गांधी मार्केट में हंगामा, सचिव का घेराव

Ambala Updated Fri, 28 Sep 2012 12:00 PM IST
अंबाला। छावनी की गांधी मार्केट में उस वक्त जमकर हंगामा हो गया, जब नगर निगम का दस्ता यहां अस्थायी मार्केट में काबिज दुकानदारों को हटाने के लिए पहुंचे। जैसे ही जेसीबी मशीन अस्थायी दुकानों को उजाड़ने लगी, सभी दुकानदार भड़क गए।
कई दुकानदार जमीन पर लेट गए। इन दुकानदारों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। दुकानदारों ने सचिव नगर निगम का घेराव भी किया। उन लोगाें ने कहा कि किसी भी कीमत पर अपना कारोबार और जगह नहीं छोड़ेंगे।
वीरवार शाम को अचानक नगर निगम की टीम जेसीबी मशीन और पुलिस का दस्ता लेकर गांधी मार्केट पहुंच गई। वहां दुकानदारों को उनकी आने की सूचना पहले ही मिल गई थी। इसके चलते यहां कपड़ा कारोबारियों ने अपना कपड़े जब्त होने के डर पहले ही अपना माल तो समेट लिया था। हालांकि दुकानदारों के अस्थायी शेड यहां लगे हुए थे। जेसीबी मशीन जैसे ही इन्हें गिराने लगी। सभी दुकानदारों ने हंगामा शुरू कर दिया।
पहले तो दुकानदारों ने हाथ जोड़कर अफसरों को बताया कि वे लोग यहां कई बरसों से काम कर रहे हैं और कभी यहां उनकी वजह से ट्रैफिक संबंधी समस्या नहीं पैदा हुई, तो अचानक उनका रोजगार क्यों छीना जा रहा है? लेकिन अफसर उनकी बात सुनने को ही तैयार नहीं थे। इसी बात से दुकानदार नाराज हो गए और उन्होंने दस्ते का घेराव कर लिया।
दुकानदार सड़क पर लेट गए और जमकर नारेबाजी करते हुए खुद को ही पीटने लगे। दुकानदारों का कहना था कि यदि उनका रोजगार छीनना है, तो खुद ही अपने-आप को पीट-पीटकर अपनी जान दे देंगे। इस दौरान अफसरों और कर्मियों से भी दुकानदारों की तीखी बहसबाजी हो गई और स्थिति नियत्रंण से बाहर होती गई। मौके की नजाकत को समझते हुए निगम अफसर ने वहां सोमवार तक मार्केट को साफ करने की चेतावनी दी और अमले को वापस होने के निर्देश दिए। दुकानदार लगातार नारेबाजी करते रहे। इस दौरान अन्य बाजारों के बहुत से दुकानदार भी गांधी मार्केट में पीड़ित दुकानदारों के समर्थन में उतर आए।

हाईकोर्ट की पालना नहीं, छोटे दुकानदारों पर रौब
यहां गांधी मार्केट में पीड़ित दुकानदार कैलाश कुमार, भरत, जुगल, मुन्ना, प्रेम कुमार, अशोक घई, विजय वालिया, जतिन, शौकी, केके वर्मा, बिल्लू, बिट्टू, मक्खन लाल और पप्पू के अनुसार नगर निगम हाईकोर्ट के आदेशों पर बाजारों से पक्के काबिज कब्जे तो तोड़ नहीं रही है, यहां छोटे दुकानदारों पर जोर आजमाइश जरूर कर रही है। दुकानदारों का कहना है कि उनके साथ अन्याय न किया जाए, बल्कि नगर निगम उनसे बकायदा ट्रेड फीस ले सकती है। वे लोग देने को तैयार हैं, मगर इस तरह धक्केशाही न करे।

अभियान पर सवाल
समाज सेवी विक्रम सिंह और संदीप के अनुसार नगर निगम अपने अतिक्रमण हटाओ अभियान को एक नजरिए से देखे। उनके लिए पक्के और कच्चे कब्जे सिर्फ कब्जे होने चाहिए। जब हाईकोर्ट ने सभी कब्जे हटवाने के निर्देश दिए हैं, तो सभी कब्जे हटवाएं जाएं। केवल अस्थायी दुकानदारों को हटाना उचित नहीं है। पक्के कब्जेधारियों को भी हटाया जाए। छावनी के बाजारों में अवैध कब्जे की समीक्षा की जाए, तो यहां पक्के कब्जे बहुत ज्यादा है और सालों से काबिज है। इसे हाईकोर्ट ने भी हटाने को कहा है। इसलिए निगम इन कब्जों को हटाने की तैयारी करे, वरना निगम अफसरों व कर्मियों को आगे भी ऐसा ही विरोध झेलना पड़ेगा।
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‘अफसरों व कर्मियों का घेराव करना गलत है। उन्होंने सोमवार तक की मोहलत दी है। पूरा गांधी मार्केट की अस्थायी दुकानें हट जानी चाहिए। अभी अतिक्रमण हटाने का अभियान चल रहा है, पक्के कब्जे भी जरूर हटवाएं जाएंगे। कहीं कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा।’
-केके यादव, सचिव, नगर निगम

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