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विकास शुल्क बचाने को फर्जी आदेश!

Ambala Updated Mon, 15 Oct 2012 12:00 PM IST
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अंबाला। अंबाला छावनी के सदर क्षेत्र की सबसे बेशकीमती लीज की जमीन सर्वे नंबर 164-सी को हरियाणा सरकार के शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय से विकास शुल्क मुक्त करवाने को लेकर निदेशालय के ही फर्जी आदेश तैयार कर दिए गए। यह खेल नगर निगम के कर्मचारियों और बाहरी लोगों की मिलीभगत से खेला गया। इस खुलासे के बाद अब निगम में हड़कंप का माहौल है।
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मामले का संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन ने कैंट थाने में फिलहाल अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी है। पुलिस इस मामले में संबंधित दस्तावेजों को जुटाने में जुटी हुई है। समाज सेवी एवं आरटीआई एक्टिविस्ट मदन लाल शर्मा द्वारा आरटीआई में मांगी गई जानकारी के बाद इस मामले का खुलासा हुआ था। जब ये मामला पकड़ में आया तो सभी अधिकारी भौचक्के रह गए। इसके बाद आला अफसरों ने पुलिस को इस मामले की जांच के लिए लिख दिया था।



ये था मामला
छावनी के सदर क्षेत्र में सर्वे नंबर 164 सी के नाम से 4.16 एकड़ जमीन मौजूद है। इस जमीन को राबर्ट पैवेलियन के नाम से जाना है। इसे 1932 में अंग्रेजों ने अंबाला के आरबीएल ट्रस्ट को लीज पर दिया था। ये जमीन खेल के मैदान के लिए दी गई थी। इस जगह पर बढि़या फुटबाल का मैदान बना हुआ है। मगर उसके बाद इस जमीन के लीज दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर इस जमीन को अनिश्चित काल के लिए लीज पर दिखा दिया गया। इस पर आरबीएल ट्रस्ट एक स्कूल बनाना चाहता था। इसके चलते ट्रस्ट ने नगर परिषद (अब नगर निगम) में स्कूल बिल्डिंग का प्लान जमा करवाया और करीबन 4 लाख रुपये जमा करवाए। लेकिन तत्कालीन नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी ट्रस्ट को लेटर लिखकर इस बिल्डिंग प्लान के लिए एक सप्ताह के भीतर 29,32,349 रुपये बतौर विकास शुल्क, बीए फीस, मलबा चार्जेज, स्क्रूटनी फीस और जमानत के रूप में जमा करवाने के निर्देश दिए। लेकिन इस विकास शुल्क पर ट्रस्ट ने आपत्ति जताई। इस आपत्ति के बाद निगम के तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी ने हरियाणा सरकार के शहरी स्थानीय निकाय के निदेशक को पत्र लिखकर उनसे ये मार्गदर्शन मांगा कि इस जमीन को तत्कालीन संपदा अधिकारी एवं उपायुक्त अंबाला सदर द्वारा अनिश्चित काल के लिए लीज देने बारे में आदेश जारी किए जा चुके हैं, इसलिए ये बताया कि जाए कि इस जमीन पर विकास शुल्क लेना चाहिए या नहीं? मगर उसके बाद निदेशालय से जवाब आया कि इस जमीन को रोबर्ट पैवेलियन यानी खेल के लिए लीज पर दिया गया था। इसलिए इस जगह पर स्कूल बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उसके बाद नगर परिषद के अधिकारी ने निदेशालय को दोबारा लेटर लिखते हुए निदेशालय से इस बात पर स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया कि संबंधित जमीन पर विकास शुल्क लेना चाहिए या नहीं? क्योंकि सदर क्षेत्र में अधिकतर जमीनें ओल्ड ग्रांट की है या लीज पर है और इन पर भवन निर्माण के लिए नक्शा पास करने हेतु पुराने रेट से विकास शुल्क लिया जाता है।

ये आया फर्जी आदेश!
इस बाबत तत्कालीन नगर परिषद के अधिकारी अभी निदेशालय के जवाब का इंतजार कर ही रहे थे कि निदेशक शहरी स्थानीय निकाय चंडीगढ़ की ओर से एक लेटर नंबर सीटीपी-ए3/2009/32634 कार्यकारी अधिकारी, अंबाला सदर को मिला। ये लेटर वरिष्ठ नगर योजनाकार, कृते: निदेशक शहरी स्थानीय निकाय, हरियाणा चंडीगढ़ की ओर से भेजा गया था। इस लेटर में ये लिखा गया था कि ये जमीन पुराने शहर में 1975 से पहले की है, इसलिए वहां पर विकास शुल्क नहीं लिया जाएगा।

इस तरह हुआ खुलासा
इस मामले की एक शिकायत अंबाला छावनी के मास्टर मदन लाल शर्मा द्वारा मुख्य चौकसी विभाग, चंडीगढ़ को की गई थी। इसमें उन्होंने संबंधित भूमि के रिकार्ड में छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया था। इसके साथ-साथ उन्होंने इसी संबंध में एक आरटीआई भी लगाई हुई थी। इसी जांच के बाद ये खुलासा हुआ कि संबंधित जमीन पर विकास शुल्क न लिए जाने का जो आदेशात्मक लेटर निदेशालय से नगर परिषद अंबाला सदर को मिला था, वो फर्जी था। संबंधित लेटर निदेशालय से कभी जारी ही नहीं हुआ। बीच में से ही मिलीभगत कर इस लेटर को नगर परिषद अंबाला सदर भिजवा दिया गया।

‘निदेशालय से जो फर्जी आदेश बनाया गया, उस मामले में केस दर्ज हो चुका है। अभी ये केस अज्ञात के खिलाफ दर्ज किया गया है। इस मामले में अंबाला और चंडीगढ़ निदेशालय से दस्तावेज जुटाने हैं। मामला थोड़ा पेचिदा है, जांच चल रही है।’
- पृथ्वी सिंह, जांच अफसर, अंबाला पुलिस

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