‘संघर्ष’ और ‘उम्मीद’ में गुजरेगी दिवाली

Ambala Updated Tue, 13 Nov 2012 12:00 PM IST
अंबाला। इस बार दिवाली का त्योहार विभिन्न सरकारी कर्मचारियों और अनुदान प्राप्त सरकारी शिक्षकों के लिए ‘संघर्ष’ और ‘उम्मीदों’ में गुजर जाएगा। बहुत से कर्मचारियों की जेबें जहां इस बार खाली रह जाएंगी, वहीं कई कर्मचारियों को उम्मीद है कि उनका वेतन व बकाया शायद दिवाली के बाद मिल जाए। उधर, दुग्ध उत्पादक वर्ग को भी इस दिवाली पर झटका लग गया है। दुग्ध उत्पादकों का वीटा ने परचेज रेट कम कर दिया है। इससे इन दुग्ध उत्पादकों में रोष है।

सात माह से जेब खाली, कैसे मने दिवाली
जिले में राजकीय स्कूलों में लगे कंप्यूटर अध्यापकों व लैब सहायकों को सात माह से वेतन ही नहीं मिल रहा है। ऐसे में वे परेशान हैं, क्योंकि साल का सबसे बड़ा त्योहार सिर पर है और जेबें खाली हैं। कभी महावीर पार्क, तो कभी इंदिरा पार्क में एकत्रित होकर रणनीति तैयार करते हैं और फिर जिला शिक्षा अधिकारी व डीसी कार्यालय पर प्रदर्शन करते हैं। कई माह से यही काम चल रहा है, मगर कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई और सात का वेतन फंसा है। परमजीत, राजीव, रेनू, एकता, अजय, रीना, सीताराम, जरनैल, रवि, सुशील व गुरजीत के अनुसार वे लोग संघर्ष कर रहे थे। उम्मीद थी कि दिवाली से पहले वेतन मिल जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस बार तो दिवाली खाली जाएगी। मगर उम्मीद है दिवाली के बाद कुछ हो जाए।

हजारों बेरोजगार शिक्षकों को उम्मीद
बेरोजगार अध्यापक संघ के बैनर तले जिले के सैंकड़ों शिक्षक इस दिवाली पर भी अजीब दुविधा में फंसे हुए हैं। नियुक्तियों के लिए आवेदन तो किया हुआ है। मगर शिक्षा विभाग के तिकड़म में ऐसे फंसे हुए हैं कि बिना इंटरव्यू ही ये शिक्षक बाहर हो जाएंगें। क्योंकि शिक्षा विभाग एचटेट और एसटेट की शर्त पहले ही खत्म कर इनकी मुश्किलें बढ़ा चुका है। ये शिक्षक अंबाला से दिल्ली राष्ट्रपति भवन तक पैदल मार्च और पंचकूला शिक्षा सदन में मां दुर्गा का पाठ तक किया। लेकिन अभी भी इन बेरोजगार शिक्षकों का भविष्य अधर में ही। प्रदेशाध्यक्ष तिलकराज कहते हैं कि सरकार उन्हें कम से कम एक मौका तो दे। सरकार ऐसी नीति न बनाए कि वे बिना किसी मौके के ही बाहर हो जाएं।

गुरु जी को भी आस, बहुरेंगे दिन
जिले के 34 एडिड स्कूलों के अधिकृत स्टाफ के हालात भी ज्यादा अच्छे नहीं हैं। कुछ स्कूल ऐसे हैं, जहां पिछले छह माह से शिक्षकों को पूरा वेतन ही नहीं मिला, जबकि दो स्कूल तो ऐसे हैं, जिनके स्टाफ को कई महीनों से वेतन नहीं मिला, जबकि एक स्कूल के स्टाफ का तो तीन साल का वेतन फंसा पड़ा है। हरियाणा अनुदान प्राप्त स्कूल अध्यापक संघ के प्रदेश महामंत्री रमेश बंसल कहते हैं वेतन के अलावा भी कई और मदों में शिक्षकों का करोड़ों रुपये बकाया है, जो शिक्षकों व गैर शिक्षक स्टाफ को दिया जाना है, मगर कुछ नहीं मिला। उनके अनुसार सबसे बड़े दिवाली गिफ्ट की उम्मीद की जा रही थी कि सरकार एडिड स्कूलों के टेकओवर की घोषणा कर देगी। मगर वो भी नहीं हुआ।

