अवैध कब्जों का शिकार लीज संपत्तियां

Ambala Updated Fri, 02 Nov 2012 12:00 PM IST
अंबाला। छावनी नगर निगम के अंतर्गत लीज संपत्तियों पर कब्जे का जबरदस्त खेल चल रहा है। नगर निगम की मिलीभगत से लीज संपत्तियों पर लीज होल्डर मनमाने ढंग से कुछ भी व्यवसायिक गतिविधियां करे या व्यवसायिक प्रतिष्ठान बना दे, कोई पूछने वाला नहीं। इस पूरे खेल में सरकार को करोड़ों का चूना लग रहा है। इसके लिए नगर निगम छावनी के अफसर और कर्मचारी जिम्मेदार हैं।
छावनी नगर निगम में कई संपत्तियां लीज संपत्तियां है, जो विभिन्न पीरियड के लिए अलग-अलग लोगों को लीज पर दी हुई है। लीज देते वक्त जो शर्ते निर्धारित की गई थीं, उन शर्तों का आज कोई पूरा नहीं करता। लगभग सभी लीज धारकों ने बिना निगम की अनुमति के इन संपत्तियों में अपने हिसाब से बदलाव कर लिया।
रेलवे रोड लोकल बस स्टैंड के पास, राय मार्केट क्वालिटी बिजली घर के सामने, बैंक रोड और राय मार्केट रोड पर कई लीज संपत्तियां ऐसी हैं, जिन पर लीज धारकों द्वारा लीज संपत्तियों को अपने तरीके से इस्तेमाल कर मोटा मुनाफा कमाया जा रहा है। इन लीज संपत्तियों पर न केवल होटल, रेस्तरां, विभिन्न शोरूम और यहां तक की बैंक तक बन गए हैं। लेकिन वहीं इन व्यवसायिक गतिविधियों को बिना अनुमति चलाना न तो लीज शर्तों में शामिल है और न ही निगम से इसकी अनुमति ली गई है।
हैरत की बात यह कि निगम की लीज शाखा के कर्मचारियों से मिलीभगत कर न केवल लीज संपत्तियों पर बहुमंजिला भवन तक खड़े हो गए, बल्कि निगम द्वारा इस दौरान लीज धारकों को भेजे गए नोटिसों की भी कोई परवाह नहीं की गई। क्वालिटी बिजली घर चौक पर तो एक विवादित लीज संपत्ति पर विवाद के बावजूद एक नया बैंक किराए पर चढ़ा दिया गया। निगम की कार्रवाई केवल नोटिस तक ही सीमित रह गई।

यूं हो रहा सरकार को नुकसान
छावनी नगर निगम की लीज शाखा के कर्मचारियों और अफसरों की सुस्ती कहें या मिलीभगत लीज संपत्तियों पर अवैध कब्जों और निर्माण के खेल में सरकार को करोड़ों का चूना लग रहा है। क्योंकि लीज संपत्तियों पर जितना अवैध निर्माण हो चुका है, यदि उनका डेवलपमेंट शुल्क ही कैलकुलेट कर लिया जाए तो वो करोड़ों में आएगा। दूसरा लीज संपत्तियों के कब्जे और अवैध निर्माण से संबंधित विवादित केस अदालतों में पहुंच चुके हैं, वहां भी इन केसों की पैरवी करने के लिए बतौर लीगल खर्च भी सरकार को वहन करना पड़ रहा है, इससे भी सरकार को ही नुकसान हो रहा है।

काटी एडवांस रसीदें
निगम की लीज शाखा द्वारा कई विवादित लीज संपत्तियों की भी एडवांस रसीदें काट दी गई। ये विवादित लीज संपत्तियां वो है जिनके केस अदालत में चल रहे हैं। ऐेसे में उनकी एडवांस लीज मनी की रसीदें काटकर उन्हें फायदा पहुंचाने का प्रयास किया गया है। मामला सामने आने के बाद निगम सचिव ने इसकी रिपोर्ट बनाकर डीसी अंबाला को सौंप दी है। इस पर कार्रवाई के लिए डीसी अंबाला के आदेशों का इंतजार है।
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‘जो भी विवादित लीज संपत्तियां है, उनके द्वारा अवैध निर्माण करवाते समय बाकायदा नोटिस भेजा जाता है। मगर उसका लीज धारकों पर कोई असर नहीं होता। इसलिए उनके केस अदालत में डाले गए हैं। वहां ये विवादित मामले विचाराधीन हैं। डीसी अंबाला के संज्ञान में भी ऐसे विवादित मामले लाए जा रहे हैं’
- केके यादव, सचिव, नगर निगम

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