एचडीएफसी बैंक के बाहर बुजुर्ग से लूटे साढ़े नौ लाख

Ambala Updated Fri, 28 Sep 2012 12:00 PM IST
यमुनानगर। निरंकारी भवन के पास स्थित एचडीएफसी बैंक के बाहर मोटरसाइकिल सवार दो युवकों ने एक बुजुर्ग से साढ़े नौ लाख रुपये लूट लिए। वारदात के करीब 15 मिनट बाद पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बाद एसपी समेत अन्य पुलिस अधिकारी आए और छानबीन की। माडल टाउन में रहने वाले बुजुर्ग जगमोहन लाल विनायक अपने दामाद नरेंद्र लांबा के साथ बुधवार को करीब साढ़े 12 बजे एचडीएफसी बैंक में आए। उन्होंने बैंक से साढ़े नौ लाख रुपये निकलवाए और रकम को एक बैग में रख दिया। बैग को नरेंद्र ने अपने हाथ में पकड़ लिया और दोनों करीब एक बजे बैंक से बाहर निकले। नरेंद्र ने अपने ससुर के हाथ में बैग पकड़ा दिया और खुद सड़क के किनारे खड़ी मोटरसाइकिल निकालने लगे। नरेंद्र के मोटरसाइकिल निकालने के बाद जगमोहन पिछली सीट पर बैठने लगे, तभी पीछे से बाइक पर दो युवक आए और जगमोहन के हाथ से बैग छीनकर भाग गए। जगमोहन और नरेंद्र ने शोर मचाया और उनका पीछा भी किया लेकिन युवक भागने में कामयाब रहे।
सीसीटीवी से नहीं मिली मदद
लूट के बाद सीसीटीवी कैमरे की मदद से युवकाें का सुराग लगाने का प्रयास किया गया लेकिन पुलिस को इसमें खास सफलता नहीं मिल पाई क्योंकि वारदात कैमरे की रेंज के बाहर हुई। 10 सितंबर को हुई लूट की वारदात भी कैमरे की रेंज से बाहर होने के कारण पुलिस को कोई मदद नहीं मिल पाई। ऐसे में बैंक के बाहर दूर तक कवर कर करने वाले कैमरे लगाए जाने चाहिए।

भाइयों को देने थे पैसे
जगमोहन लाल की अपने भाइयों से प्रापर्टी के बंटवारे की बात चल रही है। जगमोहन ने यह रकम भाइयों को देने के लिए बैंक से निकलवाई थी। कुछ सेकेंड में इतनी बड़ी रकम हाथ से निकल जाने का गम बुजुर्ग जगमोहन के चेहरे पर साफ नजर आ रहा था। वारदात के बारे में पुलिस को बता रहे जगमोहन की आवाज लगातार लड़खड़ाती रही और पूरा शरीर कांपता रहा। वारदात के बाद वह काफी देर तक गुमसुम हालत में रहे।
बैंक में रख रहा था कोई नजर
नरेंद्र लांबा के अनुसार बैंक में रकम निकालते समय एक युवक लगातार उन पर नजर रखे हुए था। इस बात की संभावना जताई जा रही है कि जब जगमोहन और नरेंद्र लांबा रकम निकालने के बाद बाहर निकलने लगे तो उसने बाहर मौजूद अपने साथियों को मोबाइल फोन पर सूचना दी।
चाय की दुकान पर रुके थे बदमाश
एचडीएफसी बैंक से थोड़ी दूर पर एक चाय की दुकान है। दुकान के बगल में एक मेकेनिक की दुकान है। मेकेनिक सोनू ने बताया कि दो युवक काफी देर से चाय की दुकान पर मौजूद थे और चाय पी रहे थे। वे बोलचाल से बंगाली प्रतीत हो रहे थे। एक युवक ने चाय पीने के बाद गुटका खाया और निरंकारी भवन के गेट पर थूक दिया। निरंकारी भवन के सामने थूके जाने पर सोनू ने उन युवकों को डांटा भी था। एक युवक के मोबाइल फोन पर तीन-चार बार किसी से बात की। आखिरी बार फोन सुनने के बाद दोनों युवक मोटरसाइकिल लेकर तेजी से बैंक की ओर लपके।