खाली जेब मनेगी आशा वर्करों की दिवाली
पिछले कई दिनों से अपने बकाया वेतन की मांग को लेकर संघर्ष कर रही जिले की करीबन छह सौ आशा वर्करों को भी उम्मीद है कि दिवाली से पहले तो नहीं, शायद दिवाली के बाद ही उनका बकाया वेतन मिल जाए। आशा वर्कर नेता प्रेम लता व सुषमा कहती है कि आशा वर्कर डोर-टू-डोर जाकर बच्चों को पोलिया ड्राप्स पिलाती है। स्वास्थ्य महकमे की विभिन्न योजनाओं को भी जन-जन तक पहुंचाने का काम करती है। मगर उसके बावजूद भी दिवाली पर उनकी जेबें खाली है। जो अच्छी बात नहीं

काम तो करवा लिया, पर नहीं दिया मेहनताना
जनगणना के दौरान काफी संख्या में डाटा आपरेटर प्रशासन ने रखे थे। जिन्होंने जनगणना का सारा डाटा कंप्यूटर में फीड किया, मगर हैरानी की बात यह कि छह माह गुजर गए हैं, अभी भी 334 के करीब डाटा आपरेटर ऐसे हैं, जो छह माह से अपने मेहनताने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इन कर्मचारियों के प्रधान प्रदीप कुमार के अनुसार प्रशासन को सोचना चाहिए कि दिवाली कितना बड़ा त्योहार है, इसलिए इससे पहले ही उनका वेतन उन्हें दिया जाना चाहिए।

नहीं मिला बोनस, रोडवेज कर्मियों में रोष
रोडवेज कर्मियों की मानें, तो ऐसा पहली बार हुआ है जब उन्हें इस दिवाली पर बोनस नहीं मिल रहा है। इसी बात को लेकर उनमें जबरदस्त रोष की स्थिति है। रोडवेज कर्मचारियों के नेता व सर्व कर्मचारी संघ के अध्यक्ष इंद्र सिंह बधाना कहते हैं कि हर साल दिवाली से पहले कर्मचारियों को बोनस मिल जाता है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। जिसे लेकर कर्मचारियों में खासा रोष है।

शिक्षा विभाग के लिपिक भी संघर्षरत
शिक्षा विभाग के लिपिक कर्मचारी भी छठे वेतनमान की विसंगतियों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उन्हें सरकार ने आश्वासन दिया था कि दिवाली से पहले सारी विसंगतियां दूर हो जाएंगी और उन्हें पंजाब के लिपिक कर्मियों के बराबर वेतनमान दिया जाएगा। लिपिक वर्ग के कर्मचारी नेता सतीश सेठी के अनुसार सरकार ने वादाखिलाफी की है। इसलिए सभी लिपिक कर्मियों ने 18 नवंबर को वित्तमंत्री हरियाणा के आवास पर धरना देंगे।

निगम के सफाई कर्मियों की जेबें खाली
निगम ने तदर्थ आधार पर सफाई कर्मी रखें हुए हैं। उन्हें भी समय पर वेतन नहीं मिला। जिसके चलते कई मांगों को लेकर वे पिछले कई दिनों से संघर्षरत रहे और त्योहारी सीजन में उन्होंने दो दिन सफाई व्यवस्था भी ठप रखी। कर्मचारी नेता प्रदीप कुमार, देसराज व संतराम के अनुसार निगम अफसर केवल अपना ही सोचते हैं, निचले कर्मचारियों के दर्द और संघर्ष से उन्हें कोई लेना-देना नहीं होता। निगम आयुक्त ये सुनिश्चित करें कि सभी कर्मचारियों को वेतन और पेंशनर्स को पेंशन समय पर मिले।

दुग्ध उत्पादक को लग गई चपत
वीटा ने रेटों के खेल ने दुग्ध उत्पादकों व दुग्ध उपभोक्ताओं दोनों पर मार की है। कुछ समय पहले वीटा ने दूध के रेट में एक रुपये का इजाफा कर उपभोक्ताओं पर मार की। उसके बाद अब कुछ दिन पहले दुग्ध उपभोक्ताओं का परचेज रेट भी घट गया। सात माह में ये परचेज रेट 4.20 रुपये प्रति किलो फैट से घटकर अब 3.74 रुपये प्रति किलो फैट तक पहुंच गया है। वीटा मिल्क प्लांट के निदेशक परमजीत सिंह बड़ौला के अनुसार वे मानते हैं कि वीटा के दुग्ध उपभोक्ताओं व उत्पादकों पर दोनों पर मार पड़ी है। लेकिन वे अफसरों से बातचीत कर कुछ राहत दिलवाने को लेकर संघर्षरत हैं। उन्हें उम्मीद है कि दिवाली के बाद परचेज रेट थोड़े ऊपर उठे।

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