एडीसी कार्यालय के बाहर उड़ेला दूध

Ambala Updated Tue, 09 Oct 2012 12:00 PM IST
अंबाला। वीटा मिल्क प्लांट अंबाला ने चार दिनों से प्राइवेट दुग्ध उत्पादकों और मिल्क वेंडरों से दूध लेना बंद कर दिया गया है। प्लांट के अधिकारियों के अनुसार प्लांट न तो प्राइवेट दुग्ध उत्पादकों से दूध लेने के लिए बाध्य है और न ही अभी प्लांट को दूध की ज्यादा जरूरत है। इसलिए आला अफसराें के फरमान के चलते दूध लेना बंद किया गया है।
हरियाणा डेयरी डेवलपमेंट कोआपरेटिव फेडरेशन के आला अधिकारियों की ओर से निजी दूध उत्पादकों से वीटा मिल्क के प्लांटों में दूध न लेने के फरमान ने प्राइवेट दुग्ध उत्पादकों को बुरी तरह से भड़का दिया है। आक्रोशित प्राइवेट दूध उत्पादकों ने सोमवार को एडीसी कार्यालय में जमकर बवाल काटा और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। दुग्ध उत्पादकों ने दूध से भरे ड्रमों को एडीसी कार्यालय के बाहर उडे़ल कर अपना रोष प्रदर्शन किया। प्राइवेट दुग्ध उत्पादकों को युवा इनेलो विंग ने भी संदीप राणा के नेतृत्व में समर्थन देेने की घोषणा कर दी है।

तेज करेंगे आंदोलन
विवाद के चलते प्राइवेट दुग्ध उत्पादकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गौर न किया गया, तो वह अपना आंदोलन और तेज करेंगे। उन्होंने कहा कि वे लगातार अपना दूध प्लांट में देते आ रहे हैं, ऐसे में अचानक प्राइवेट मिल्क फार्मस का दूध लेने से इनकार कर दिया गया। इसे नाइंसाफी बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे रोजाना दुग्ध उत्पादकों का भारी नुकसान हो रहा है और उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वे अपना दूध कहां ले जाएं? इसी के फलस्वरूप उन्होंने एडीसी कार्यालय के बाहर लाकर अपना सारा दूध सड़क पर उड़ेल दिया है। उत्पादकों के अनुसार इसी वजह से पिछले कुछ दिनों से वे लोग आर्थिक बदहाली से जूझ रहे हैं। उनका आरोप है कि जब गरमी में दूध की कमी थी, तब तो प्लांट ने उनसे दूध ले लिया और अब जब मौजूदा मौसम में दूध पर्याप्त होने लगा है, तो उनसे दूध लेना अचानक बंद कर उनके समक्ष मुश्किलें पैदा कर दी है। उन्होंने कहा कि वे इसी मुद्दे को लेकर अदालत में भी गुहार लगाने पर विचार करेंगे।

टारगेट से ज्यादा दूध आ रहा है
वीटा मिल्क प्लांट के मुख्य अधिशासी अधिकारी जसपाल सिंह के अनुसार वीटा की पहले ही छह सौ के करीब रजिस्टर्ड दुग्ध समितियां हैं, जिससे लगातार दूध आ रहा है। प्लांट का टारगेट रोजाना जितना दूध एकत्रित करना है, उससे ज्यादा दूध आ रहा है। प्राइवेट डेयरी फार्मर और वेंडर उनके नियमित सप्लायर नहीं हैं, वे प्लांट को तब दूध देते हैं, जब उनका दूध बच जाता है। ऐसे में काम नहीं चलता। खैर, दूध न लेने के आदेश आला अधिकारियों के हैं, प्लांट इसमें कुछ नहीं कर सकता।


दूध व्यापारियों की समस्या को लेकर विटा मिल्क प्लांट के अधिकारियों से बात की जा रही है और जो भी इसको लेकर सरकार के निर्देश हैं उस पर अमल किया जायेगा और उचित कार्रवाई की जाएगी।
- डा. एसएस फूलिया, एडीसी, अंबाला

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