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... और बारह घंटे तक थमी रहीं सांसें

Ambala Updated Thu, 27 Dec 2012 05:30 AM IST
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अंबाला। कैंट के सौदागर बाजार में 12 घंटे तक लोगों की सांसें थमी रहीं। बारह घंटे तक दमकल की गाड़ियां आग पर काबू पाने में लगी रहीं और तसल्ली होने के बाद ही मौके से लौटी। लेकिन इस हादसे ने कैंट के इसी बाजार में 40 साल पहले हुए हादसे को ताजा कर दिया, जिसमें पूरा बाजार ही राख हो गया था। तंग रास्ते और ऊंची इमारतों के कारण ही दमकल को भी काफी मशक्कत करनी पड़ी।
कैंट के सौदागर बाजार की एक दुकान में लगी आग ने आसपास के दुकानदारों को भी परेशान कर दिया। यह दुकानदार भी इसी से परेशान थे कि कहीं यह आग ज्यादा न भड़क जाए और उनके प्रतिष्ठान भी इस आग की भेंट चढ़ जाएं। जैसे-जैसे दुकानदारों को आग लगने की सूचना लगती रही वे मौके पर पहुंचते रहे। हर किसी को यही चिंता थी कि उनकी दुकान का क्या होगा?
करीब 2:20 बजे पहुंची पहली फायर ब्रिगेड गाड़ी ने आग पर काबू पाना शुरू किया, लेकिन उसके भी होश उड़ गए। धीरे-धीरे यहां पर दमकल की गाड़ियों का जमावड़ा लगना शुरु हो गया। यह देख लोग भी हैरान रह गए, क्योंकि जिस तरह से गाड़ियों का जमावड़ा लगा, उसे देख अनुमान लगाने लगे कि नुकसान आसपास की दुकानों को भी होगा और जल्द आग पर काबू पाना मुश्किल है। क्षेत्र की लाइट को काट दिया गया। अंधेरा भी इस कार्रवाई में परेशानी बना और जैसे ही हल्का दिन निकला, तो कार्रवाई में तेजी आई। आग की लपटों और धुएं के कारण कार्रवाई में भी दिक्कत आई।

इनसेट

आगजनी झेल चुका है सौदागर बाजार
अंबाला। कैंट के व्यवसायी लक्ष्मी नारायण खन्ना, अश्वनी शर्मा, पूर्व पार्षद नवीन यादव ने बताया कि 1972 में भी इस बाजार में आग लगी थी और कई दुकानें राख हुई थीं। उस दौरान भी इसे काबू करने में दमकल विभाग के पसीने छूट गए थे। यही नहीं सदर बाजार में पेंट की दुकान, सौदागर बाजार में ही एक दुकान में आग लग चुकी है। मेन सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रधान अजय गुलाटी, आरपी गुप्ता, बृजगोयल, सुनील मित्तल, रविंदर अग्रवाल, अशोक सभरवाल, दर्शन लाल बुद्धिराजा, नरिंदर लाली ने कहा कि फायर ब्रिगेड की चोकसी के कारण यह हादसा टल गया, नहीं तो नुकसान इससे कहीं ज्यादा हो सकता था।

नहीं फायर सेफ्टी के इंतजाम
अंबाला। फायर ब्रिगेड की मानें, तो कैंट में अधिकतर शोरूम और दुकान संचालकों के पास एनओसी नहीं है। इनके पास आग पर काबू पाने के इंतजाम तक पूरे नहीं हैं। जिनके पास यदि है, तो वह पुरानी है और रिन्यू तक नहीं करवाई है।

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बेबस है दमकल विभाग
अंबाला। दमकल विभाग के फायर स्टेशन आफिसर एके चोपड़ा की मानें तो फायर सेफ्टी एनओसी हर साल रिन्यू करवानी पड़ती है। स्कूलों पर तो शिकंजा कसा गया है और नए स्कूल को एनओसी के बिना एफिलिएशन नहीं मिलती। लेकिन रिन्यू न करवाने पर विभाग नोटिस देता है। लेकिन इस पर कार्रवाई नहीं हो पाती। प्रावधान ही नहीं है कि इस मामले में कार्रवाई की जाए।
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‘दुकानदारों और शोरूम संचालकों को नोटिस दिए जाएंगे। इस मामले को प्रशासन के संज्ञान में भी लाया जाएगा। इसके बाद जो भी निर्देश होंगे, उसी के आधार पर कार्रवाई करेंगे।’
- एके चोपड़ा, फायर स्टेशन आफिसर, अंबाला कैंट

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