90 हजार छात्रों के मिड डे मील पर संकट!

Ambala Updated Tue, 02 Oct 2012 12:00 PM IST
अंबाला। सिलेंडर पर केंद्र सरकार की ओर से सब्सिडी खत्म करने के बाद अब यहां उन स्कूलों के लिए भी एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है, जहां छात्रों के लिए मिड डे मील का खाना तैयार किया जाता है। इन स्कूलों को भी अब घरेलू की बजाए कामर्शियल सिलेंडर ही मिलेंगे। रसोई गैस एजेंसियों ने इस बारे में सभी स्कूलों में पत्र भेजने शुरू कर दिए हैं।
सब्सिडी खत्म होने से स्कूलों के प्राचार्यों और हेड टीचरों की भी चिंताएं बढ़ गई है। प्राचार्यों के अनुसार मिड-डे मील के लिए पहले से ही समय पर फंड नहीं आ रहा है। स्कूलों में प्राचार्य, हेड टीचर और अन्य शिक्षक खुद अपने जेब से खर्च कर मिड-डे मील का काम चलाते हैं, ऐसे में सिलेंडर का रेट अब अचानक 404 रुपये (घरेलू) से बढ़कर 1005 रुपये (कामर्शियल) हो जाने से संकट खड़ा हो गया है।

सिलेंडर देने आए तो वापस लौटाया
समस्या तब खड़ी हो गई जब स्कूलों द्वारा बुक करवाया गया गैस सिलेंडर एजेंसियों द्वारा नई कीमत पर स्कूलों में पहुंचने लगे। बहुत से स्कूलों के शिक्षकों ने इसे लेने से ही इनकार कर दिया है। शिक्षकों का कहना है कि पहले ही समय पर मिड-डे मील का फंड नहीं आता था, अब ऐसे में वह अपने जेबों से सिलेंडर के 1005 रुपये कैसे दें? इसलिए उन्होंने सिलेंडरों को वापस भेजवा दिया है और जिला शिक्षा विभाग को इस संबंध में शिकायत भेज दी है। उनके अनुसार फिलहाल स्कूल में कुछ लकड़ी का ईंधन खरीदा गया है, उससे खाना बन रहा है, मगर ये व्यवस्था भी ज्यादा दिन नहीं चल सकती।
शिक्षकों के अनुसार सिलेंडर का इस्तेमाल यहां आठवीं कक्षा तक के बच्चों के खाना पकाने के लिए होता है, अब बताइए इसमें कामर्शियल क्या है? आठवीं तक बच्चों को स्कूलों में निशुल्क शिक्षा दी जाती है। लेकिन अब अचानक सिलेंडर के रेट बढ़ जाने से बच्चों के खाना पकाने का संकट खड़ा हो गया है।

मिड-डे मील की स्थिति
अंबाला में 851 सरकारी और सरकारी अनुदान प्राप्त स्कूल ऐसे हैं, जहां मिड-डे मील का खाना दिया जाता है। यहां आठवीं कक्षा तक के 90068 छात्रों के लिए रोजाना खाना तैयार करवाया जाता है और उन्हें स्कूल में ही वितरित किया जाता है। मिड-डे मील का फंड भी रेगुलर नहीं आता। स्कूलों में शिक्षकगण मिलकर अपने जेब से पहले इसका खर्च चलाते हैं और जब फंड आता है, तो उसमें से अपने द्वारा खर्च किए रुपये ले लेते हैं। अब कामर्शियल सिलेंडर का रेट इतना ज्यादा है कि शिक्षक भी अपने जेब से खर्च करने में गुरेज करने लगे हैं, इसलिए बहुत से स्कूलों ने इस बार स्कूलों में आए सिलेंडर को भी वापस लौटा दिया।


विभाग मेंपहुंची ढेरों समस्याएं
इसी को लेकर कई स्कूलों की शिकायतें शिक्षा विभाग के पास पहुंच रही है। इसमें जिला शिक्षा अधिकारी से पूछा गया है कि बताइए महंगा सिलेंडर कैसे खरीदा जाए, क्योंकि अभी इसके बजट का कोई प्रावधान ही नहीं है, ऐसे में सिलेंडर के लिए वे अपने जेबों से रुपये कैसे खर्च करें? शिक्षकों ने शिकायत में कहा कि स्कूलों में सिलेंडर खत्म हो रहे हैं, अभी तो जैसे-तैसे लकड़ी के ईंधन से काम चल रहा है, मगर ये व्यवस्था ज्यादा देर कैसे चलेगी?


‘स्कूलों से शिकायतें पहुंच रही है। अभी इस मामले में वह कुछ नहीं कह सकती, रिपोर्ट बनाकर निदेशायल को भेजी जा रही है, ताकि वहां से कुछ निर्देश आए, तो आगे कोई कार्रवाई हो। मगर प्रयास किया जाएगा कि किसी स्कूल में मिड-डे मील का काम सिलेंडर की वजह से न रूके।’
- सावित्री सिहाग, जिला शिक्षा अधिकारी

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