जर्जर हो रही पटरियां, ट्रेनों को खतरा

Ambala Updated Fri, 07 Dec 2012 05:30 AM IST
अंबाला। सर्दी धीरे-धीरे अपना असर दिखा रही है। कुछ ही दिनों बाद कोहरा भी माहौल को अपनी आगोश में ले लेगा। एक ओर जहां कोहरा जहां ट्रेनों की रफ्तार पर ब्रेक लगा देता है, वहीं दूसरी ओर अत्यधिक सर्दी की वजह से जर्जर हो चुकी पटरियां चटक जाती है और उनमें दरारें आ जाती हैं। इससे ट्रेनों के डीरेलमेंट होने का खतरा बना रहता है।
इसी खतरे को भांपते हुए अंबाला रेल मंडल पूरी तरह अलर्ट हो गया है। डीआरएम प्रदीप कुमार सांघी ने सर्दी और कोहरे में होने वाली परेशानी को देखते हुए कोहरा फैलने से पहले पटरियाें का सर्वे करवाकर उनकी स्थिति जानने के लिए विशेष टीम गठित की है। इस टीम में 600 कर्मचारी होंगे। इन कर्मचारियों को कई टीमों में बांटा गया है। टीम के सदस्य कोहरा पड़ने से पहले ही अंबाला रेल मंडल में पटरियों का सर्वे कर ये चिह्नित करेंगे कि कौन सी ऐसी जर्जर पटरियां हैं, जिनकी चटकने की आंशका हो सकती है। साथ ही ये भी देखा जाएगा कि कौन से पटरी को बदलने की आवश्यकता है। उसके बाद जल्द ही पटरियों की मरम्मत और उन्हें बदलने का काम शुरू किया जाएगा। अंबाला रेल मंडल के अफसरों ने कोहरा बढ़ने से पहले ही इस पर एक्सरसाइज शुरू करवा दी है।

पिछले साल 9 घटनाएं
ट्रेन की जर्जर पटरियां अमूमन डीरेलमेंट का कारण बनती है, सर्दी में कोहरा बढ़ने के बाद पटरियों के चटकने की घटनाएं अपेक्षाकृत ज्यादा देखने को मिलती है। कोहरे की वजह से उनकी मरम्मत व उन्हें चिन्हित करने में बहुत परेशानी खड़ी हो जाती है। पिछले साल अंबाला मंडल और अंबाला-दिल्ली ट्रैक पर लगभग नौ घटनाएं ऐसी हुई, जिसमें कई जगह पटरियां चटकी। इसी वजह से अधिकतर जगह डीरेलमेंट होते-होते बचा। कुछेक बार ट्रेन बेपटरी भी हुई। इस बार अंबाला रेल मंडल के अफसर यात्रियों से जुड़ा किसी प्रकार का जोखिम उठाना नहीं चाहते। इसलिए पटरियों की निगरानी का काम अभी से शुरू कर दिया गया है। विशेष टीमों में तैनात ट्रैकमैन और सुपरवाइजर पूरे मंडल में कोहरा बढ़ने से पहले पूरी पटरियाें की पेट्रोलिंग कर रिपोर्ट तैयार करेंगे। मंडल अफसरों को उम्मीद जताई है कि टीम के सामूहिक प्रयास से सर्दियों में मंडल में पटरियों के चटकने और उसकी वजह से डीरेलमेंट की घटनाएं कम होंगी।


कुछ दिन पहले हुआ हादसा
अंबाला छावनी रेलवे स्टेशन पर कुछ दिन पहले ही जर्जर पटरी की वजह से गेहूं लदी माल गाड़ी के तीन डिब्बे बेपटरी हो गए। डीआरएम और अन्य अफसर देररात मौके पर पहुंचे और डीआरएम ने इस घटना में जांच के आदेश दिए। इसमें ये पाया गया था कि ट्रैक में लकड़ी के स्लीपर लग हुए थे और ट्रैक की हालत जर्जर थी। इसकी वजह से ये हादसा हुआ। ऐसी घटनाएं दोबारा न हो, इसके लिए रेलवे ने अपना काम शुरू कर दिया है।

‘सर्दी में पटरियों के चटकने और उसमें दरारें पड़ने जैसी घटनाएं सामने देखने को मिलती है। इससे बचने के लिए अंबाला रेल मंडल ने ट्रैक मैन की कई टीमें बनाकर उन्हें पूरे मंडल में पटरियों के पेट्रोलिंग और जर्जर पटरियों को चिह्नित करने का काम सौंप दिया है। पूरी सर्दिर्यों में ये काम लगातार चलता रहेगा। अंबाला रेल मंडल कोहरे और सर्दी में रेल और रेल यात्रियों की सेफ्टी को लेकर पूरी तरह संजीदा है।
- प्रदीप कुमार सांघी, डीआरएम अंबाला

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