निगम वार्डों के विकास में भेदभाव

Faridabad Updated Mon, 20 Aug 2012 12:00 PM IST
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फरीदाबाद। नगर निगम में सिर्फ राजनीतिक पहुंच वालों और दबंग पार्षदों का राज चलता है। यदि कोई पार्षद इन दो विशेष योग्यताओं को पूरा नहीं करता है तो शायद ही उसके यहां कोई बड़ा काम करवाकर उसका भुगतान हो।
जो भी इस योग्यता को पूरा करता है उसकी फाइल अधिकारी फटाफट पास करते हैं। उसके यहां ठेकेदार काम करने से कतराते नहीं हैं, क्योंकि उन्हें पता होता है कि काम पूरा होते ही दबाव से अधिकारी भुगतान कर देंगे। यह कोई आरोप नहीं है। बल्कि नगर निगम सदन में विकास कार्यों को लेकर बार-बार उठने वाली पार्षदों की आवाज और निगम की इंजीनियरिंग शाखा के आंकड़ों की जुबानी है। किसी वार्ड में तो 15 करोड़ के काम हुए और किसी वार्ड में महज 55 लाख के। हालांकि, निगमायुक्त का कहना है कि कोई भेदभाव नहीं हो रहा है। सभी वार्डों में जरूरत के हिसाब से काम करवाए जा रहे हैं।

पिछले 28 माह में किस वार्ड में हुए कितने काम:
वार्ड नंबर राशि (लाख रुपये में)
30 1496.81
29 1325.29
07 1289.43
25 1106.65
02 1041.80
27 896.43
03 795.86
06 740.71
12 684.05
01 646.00
15 464.62
04 349.11
28 54.71
(स्रोत: नगर निगम की इंजीनियरिंग शाखा)
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यहां ऐसे होते हैं विकास कार्य
-विकास कार्य करवाने के मामले में नंबर एक पर वार्ड 30 के पार्षद कुलदीप तेवतिया हैं। वह भाजपा से पार्षद हैं। अपनी दबंगई से काम करवाते हैं। वार्ड 29 की पार्षद द्रौपदी अदलखा भी भाजपा से पार्षद हैं। उनके पुत्र धनेश अदलखा के सामाजिक और राजनीतिक रसूख से उनकी फाइल कभी रुकती नहीं। वार्ड सात के पार्षद मुकेश शर्मा सीनियर डिप्टी मेयर हैं। वह श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री के पुत्र हैं। भला उनकी फाइल कौन रोकेगा। सदन में सबसे ज्यादा शोर-शराबा मचाने वाले सोम मल्होत्रा एवं बसपा पार्षद जगन डागर के वार्डों में भी काफी रकम लगाई गई है। मेयर ने भी अपने वार्ड में अच्छी खासी रकम लगवा ली है।



हर वार्ड में दो करोड़ के काम की हुई घोषणा
नगर निगम आयुक्त डी. सुरेश ने दो साल पहले घोषणा की थी कि हर वार्ड में सालाना दो करोड़ रुपये के कार्य करवाए जाएंगे। इसके अलावा सदन में पास हुआ था कि ठेकेदारों का भुगतान पार्षदों की अनुशंसा पर ही होगा, लेकिन इन दोनों बातों का यहां पर पालन नहीं किया जा रहा है।


पहले तो मेरे वार्ड की फाइलें ही नहीं पास होती थीं। काफी हंगामे के बाद निगमायुक्त ने लगभग साढ़े चार करोड़ की फाइलें पास कर दी हैं। लेकिन, यह काम फाइलों में ही है। ठेकेदार मेरे वार्ड का काम नहीं लेते। वह कहते हैं कि पहले निगम से पैसा दिलवाओ। पैसे देने के लिए कोई अधिकारी राजी नहीं हैं। इसलिए काम नहीं हुए।
-वार्ड नंबर 28 की पार्षद कैलाशवंती मल्होत्रा
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नगर निगम में भुगतान करने का कोई सिस्टम नहीं है। निगमायुक्त जिसे कहते हैं मैं उसका भुगतान कर देता हूं। भुगतान का रोटेशन और नियम होना चाहिए, ताकि हर वार्ड में ठेकेदारों को बराबर प्रतिशत में पैसे मिल जाएं।
-बीएल शर्मा, फाइनेंस कंट्रोलर, नगर निगम।

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