आसाम में ‘आबाद’ रहेगी शहीद जींतू की याद

Ambala Updated Wed, 26 Dec 2012 05:30 AM IST
अंबाला। कारगिल युद्ध में कैप्टन जींतू गोगाई शहीद होकर पहले ही अमर हो गए थे, मगर अब उनकी यादें उनके पैतृक प्रदेश आसाम में भी हमेशा जिंदा रहेंगी। शहादत के बाद आसाम सरकार ने उन्हें प्रदेश का बड़ा वीरता अवार्ड ‘वीर चिल्लाराय अवार्ड’ से तो पहले ही सम्मानित कर दिया था। अब आसाम व उनके पैतृक जिला गोलाघाट में कई ऐसे अवार्ड है, जो शहीद जींतू के नाम से ही दिए जाएंगे।
इतना ही नहीं सेना ने भी आसाम में जींतू के नाम को सदा के लिए अमर बनाने की ठान ली है। इसके लिए एक ओर सेना ने जहां कैप्टन जींतू गोगाई वीर चक्र मेमोरियल फुटबाल टूर्नामेंट शुरू किया गया है, वहीं शहीद के नाम से सेना ने गुवहाटी स्थित नारंगी कैंटोनमेंट में जवानों के लिए एक क्वार्टर कांप्लेक्स तैयार करवाया है। जिसमें करीबन दो हजार के करीबन क्वार्टर मौजूद है। जबकि फुटबाल टूर्नामेंट प्रदेश स्तरीय है, जो डिबरूगढ़ में सेना की एक यूनिट द्वारा हर साल करवाया जा रहा है।

अंबालावासियों के लिए गर्व की बात
कैप्टन जींतू की कारगिल में शहादत और अब आसाम में भी उसके नाम को हमेशा के लिए अमर बनाने की मुहिम पर अंबाला के लोगों को भी गर्व होना चाहिए। जींतू गोगाई के दस साल यहां अंबाला में ही बीते हैं। उनके पिता आनरेरी फ्लाइंग अफसर टीआर गोगाई यहीं अंबाला में 7 विंग एयरफोर्स में तैनात थे। 1983 में जींतू का परिवार अंबाला आया, तो उन्होंने अंबाला कैंट के केंद्रीय विद्यालय नंबर दो में आठवीं कक्षा में दाखिला लिया था। उसके बाद 1988 से 1991 तक उन्होंने अंबाला कैंट के गांधी मेमोरियल नेशनल (जीएमएन) कालेज से बीए आनर्स अंग्रेजी की डिग्री हासिल की। उसके बाद 1994 में उन्होंने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास्टर इन सोशल वर्क्स की डिग्री हासिल की और 1995 में वे उटी शहर स्थित अफसर ट्रेनिंग अकादमी में शामिल हो गए। उसके बाद से बतौर सेकंड लेफ्टिनेंट जींतू का सैन्य जीवन में सफर शुरू हुआ और 30 जून 1999 में कारगिल में शहीद हो गए थे।

ये अवार्ड दिए जाएंगे
शहीद के पिता पूर्व फ्लाइंग अफसर टीआर गोगाई ने बताया कि आसाम में शहीद जींतू के नाम से क्वार्टर कांप्लेक्स और स्टेट लेवल फुटबाल टूर्नामेंट के अलावा जिला गोलाघाट में पांच स्कूलों में कैप्टन शहीद जींतू गोगाई वीर चक्र मैरीटोरियस स्कॉलरशिप शुरू की गई है, जो मेधावी छात्रों को दी जाएगी। इसकी राशि 2500 रुपये रखी गई है। इसके अलावा गोलाघाट में भी 26 जनवरी और 15 अगस्त को कैप्टन जींतू के नाम से ही आर्मी, एनसीसी और पुलिस को बेस्ट मार्च पास्ट के लिए रनिंग ट्राफी दी जाएगी। समाजसेवी हीरालाल कहते हैं कि इससे कैप्टन जींतू की शहादत तो हमेशा अमर रहेगी, मगर उसकी कुर्बानी और उसके नाम को अब आसाम में ही हर कोई जानेगा।

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