लीज लैंड 164-सी में घपलेबाजी का मामला

Ambala Updated Mon, 26 Nov 2012 12:00 PM IST
अंबाला। अंबाला छावनी के इंदिरा पार्क के साथ सटी सबसे बेशकीमती लीज की जमीन सर्वे नंबर 164-सी को हरियाणा सरकार के शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय से विकास शुल्क मुक्त करवाने के लिए निदेशालय के ही फर्जी आदेश तैयार करने के मामले में अब पुलिस की इकोनामिक्स क्राइम सेल (आर्थिक अपराध शाखा) जांच करेगी।जबकि इस मामले की एक अलग जांच कैंट पुलिस भी कर रही है। पुलिस ने इस मामले में फर्जी निदेशालय का आदेश तैयार करने वाले अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज किया हुआ है। चूंकि मामला गंभीर है, इसलिए पुलिस इस फर्जीवाड़े की तह तक जाना चाहती है, इसलिए अब इस मामले की अलग-अलग दोहरी जांच चलेगी।
इस मामले की जांच पहले सीआईए स्टाफ को दी गई थी। मगर अब इस जांच को इकोनामिक्स क्राइम सेल के हवाले कर दिया गया है। सीआईए स्टाफ के प्रभारी कुलभूषण कहते हैं निदेशालय के फर्जी आदेश तैयार करने के मामले में जो जांच सीआईए को सौंपी गई थी, उसे रविवार को ही इकोनामिक्स क्राइम सेल को ट्रांसफर की गई है। उधर, कैंट पुलिस के जांच अफसर पृथ्वी सिंह के अनुसार उनके स्तर पर भी अभी जांच चल रही है। नगर निगम से उन्होंने इस बाबत रिकार्ड मांगा है, वहां से रिकार्ड मिलने के बाद कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी। उनका दावा है कि जल्द ही जांच को पूरा किया जाएगा।

ये है मामला

छावनी के इंदिरा पार्क के साथ सटी लीज लैंड सर्वे नंबर 164 सी के नाम से 4.16 एकड़ जमीन है। इस जमीन को राबर्ट पवेलियन के नाम से जाना जाता है। 1932 में अंग्रेजों ने अंबाला के आरबीएल ट्रस्ट को लीज पर दिया था। यह जमीन खेल के मैदान के लिए दी गई थी। इस जगह पर बढ़िया फुटबाल का मैदान बना हुआ है। मगर उसके बाद इस जमीन के लीज दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर इस जमीन को अनिश्चित काल के लिए लीज पर दिखा दिया गया। जिस पर आरबीएल ट्रस्ट एक स्कूल बनाना चाहता था। जिसके चलते ट्रस्ट ने नगर परिषद (अब नगर निगम) में स्कूल का बिल्डिंग प्लान जमा करवाया और करीबन 4 लाख रुपये जमा करवाए। लेकिन तत्कालीन नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी ट्रस्ट को लेटर लिखकर इस बिल्डिंग प्लान के लिए एक सप्ताह के भीतर 29,32,349 रुपये बतौर विकास शुल्क, बीए फीस, मलबा चार्जिज, स्कूर्टनी फीस व जमानत के रूप में जमा करवाने के निर्देश दिए। लेकिन इस विकास शुल्क पर ट्रस्ट ने आपत्ति जताई। इस आपत्ति के बाद निगम के तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी ने हरियाणा सरकार के शहरी स्थानीय निकाय के निदेशक को पत्र लिखकर उनसे ये मार्गदर्शन मांगा कि इस जमीन को तत्कालीन संपदा अधिकारी एवं उपायुक्त अंबाला सदर द्वारा अनिश्चित काल के लिए लीज देने बारे आदेश जारी किए जा चुके हैं, इसलिए ये बताया कि जाए कि इस जमीन पर विकास शुल्क लेना चाहिए या नहीं? इस बाबत तत्कालीन नगर परिषद के अधिकारी अभी निदेशालय के जवाब का इंतजार कर ही रहे थे कि तभी निदेशक शहरी स्थानीय निकाय चंडीगढ़ की ओर से एक लैटर नंबर सीटीपी-ए3/2009/32634 कार्यकारी अधिकारी, अंबाला सदर को प्राप्त हुआ। ये लेटर वरिष्ठ नगर योजनाकार, कृते: निदेशक शहरी स्थानीय निकाय, हरियाणा चंडीगढ़ की ओर से भेजा गया था। इसमें लिखा गया था कि ये जमीन पुराने शहर में 1975 से पहले की है, इसलिए वहां पर विकास शुल्क नहीं लिया जाएगा। बाद में जांच के बाद ये खुलासा हुआ कि संबंधित जमीन पर विकास शुल्क न लिए जाने का जो आदेशात्मक लेटर निदेशायल से नगर परिषद अबाला सदर को मिला था, वो फर्जी था। संबंधित लैटर निदेशालय से कभी जारी ही नहीं हुआ। बीच में से ही मिलीभगत कर इस लैटर को नगर परिषद अंबाला सदर भिजवा दिया गया।

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