कैल के पास फिर गई एक की जान

Ambala Updated Thu, 20 Sep 2012 12:00 PM IST
यमुनानगर। नेशनल हाईवे अथारिटी की लापरवाही यहां से गुजरने वालों पर भारी पड़ रही है। एनएच का करीब पांच किलोमीटर का एरिया कई वर्षों से डेथ प्वाइंट बना है। बुधवार को इसी डेथ प्वाइंट पर एक और व्यक्ति की जान चली गई।
जगाधरी की एक फैक्टरी में काम करने वाला बंताराम (60) बुधवार सुबह 6 बजे मोटरसाइकिल पर जगाधरी से अपने गांव मामली की ओर जा रहा था। कैल गांव के समीप अज्ञात वाहन ने उसकी मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने अज्ञात वाहन के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने का मामला दर्ज कर लिया है।

आखिर कब लेेंगे हादसों से सबक
अहम सवाल यह है कि आखिर कब तक दुर्घटना को हादसा मानकर पुलिस के रोजनामचे भरे जाते रहेंगे। दुर्घटनाओं से सबक लेने की आज तक जहमत नहीं उठाई जा रही है। कम से कम एनएच 73 पर होने वाले हादसों से तो ऐसा ही प्रतीत हो रहा है। यह स्थिति तब है, जबकि इस डेथ प्वाइंट के प्रति तीन वर्षों से अधिकारियों को आगाह किया जा रहा है। नेशनल हाईवे 73 पर कैल गांव के आसपास करीब पांच किलोमीटर दूरी पर सड़क और बरम में काफी अंतर है। कहीं-कहीं पर यह अंतर एक फुट तक है। एनएच की चौड़ाई कम होने के कारण वाहन चालक इस डेथ प्वाइंट से गुजरते समय अपने वाहन सड़क से नीचे उतरने में कतराते हैं।

चार वर्षों से मीटिंग में उठ रहा मुद्दा
जिले की सड़कों पर हादसों पर अंकुश लगाने के लिए पिछले चार सालों से डिस्ट्रिक रोड सेफ्टी की मीटिंग आयोजित की जा रही है। डिस्ट्रिक रोड सेफ्टी के को आर्डिनेटर सुशील आर्य ने बताया कि नेशनल हाइवे पर कैल गांव के आसपास सड़क और बरम में अंतर का मुद्दा 20 अक्तूबर 2009 से रोड सेफ्टी की मीटिंग में उठाया जा रहा है। अब तक इस बरम को ठीक नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि कैल गांव से थाना छप्पर के बीच एक साल में 20 मौतें हो चुकी हैं। अधिकतर सड़क हादसे सड़क और बरम के अंतर के कारण हुए हैं। उन्होंने बताया कि जगाधरी बस अड्डे से थाना छप्पर तक प्रतिमाह औसत तीन मौतें होती हैं।

जुलाई में भी हो चुका है हादसा
21 जुलाई को नेशनल हाइवे 73 पर गांव कैल गांव के समीप टाटा सफारी और टाटा-407 के बीच आमने-सामने टक्कर हो गई। इस हादसे में टाटा सफारी के चालक की मौत हो गई और उसमें सवार पंजाब के बटाला निवासी एक परिवार के पांच लोग घायल हो गए। वहीं टाटा-407 में सवार छह लोगों को भी गंभीर चोटें आईं। यह हादसा भी बरम और सड़क में अंतर के कारण हुआ था।

कोट
कैल से भम्भौल तक बरम और सड़क के बीच अंतर उनके नोटिस में है। यहां कई बार मिट्टी डाली जा चुकी है। एनएच पर वाहन अधिक गुजरने के कारण मिट्टी हट जाती है। इन दिनों बरसात के कारण मिट्टी बह जाती है। फिलहाल नेशनल हाईवे पर बारिश से हुए गड्ढों को भरने का काम चल रहा है। इसके बाद कैल से भम्भौल तक बरम में मिट्टी डलवा दी जाएगी।

एसडीओ साहिब सिंह, नेशनल हाइवे अथारिटी

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