मर गई इंसानियत : साख बचाने के लिए डॉक्टर मृतका को लगाते रहे इंजेक्शन

Amar Ujala Bureauअमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 26 Oct 2020 02:00 AM IST
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विलाप करती मृतक की परिजनों का ढांढस बंधाते हुए डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. बलविंद्र कौर।
विलाप करती मृतक की परिजनों का ढांढस बंधाते हुए डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. बलविंद्र कौर। - फोटो : Ambala

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शहजादपुर। डॉ. भगवान से कम नहीं लेकिन जब वहीं लापरवाह हो तो जान जाना तय है। शहजादपुर की सीएचसी में ऐसा ही हुआ। प्रारंभिक जांच में 5 डाक्टरों की लापरवाही से एक दुध मुंहे मासूम सहित 3 बच्चों की की मां ललिता की मौत हो गई। उसे करंट लगने के बाद सीएचसी में लाया गया था। लेकिन पांचों डाक्टर गैरहाजिर पाए गए।
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परिजनों ने आरोप लगाए कि एक घंटे बाद एक डॉक्टर आई तो लापरवाही छिपाने और खुद की साख बचाने के लिए मृतक को ही इंजेक्शन लगाते हुए ऑक्सीजन देने का ड्रामा रच दिया। पुलिस व जांच टीम के सामने पूर्व सरपंच सतीश शर्मा ने आरोप लगाते हुए कहा कि डॉ. ने मृतक का ईसीजी करवाकर लाने को बोल दिया। लेकिन परिजन सब कुछ समझ चुके थे। कहा कि लिखकर दें कि अभी हमारी मरीज जिंदा है। डॉक्टर ने लिखकर देने से इनकार कर दिया। इसी पर बवाल हुआ। परिजनों ने अंबाला स्वास्थ्य विभाग के सीएमओ द्वारा भेजी गई टीम के सामने आरोप लगाते हुए कहा कि हम ईसीजी करवाने जाते तो बाद में यह कहकर डॉ. पल्ला झाड़ लेते कि रास्ते में मौत हो गई। इसी कारण विवाद भड़का और परिजनों ने चार डाक्टरों की गिरफ्तारी की मांग तक कर दी।
एसएमओ पीड़ित परिजनों से बोले हम शर्मिंदा हैं, डिप्टी सीएमओ डॉक्टरों से बोलीं डूब मरो
परिजन रो रहे थे और चारों डाक्टरों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। एसएमओ डॉक्टर राजिंद्र राय परिजनों को समझाने का प्रयास कर रहे थे लेकिन परिजन सवाल पर सवाल दाग रहे थे जिनका अधिकारियों के पास जवाब नहीं था। इस दौरान डॉ. राजिंद्र राय ने हाथ जोड़े और कहा कि हम शर्मिंदा हैं इनकी वजह से। इस दौरान डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. बलविंद्र कौर भी खुद को रोक न सकी सीएचसी के डॉक्टरों से बोली की डूब मरो तुम, तुम्हारी लापरवाही के चलते मरीज की जान चली गई। आश्वासन दिया कि हम लापरवाही करने वाले सभी डॉक्टरों को सस्पेंड करेंगे। हम मृतक की सांसे तो नहीं लौटा सकते लेकिन जो भी संभव होगा कार्रवाई करेंगे।
इस मासूम को अब कौन पिलाएगा दूध
मृतक ललिता के 1 साल का बेटा और दो बेटियां हैं। पिता चमन बोले अब मेरे बेटे को दूध कौन पिलाएगा? इसका क्या कसूर है। मेरी बेटियों को कौन संभालेगा। इसका किसी के पास कोई जवाब नहीं था। पिता चमन लाल बोले मैं दिहाड़ी करूंगा तो बच्चे कौन संभालेगा?
इन डाक्टरों की लापरवाही से ललिता की मौत हुई है। मरने के बाद भी उसे इंजेक्शन लगाने का ड्रामा किया गया। अब इन बच्चों को कौन संभालेगा। ऐसे सरकारी अस्पतालों को ताला लगा देना चाहिए। कम से कम लोग हादसे में मरीज को अस्पताल तो लेकर नहीं आएगा।
अनुज, पड़ोसी।
हम अस्पताल में ललिता को सुबह सवा नौ बजे ले आए। लेकिन डॉ. वैशाली बोली मेरे क्लिनिक ले आओ। एक भी डाक्टर होता तो उसे बचाया जा सकता था। मौत के बाद भी अपने आपको बचाने के लिए उसे टीके लगाए गए।
देबो देवी, पड़ोसी।
इन बच्चों इन डाक्टरों के हवाले ही करना चाहिए या फिर ये डाक्टर अपनी पूरी सैलरी इन बच्चों के नाम करें इन्हें भी पता चले किसी को कैसे मारते हैं। एक डॉ. तो इनमें से इस गांव की बहू है उसे भी शर्म नहीं आई।
वीना, ब्लॉक समिति सदस्य।
हमारे गांव की बहू मर गई थी। एक घंटे बाद जब डॉ. आई तो इंजेक्शन लगा दिया।उसके बाद कहा कि ईसीजी करवा लाओ ताकि यह दिखा सकें कि रास्ते में मौत हुई न कि सीएचसी में। इन चारों डाक्टरों की गिरफ्तारी होनी चाहिए। सतीश शर्मा, पूर्व सरपंच।
परिजनों ने आरोप लगाए हैं उनकी जांच की जाएगी। यदि मौत के बाद इंजेक्शन लगाए हैं और डॉ. वैशाली ने अपने क्लिनिक में आने के लिए बोला है तो कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. राजेंद्र राय, सीनियर मेडिकल अधिकारी।
सीएचसी शहजादपुर में नारेबाजी करते हुए मृतक के परिजन।
सीएचसी शहजादपुर में नारेबाजी करते हुए मृतक के परिजन।- फोटो : Ambala
मृतका के मासूम बच्चे।
मृतका के मासूम बच्चे।- फोटो : Ambala
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