हिंदी में आएगी भगत सिंह की ‘जेल डायरी’

Faridabad Updated Thu, 27 Sep 2012 12:00 PM IST
फरीदाबाद। शहीद-ए-आजम भगत सिंह की आवाज, उनके क्रांतिकारी विचार आम लोगों तक पहुंचाने के लिए उनकी जेल डायरी हिंदी में छपवाई जाएगी। दो साल से हरियाणा सरकार इसे छपवाने की बात कर रही थी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला, इसलिए अब उनका परिवार ही इसे छपवाएगा।
इसके लिए उनकी कुछ प्रकाशकों से बातचीत हुई है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे फरीदाबाद में शहीद-ए-आजम के वंशज रहते हैं। जहां उनके द्वारा लाहौर सेंट्रल जेल में लिखी गई डायरी की मूल प्रति संजोकर रखी गई है। यह अमूल्य अमानत उनके पौत्र यादवेंद्र सिंह संधू के पास है। शहीद-ए-आजम के जन्मदिन से पहले ‘अमर उजाला’ से बातचीत में संधू ने कहा कि दो साल से हरियाणा सरकार का लोकसंपर्क विभाग डायरी को हिंदी में छपवाने का आश्वासन दे रहा है, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। जबकि, हम चाहते हैं कि डायरी में लिखी बातों का हिंदी में अनुवाद कर आम लोगों तक पहुचायां जाए। खासकर हिंदी पट्टी के लोग उनके विचार जान सकें।
शहीद-ए-आजम ने अंग्रेजी और ऊर्दू में डायरी लिखी है। डायरी के हर पन्ने पर वतनपरस्ती झलकती है। आजाद भारत के सपने को लेकर भगत सिंह ने लाहौर जेल में जो कठिन दिन गुजारे, उसका हर पल 404 पेज की इस डायरी में कैद है। संधू ने बताया कि उन्होंने पंजाब के फिरोजपुर एवं हरियाणा के गुड़गांव के प्रकाशकों से इसका हिंदी अनुवाद कर डायरी छापने की बात की है। राज्य के जन संपर्क तथा सांस्कृतिक कार्य मंत्री शिवचरण लाल शर्मा का कहना है कि उन्हें इस मसले पर जानकारी नहीं है कि कहने के बावजूद अब तक डायरी हिंदी में क्याें नहीं छपी।

कुछ कही अनकही बातें
-सिर्फ 23 साल की जिंदगी जीने वाले भगत सिंह की यह जेल डायरी उनके पूरे व्यक्तित्व को समझाने के लिए काफी है। इसे देखने पर पता चलता है कि वह अर्थशास्त्र की भी अच्छी समझ रखते थे। उन्होंने इसमें अमेरिका, इंग्लैंड की प्रति व्यक्ति आय, इंग्लैंड की आय में भारतीय योगदान, पूंजीवाद, साम्राज्यवाद के खतरे भी बताए हैं। आंकड़ों को देखकर पता चलता है कि गणित में भी उनकी अच्छी पकड़ थी।
-उनकी साहित्यिक रुचि का भी डायरी के पन्ने बयान करते हैं। जिसमें उन्होंने स्वच्छंदवाद के हिमायती मशहूर अमेरिकी लेखक जेम्स रसेल लावेल की आजादी के बारे में लिखी गई कविता ‘फ्रीडम’ लिखी है। इसके अलावा शिक्षा नीति, जनसंख्या, बाल मजदूरी, सांप्रदायिकता आदि विषयों को भी छुआ है।
-लाहौर सेंट्रल जेल प्रशासन ने भगत सिंह को लिखने के लिए यह डायरी 12 सितंबर 1929 को दी थी। इस पर लाहौर जेल के जेलर के भी हस्ताक्षर हैं। इस पर फाइल नोटबुक भारती भवन बुक सेलर लाहौर छपा हुआ है।
फाइल नंबर एक का जोड़


फरीदाबाद। शहीद-ए-आजम भगत सिंह के परिवार के कुछ लोग 1960 में फरीदाबाद आए। यहां उनके भतीजे बाबर सिंह आए थे। इससे पहले वह पंजाब के फिरोजपुर में रह रहे थे। जिनके पास भगत सिंह की यह मूल डायरी थी। अब यह डायरी बाबर सिंह के बेटे यानी भगत सिंह के पौत्र यादवेंद्र संधू के पास है।
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