बच्चे तो खाए खाना, गुरुजी का निकले रोना

Ambala Updated Thu, 13 Dec 2012 05:30 AM IST
अंबाला। सरकारी स्कूलों में सरकार की मिड-डे मील योजना अब गुरुजी के आंसू निकाल रही हैं। अपनी जेब से खर्च कर गुरुजी को छात्रों को खाना खिलाना पड़ रहा है। तीन माह से मिड-डे मील का फंड नहीं मिल रहा, जबकि एलपीजी पर भी खर्च बढ़ गया है। यही नहीं खाद्य पदार्थों के रेट भी आसमान छू रहे हैं, जिके कारण सारा बजट गड़बड़ाया हुआ है।
जिला के सरकारी स्कूलों में इन दिनों मिड-डे मील को पकाने के लिए समस्या गंभीर होती जा रही है। हालात यह हैं कि स्कूलों में मिड-डे मील के चूल्हे जलाने मुश्किल हो रहे हैं। अध्यापकों की मानें, तो ईंधन पर होने वाला खर्च कई गुणा बढ़ गया है, जबकि खाद्य पदार्थों के रेट भी बढ़ गए हैं। सबसे बड़ी समस्या एलपीजी को लेकर है। पहले घरेलू सिलेंडर मिल रहे थे, लेकिन अब यह नहीं मिल रहे। ऐसे में कामर्शियल सिलेंडर लेकर काम चलाना पड़ रहा है। घरेलू सिलेंडर 405 रुपये में मिलता था, लेकिन अब यह 1171 रुपये में मिल रहा है। इसी के चलते उनके जेबों पर अत्यधिक बोझ पड़ रहा है, लेकिन विभाग की ओर से कोई राहत नहीं है। शिक्षकों की मानें, तो पिछले काफी समय से मिड-डे मील की राशि ही जारी नहीं की गई। ऐसे में वे कब तक अपनी जेब से मिड-डे मील को चलाएंगे, समझ नहीं आ रहा।

कितने स्कूल हैं और कितना बच्चों को मिलता है
अंबाला में 532 प्राइमरी स्कूल हैं, जबकि 132 मिडल स्कूल, 79 हाई स्कूल व 75 सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं। इन स्कूलों में नर्सरी कक्षा से आठवीं तक के विद्यार्थियों को भोजन की प्रदान किया जाता है। प्राइमरी स्कूलों में यह राािश् 3.11 रुपये प्रति बच्चे के हिसाब से दी जाती है। छठी से आठवीं कक्षा के बच्चों के लिए 4.65 रुपये प्रति बच्चे के हिसाब से मिड-डे मील दिया जाता है।

यह हैं परेशानियां
अध्यापकों की मानें, तो मिड-डे मील की राशि में खाद्य सामग्री पूरी नहीं आ सकती। राशन के दामों में बीस से तीस प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है, जबकि ईंधन के दामों में तो तीन सौ प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है।

यह कहना है संगठनों का
अंबाला। इस बारे में राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ-949 के जिला महासचिव राजेश वर्मा का कहना है कि मिड-डे मील को लेकर परेशानियां तो हैं, लेकिन फिर भी किसी तरह से स्कूलों में इस योजना को चलाया जा रहा है।

‘मिड-डे मील को लेकर परेशानियां तो हैं, जिसकी जानकारी प्रशासन को है। रही बात सिलेंडरों की, तो इसके बारे में निर्देश साफ नहीं हैं। अध्यापक भी इस मामले में थोड़ा सहयोग करें। जल्द ही इन समस्याओं का निपटारा किया जाएगा।’
- डॉ. एसएस फुलिया, एडीसी अंबाला

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