फरीदाबाद में बने सूखे के आसार

Faridabad Updated Sat, 04 Aug 2012 12:00 PM IST
फरीदाबाद। जिले में बारिश नहीं होने के कारण सूखे के आसार बनने लगे हैं। कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पंाच सालों में इस साल सबसे कम बारिश हुई है, जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ेगा। सर्वाधिक नुकसान धान की फसल को होगा। उधर, प्रशासन ने सूखे की आशंका को देखते हुए विभागों से रिपोर्ट मांगी है।
कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, पूरे जिले में 10 हजार हेेक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल उगाई जाती है। लेकिन इस बार धान की फसल का क्षेत्र केवल 7 हजार हेक्टेयर ही रह गया है, क्योंकि कम बारिश को देखते हुए किसानों ने धान की फसल उगाने का विचार छोड़ दिया है। हालांकि बूंदाबांदी होने के कारण बाजरे व ग्वार की फसल को कम नुकसान होने की उम्मीद है। क्याेंकि इन फसलों में एक बार पानी जड़ाें में चला जाए तो यह फसलें सूखा झेल लेती हैं। अनुमान के अनुसार, पिछले साल ज्वार की फसल का क्षेत्र 17 हजार हेक्टेयटर था जो इस बार भी 17 हजार हेक्टेयर रहने की उम्मीद है। वहीं ग्वार की फसल का क्षेत्र 275 हेक्टेयर था जो इस बार भी 280 के पास रहने की उम्मीद है।
इस बार पिछले साल की तुलना में 20 प्रतिशत भी वर्षा नहीं हुई है। इससे धान बर्बाद होने के कगार पर है। फरीदाबाद में गुड़गांव नहर भी है, लेकिन इसका पानी सिंचाई योग्य नहीं है। खुद सिंचाई विभाग यह कह चुका है कि इसमें बीओडी की मात्रा अधिक होने के कारण इससे सिंचाई करने से फसल खराब हो जाती हैं। इसके अलावा बिजली संकट ने किसानों की परेशानी और बढ़ा दी है।

क्या कहते हैं किसान
कृ षि विभाग की तरफ से सर्वश्रेष्ठ किसान का खिताब जीत चुके बादशाहपुर गांव के किसान धर्मपाल त्यागी ने बताया कि उन्हें 25 एकड़ क्षेत्र में धान की फसल बोई थी। लेकिन बारिश न होने की वजह से फसल बेकार हो गई है। किसान सतवीर डागर ने बताया कि 40 एकड़ में धान की फसल बोई है। लेकिन अधिकतर फसल पानी न मिलने के कारण पीली पड़ गई है।

तैयार करवाई जा रही सूखे की रिपोर्ट
उपायुक्त बलराज सिंह मोर ने बताया कि बारिश नहीं होने की वजह से किसानों की फसलों को जो नुकसान हुआ है। उससे पूरा जिला प्रभावित होगा। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग को सूखे से होने वाले नुकसान की रिपोर्ट बनाने का आदेश दे दिया गया है। रिपोर्ट पूरी होने के बाद तय किया जाएगा कि किसानाें के नुकसान की किस तरह भरपाई की जाए।

कृषि विभाग के उपनिदेशक करमचंद ने बताया सूखे से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। किसानाें को अब बारिश पर निर्भर न रहकर अपने आप ही सिंचाई के साधन जुटाने होंगे ताकि फसलाें को बर्बाद होने से बचाया जा सके। अभी तक करीबन 300 मिलीमीटर तक बारिश हो जाती तो किसानाें को राहत मिल सकती थी।
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पाच सालाें का बारिश का आंकड़ा
2005--- 456 मिलीमीटर
2006----340 मिलीमीटर
2007----420 मिलीमीटर
2008--- 634 मिलीमीटर
2009----389 मिलीमीटर
2010----652 मिलीमीटर
2011----683 मिलीमीटर
2012--- 122 मिलीमीटर (अब तक)

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