बिना रिकार्ड करोड़ों की जमीन का फर्र्जी सर्टिफिकेट तैयार!

Ambala Updated Sat, 20 Oct 2012 12:00 PM IST
अंबाला। छावनी की सबसे बेशकीमती लीज की जमीन सर्वे नंबर 164-सी को लेकर चल रही धांधलेबाजी में एक और हैरतजनक खुलासा हुआ है। पहले इस जमीन को लाखों रुपये के विकास शुल्क से मुक्त करवाने के लिए चंडीगढ़ स्थित शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय का फर्जी आदेश तैयार किए गए और फिर इसी जमीन का एक फर्जी लैंड सर्टिफिकेट जारी कर एक ट्रस्ट को उसका लाभ देने का प्रयास किया गया।
ये लैंड सर्टिफिकेट सब-रजिस्ट्रार अंबाला कैंट एवं नायब तहसील कार्यलय से जारी किया गया। इस पर न तो डिस्पैच नंबर है और न ही कोई तारीख। हैरतजनक बात यह कि नायब तहसील कार्यालय से जो जमीन सर्टिफिकेट तैयार करवाया गया है, उस जमीन का रिकार्ड ही नायब तहसील कार्यालय में ही नहीं है। यानी बिना रिकार्ड के एक सरकारी कार्यालय द्वारा करोड़ों की लीज जमीन का एक फर्जी लैंड सर्टिफिकेट तैयार कर दिया गया।
इस मामले की डीजीपी हरियाणा को शिकायत होने के बाद अंबाला पुलिस ने इस मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा को सौंप दी है। इस लीज की जमीन की धांधलेबाजी को लेकर एक जनहित याचिका हाईकोर्ट में भी पेंडिंग है। उधर, आर्थिक अपराध शाखा ने इस मामले में अपनी प्राथमिक पूछताछ और जांच करने के बाद डीसी अंबाला को लिखकर इस मामले में जिम्मेदारी तय करने आग्रह किया है, ताकि फर्जी लैंड सर्टिफिकेट तैयार करने में जिम्मेदार कर्मचारी, अफसर और अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया जा सके।

कहां से जारी हुआ फर्जी लैंड सर्टिफिकेट?
इस मामले को लेकर प्रशासनिक अधिकारी भी हैरत में हैं। इसके चलते जिला प्रशासन भी राजस्व विभाग के माध्यम से इस मामले की जांच करवा रहा है। इस मामले में नायब तहसीलदार अंबाला छावनी द्वारा जिला राजस्व अधिकारी से आग्रह किया गया था कि जारी हुए भूमि प्रमाण पत्र के बारे में मार्गदर्शन करें। इस मामले में नायब तहसीलदार छावनी ने स्पष्ट किया कि सर्वे नंबर 164-सी का जो लैंड सर्टिफिकेट जारी किया गया है, नायब तहसील कार्यालय में इससे संबंधित न तो कोई रिकार्ड है, जिससे ये प्रमाणित हो कि यह प्रमाण पत्र इसी कार्यालय से जारी हुआ था। और न ही जारी हुए लैंड सर्टिफिकेट का कोई डिस्पैच नंबर कार्यालय में दर्ज है। इस मामले में नायब तहसील कार्यालय ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी, लेकिन पुलिस यह जानना चाहती है कि आखिरकार ये सर्टिफिकेट जारी कहां से हुआ, इसके लिए कौन जिम्मेदार है और किस तरह इसका लाभ पहुंचाने के लिए इसे जारी करवाया गया?

संदेह के घेरे में सरकारी कर्मचारी
करोड़ों रुपये की इस लीज लैंड को लेकर चल रही इस धांधलीबाजी में सामने आ रहे खुलासों ने नगर निगम और नायब तहसील कार्यालयों के कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर एक सवाल जरूर खड़ा कर दिया है। इस जमीन को विकास शुल्क से मुक्त करवाने के लिए निदेशालय के एक फर्जी आदेश नगर निगम में पहुंचे और आरबीएल ट्रस्ट के पक्ष में एक लैंड सर्टिफिकेट नायब तहसील एवं सब रजिस्ट्रार कार्यालय छावनी से जारी हुआ। सूत्र बताते हैं कि ये काम दोनों विभागों के कर्मचारियों की मिलीभगत से ही हो सकता है।
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‘करोड़ों रुपये की लीज लैंड का फर्जी लैंड सर्टिफिकेट तैयार हो गया है। पुलिस इसकी जांच कर रही है। नायब तहसील कार्यालय में जांच के दौरान मालूम हुआ कि वहां से ये सर्टिफिकेट जारी नहीं हुआ। इस मामले में डीसी अंबाला को लिखा गया है कि वे इस मामले में जिम्मेदारी तय करें, ताकि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज किया जा सके।’
-शमशेर सिंह, जांच अफसर, आर्थिक अपराध शाखा

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