‘अख दे आपरेशन’ वाला गांव बना केसरी

Ambala Updated Sun, 23 Sep 2012 12:00 PM IST
अंबाला। दिल में बस कुछ करने का जज्बा तो पैदा करो, कारवां भी अपने आप बनता जाता है और मंजिल की तरफ बढ़ने वाले रास्ते भी दिखने लगते हैं। कुछ ऐसी ही मिसाल दी है छावनी के निकटवर्ती गांव केसरी की युवा ब्रिगेड ने।
इन युवाओं के जज्बे का ही परिणाम है कि आज इस गांव की पहचान उसके मूल नाम के साथ-साथ युवाओं द्वारा की जा रही समाज सेवा भी बन गई है। ग्रामीण युवा विकास मंडल और जिला युवा विकास संगठन से जुड़े गांव के युवा 20 सालों लगातार पांच दिवसीय आंखों का आपरेशन कैंप लगाते हैं। इसमें अधेड़ और बुजुर्ग लोगों की आंखों में न केवल निशुल्क लैंस डालकर उनका जीवन रोशन किया जाता है, बल्कि पांच दिन कैंप में युवाओं और गांव के बच्चों द्वारा उनकी सेवा की जाती है। इस दौरान रात के समय मरीज के परिजनों को भी उनके पास नहीं ठहरने दिया जाता। सारा काम युवा और बच्चे ही करते हैं।
खास बात यह है कि अभी तक केसरी गांव की वैश धर्मशाला में 20 साल के दौरान 6724 मरीज अपनी आंखों की जांच करवा चुके हैं। 1327 मरीजों की आंखों का पूरी तरह सफल आपरेशन हो चुका है।
उधर, ग्रामीण रविकेश, बृजबाला, गुरबख्श, फूलवती, राजकुमार, सुदेश रानी, सुखदास, कैलाशो के अनुसारयहां गांव के लोग अपने बच्चों को बड़े चाव से इस कैंप में इस उद्देश्य से भेजते हैं, ताकि उनके बच्चे में वहां सेवाभाव के संस्कार आ सके। बच्चे यहां सुबह से रात तक आपरेशन करवाने वाले मरीजों की दिनचर्या में बहुत सहायक साबित होते हैं। इसी के चलते आज इस गांव को लोग ‘अख दे आपरेशन’ वाले गांव के नाम से भी जानने लगे हैं।

नेशनल रिकार्ड के लिए करेंगे दावा
ग्रामीण युवाओं का कहना है कि विभिन्न स्रोतों से जुटाई जानकारी के मुताबिक देश में उनका गांव एकमात्र ऐसा गांव हैं, जहां बीस सालों से न केवल लगातार आपरेशन कैंप लग रहे हैं, बल्कि लैंस डालने के बाद भी मरीजों को इलाज के बाद पांच दिन यहीं रखकर उनकी सेवा की जाती है। इसलिए अपनी दावेदारी तैयार कर ली है। इसे लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड के लिए भेजने वाले हैं।

जारी रखेंगे मुहिम
ग्रामीण युवा विकास मंडल एवं जिला युवा विकास संगठन से जुड़े युवा समाज सेवी दिनेश भारद्वाज, नरेश मित्तल, अनूप कुमार, जसबीर सिंह प्रमोद धीमान, गुरमीत सिंह, पदम शास्त्री, संजीव कुमार, सुधीर कुमार, अवतार केसरी, भूपेंद्र सिंह, गुलशेर सिंह, अशोक कुमार, विमल कुमार, गुरप्रीत सिंह, सुनील शर्मा, कुलदीप शर्मा, कुलवंत सिंह, सतीश अरोड़ा परमजीत सिंह बड़ौला, तरूण कौशल, जगमोहन मच्छौंडा, हरबंस सिंह, गुरदेव सिंह धन्यौड़ा, संदीप पसियाला, शामलाल नहौनी, सतनाम तंदवाली, मिहां सिंह, सतीश गर्ग तंदवाल के अलावा अन्य युवाओं का कहना है कि यह मुहिम निस्वार्थ सेवा भाव से शुरू की गई है। जब भी शिविर लगाता है, पूरा गांव इसमें सहयोग करता है। उसी से यूथ की हिम्मत भी बनती है। यह मुहिम आगे भी जारी रहेगी, जबकि गांव की सरपंच केसरी अरुणा अग्रवाल और राकेश अग्रवाल के अनुसार उनके गांव के युवाओं के इसी जज्बे से गांव का नाम जिले में ही नहीं, दूसरे जिलों में भी जाना जाता है। वहां से भी ग्रामीण यहां आपरेशन के लिए आते हैं।

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