अधिकारियों ने की पूछताछ
वारदात के करीब 15 मिनट बाद पुलिस की एक पीसीआर बैंक पहुंची। इसके 10 मिनट बाद एसएचओ सिटी संदीप कुमार, सीआईए इंचार्ज जगबीर, डिडेक्टिव स्टाफ इंचार्ज रामकुमार वहां आए। पांच मिनट बाद ही डीएसपी हेडक्वार्टर फूल कुमार बैंक में आ गए। वारदात के करीब 50 मिनट बाद पुलिस अधीक्षक मितेश जैन और डीएसपी सुरेश कौशिक बैंक पहुंचें। पुलिस अधीक्षक ने जगमोहन और नरेंद्र लांबा और बैंक स्टाफ से वारदात के बारे में पूछताछ की।

16 दिन में दूसरी वारदात
16 दिन में एचडीएफसी बैंक के ग्राहक से लूट की यह दूसरी वारदात है। 10 सितंबर को इसी बैंक के बाहर टिंबर मर्चेंट सुभाष गुप्ता के मुंशी गौरीशंकर से मोटरसाइकिल सवार दो युवकों ने डेढ़ लाख रुपये लूट लिए थे। युवकों ने ठीक उसी प्रकार वारदात को अंजाम दिया, जिस प्रकार जगमोहन के साथ लूट हुई है। गौरीशंकर और जगमोहन के साथ हुई लूट में एक और समानता यह है कि दोनों वारदात में काले रंग की पल्सर मोटरसाइकिल इस्तेमाल की गई।
जुलाई में दो वारदात
जुलाई में भी बैंक के बाहर लूट की दो वारदात हो चुकी हैं। जगाधरी बस अड्डे के सामने स्थित स्टेट बैंक इंडिया के बाहर 4 जुलाई को बैंक की कार में रखा 35 लाख रुपये की नगदी से भरा लोहे का बॉक्स चोरी हो गया था। जिस समय कार से बॉक्स चोरी हुआ, उस समय कार के पास एक गनमैन भी मौजूद था। इसके बाद 23 जुलाई को इसी बैंक के बाहर रुकाली निवासी कमलेश से मोटरसाइकिल सवार दो युवकों ने दो लाख की नगदी से भरा बैग छीन लिया था।

न पुलिस चौकन्नी, न बैंक प्रशासन ने लिया सबक
डेढ़ साल में बैंक ग्राहकों के साथ लूट की कई वारदात हो चुकी हैं। इन पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस प्रशासन ने बैंकों के भीतर और बाहर सीसीटीवी लगाने के निर्देश दिए। इसकी पालना न करने पर दो बैंक मैनेजरों के खिलाफ मामला भी दर्ज करवाया जा चुका है। पुलिस की सख्ती के कारण लगभग सभी बैंकों के भीतर और बाहर सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं। बावजूद बैंकों के बाहर लूट की वारदात पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। इन वारदात के बाद न तो पुलिस चौकन्नी हुई है और न ही बैंक प्रशासन ने इससे कोई सबक लिया है। इसका उदाहरण एचडीएफसी बैंक में एक माह में हुई लूट की यह दूसरी वारदात है। इस घटना से साफ हो गया है कि लुटेराें का कोई साथी बैंक के अंदर मौजूद रहकर नगदी निकालने वालों पर नजर रखता है और जब कोई ग्राहक बड़ी रकम निकालता है तो वह बाहर खड़े अपने साथियों को मोबाइल फोन पर सूचना दे देता है। इसके बावजूद बैंक में आने वाले संदिग्ध व्यक्तियों पर नजर नहीं रखी जा रही है। बैंक की सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी गार्ड रखे गए हैं लेकिन वे बैंक के गेट या भीतर ही तैनात रहते हैं। बैंकों के बाहर चंद कदमों पर हो रही लूट के बावजूद ग्राहकों की सुरक्षा की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यदि बैंक के सिक्योरिटी गार्ड बैंक के बाहर चंद कदमों तक मौजूद रहे तो कम से कम बैंक के आसपास वारदात पर अंकुश लग सकेगा। उधर, पुलिस ने भी बैंक के बाहर हुई पहली वारदात के बाद बैंक के आसपास पुलिस की गश्त नहीं बढ़ाई है।

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