन में टीटीई इनके पास पहुंचा तो बच्चों ने पूरा घटनाक्रम बताया। इसके बाद वे बलरामपुर स्टेशन पहुंचे। वहां ट्रेन से उतरने के बाद तरुण ने साथियों को बताया कि उसकी बहन बलरामपुर के हरिहरगंज में रहती है। लेकिन यहां से सागर इनसे अलग हो गया। तरुण व जतिन हरिहरगंज पहुंचे, लेकिन बहन का मकान नहीं तलाश पाये। दोनों शुक्रवार रात्रि करीब 10 बजे एक जगह पर बैठकर रो रहे थे। इसी बीच लोगाें ने इनसे पूछताछ की और तरुण के जीजा जयकरण का मकान पता कर उसे वहां पहुंचाया। जिसके बाद सूचना पुलिस को दी गई।

यहां मेल नहीं खा रही कहानी
शनिवार सुबह घर लौटे सागर ने अमर उजाला को बताया कि वह तीनों दोस्त 25 सितंबर को टाउन पार्क में घूमने गए थे। तरुण ने एक दिन पहले ही अपनी मां के पर्स से 500 रुपये चुराए थे। इसके बाद वह पार्क से निकले और न्यू टाउन स्टेशन पहुंचे। वहां से ट्रेन पकड़कर दिल्ली स्टेशन गए। यहां से ट्रेन पकड़कर हरिद्वार पहुंच गये। वहां दो दिन रहने के दौरान इनके पैसे खत्म हो गये। इसके बाद ये तीनों ट्रेन पकड़कर गोंडा पहुंचे। सागर गोंडा से वापस हो गया। एक चाय वाले ने उसे दिल्ली जाने वाली ट्रेन के बारे में बताया और वह दिल्ली से फरीदाबाद पहुंचा। इस बीच उसे आरपीएफ ने ट्रेन में सफर करते समय टोका तो उसने बताया कि वह अपने माता-पिता से बिछड़ गया है।
उधर, डबुआ कालोनी चौकी पुलिस का कहना है कि यह तीनों बच्चे मौज मस्ती करने के लिए अपने आप ही घर से गए थे। अपहरण की बात गलत है।

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