फिर जाम से बेहाल मंडियां, सड़कों पर धान

Ambala Updated Wed, 03 Oct 2012 12:00 PM IST
अंबाला। जिले में धान की आवक शुरू हो गई है, अभी तक मंडियाें में करीबन सत्तर हजार क्विंटल धान आ चुका है। आढ़तियों की मानें तो 10 से 12 अक्तूबर तक मंडियाें में जबरदस्त धान की आवक होने वाली है, क्योंकि अभी जो धान मंडियों मे पहुंच रही है, वो साठी है।
किसानों की परंपरागत धान की फसल की अभी कटाई और झड़ाई चल रही है। दो-चार दिन में धान मंडियों में पहुंचनी शुरू हो जाएगी और 12 अक्तूबर तक मंडियों में जबरदस्त धान आ जाएगी। इसके बाद भी सिलसिला अगले माह तक जारी रहेगा, लेकिन इन सबके बावजूद अभी तक जिले की बड़ी मंडियों में लगने वाले जाम से निपटने के लिए स्थानीय प्रशासन ने कोई पुख्ता प्लानिंग नहीं बनाई है।
जिले में अंबाला शहर की अनाज मंडी सबसे बड़ी अनाज मंडी है। इसके अतिरिक्त अंबाला छावनी, नारायणगढ़, शहजादपुर, साहा, मुलाना और बराड़ा मंडी में भी किसान अपना धान बेचने के लिए पहुंचते हैं, लेकिन शहर अनाज मंडी में शहर के अतिरिक्त पंजाब के भी आसपास से किसान धान लेकर आता है।
अब इन मंडियाें में अमूमन समस्या यह आ जाती है कि यहां मार्केट कमेटियों के पास ये प्लान नहीं होता कि धान की ट्रालियां मंडी में घुसेंगी, कब तक वहां अपना सामान उतारेंगी और कहां से निकलेंगी। उसके पीछे-पीछे दूसरी ट्रालियां कतार में होती हैं, उठान के लिए ट्रक पहले ही मंडियों में फंसे होते हैं।
मंडियों में आलम यह हो जाता है कि हर तरफ से जाम ही जाम लग जाता है। मंडियों में आढ़तियों व किसानों को बहुत परेशानियां झेलनी पड़ती है। इस बार फिर जाम से प्रशासन कैसे निपटेगा और किस तरह से ट्रालियों व ट्रकों को मंडियों में प्रवेश करवाएगा और कहां से उनकी निकासी करवाएगा, इस बारे में कुछ भी प्लान नहीं है। लिहाजा इस बार फिर से मंडियों में जबरदस्त जाम की समस्या से किसानों व आढ़तियों को दो-चार होना पड़ेगा।

धान बेचने को करना पड़ता है कई दिन इंतजार
किसान निर्मल सिंह, सूबेदार सिंह, मक्खन सिंह, अच्छर सिंह, कुलवंत सिंह, करनैल सिंह, फूल सिंह, तेजबीर राणा, दुष्यंत चौहान व सतेंद्र चौहान के अनुसार मंडियों में जाम की समस्या बड़ी गंभीर समस्या है। बिना कंट्रोल के ट्रालियां मंडियों में जाती है और बेतरतीब ढंग से खड़ी हो जाती है, बस इसी वजह से जाम लग जाता है, कोई रोकने-टोकने वाला ही नहीं होता। उनके अनुसार इसी जाम में फंसकर उन्हें अपनी फसल बेचने में ही दो-दो दिन लग जाते हैं, वे इस दौरान वहीं अपनी ट्रालियों पर ही दो दिन गुजारते हैं।

आढ़तियों की परेशानी
आढ़ती भारत भूषण अग्रवाल, अजय अग्रवाल, रजिंद्र कुमार, सतीश कुमार व रजिंद्र बंसल के अनुसार मंडियों में जाम न लगे, इसकी व्यवस्था करवाना प्रशासन की ड्यूटी बनती है। प्रशासन ऐसा इंतजाम करे कि बेरोक टोक ट्रालियां और उठान के लिए ट्रक मंडियों में जाएं और बाहर निकलें। उनके अनुसार स्थानीय प्रशासन की लापरवाही की वजह से ही मंडियों में जाम की स्थिति बनती है, जबकि जाम न लगे, इसके लिए सबसे जरूरी है कि मंडियों से नियमित उठान होता रहे। स्थानीय प्रशासन मंडियों से नियमित उठान भी नहीं करवाता, इसलिए भी जाम की स्थिति बनती है। क्योंकि हर किसान को अपना अनाज उतारने की जल्दी होती है। आढ़तियों के अनुसार इस बार प्रशासन इंतजाम बेहतर रखे, वरना पिछले सीजन की तरह आढ़तियों व किसानों को सड़कों पर फिर उतरना पड़ेगा।

शुरूआत में ही हालात बेकाबू
मंडियों में शुरूआती दिनों में ही हालात बेकाबू दिखाई देने लगे हैं। शहर और छावनी की मंडियों में सड़कों पर धान उतारा जा रहा है, इस वजह से शहर का सामान्य यातायात भी प्रभावित हो रहा है। छावनी की अनाज मंडी में लोगों ने जबरन अपनी कारें खड़ी की हुई हैं और किसान सड़कों पर अनाज उतार रहे हैं, जिस वजह से यहां छावनी में बहुत यातायात पूरी तरह बाधित रहा। किसानों का कहना है कि ये मंडी है न की पार्किंग। मार्केट कमेटी के कर्मचारियों को चाहिए कि मंडी में कारें खड़ी न होने दें, ताकि किसान सड़कों की बजाए मंडी में धान उतारें।
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‘जाम एक बड़ी समस्या है, मगर जिला प्रशासन के अधिकारियों का इस ओर पूरी तरह से ध्यान है। पूरा प्रयास किया जा रहा है ऐसी प्लानिंग तैयार की जाए कि मंडियों में आवाजाही पूरी तरह से सुचारु रहे और किसानों को जाम में फंसकर धान उतारने में लंबा इंतजार न करना पड़े।’
मोहित बेरी, सचिव, मार्केट कमेटी

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