पेड़ों की नीलामी में कहीं फंस न जाएं!

Ambala Updated Sun, 16 Sep 2012 12:00 PM IST
अंबाला। सेना के अधीन कैंटोनमेंट बोर्ड इन दिनों पेड़ कटाई के मामले को लेकर विवादों में घिरा हुआ है। पहले यहां करोड़ों रुपये का पेड़ घोटाला हो चुका है और अब नीलाम होने वाले पेड़ों की जड़ों को लेकर बोर्ड की पेड़ों की नीलामी प्रक्रिया संदेह के घेरे में हैं।
पिछली सदन की बैठक में इन्ही को देखते हुए पेड़ों की नीलामी प्रक्रिया एक विशेष कमेटी की निगरानी में करवाए जाने को लेकर एक प्रस्ताव सर्वसम्मति से बोर्ड सदस्यों ने रखा था। इस पर उस वक्त सेना के अफसरों और बोर्ड सदस्यों ने सहमति भी जताई गई थी। लेकिन अब इस प्रस्ताव को कैंटोनमेंट बोर्ड के अधिकारियों ने ठेंगा दिखा दिया है। अधिकारी इस विशेष कमेटी को गठित करने के पक्ष में नहीं हैं।

ये था प्रस्ताव
कैंटोनमेंट बोर्ड में ये प्रस्ताव रखा गया था जब भी पेड़ों की नीलामी हो, वो एक विशेष कमेटी की निगरानी में हो। ताकि ये स्पष्ट मालूम चल सके कि पेड़ की कीमत क्या लगाई गई, उसे किसने खरीदा, उसे कब बेचा गया और उसकी जड़ का क्या किया गया?


‘विशेष कमेटी बनाने का प्रस्ताव प्रभावशाली था। डिप्टी आर्मी कमांडर ने भी इस पर सहमति जताई थी। मगर अब बोर्ड के अफसरों का कहना है कि इस कमेटी के गठन की कोई आवश्यकता नहीं है। यदि वो काम पारदर्शी बनाया जाए, जिस काम पर अंगुलियां उठ रही है, तो उसमें गलत क्या है? सभी बोर्ड सदस्य कमेटी गठित करने के पक्ष में हैं।
-वीरेंद्र कुमार, वाइस प्रेजीडेंट, कैंटोनमेंट बोर्ड


‘पहले कैंटोनमेंट बोर्ड में करोड़ों का पेड़ कटाई घोटाला सामने आया, अब नीलाम पेड़ों की जड़ों का क्या किया जा रहा है? ये नहीं मालूम? पुराना ट्री रिकार्ड रजिस्टर कहां गया? उसका नहीं मालूम। यदि इतनी बातें उठ रही हैं, तो कैंटोनमेंट बोर्ड के अफसर पेड़ों की नीलामी प्रक्रिया पर निगरानी रखने के लिए विशेष कमेटी गठित करने के पक्ष में क्यों नहीं है। ये बात समझ से परे हैं, मगर पारदर्शिता के लिए कमेटी का गठन अनिवार्य प्रतीत हो रहा है।’
-उमेश बिट्टू, बोर्ड सदस्य


‘पेड़ों की नीलामी के नियम पहले से ही बने हुए हैं। पांच हजार कीमत तक का पेड़ बेचने की पावर सीईओ को होती है। उससे अधिक दस हजार तक का पेड़ बेचने की पावर बोर्ड प्रेसिडेंट को है। उससे ज्यादा कीमत के पेड़ बेचने के लिए अलग नियम हैं। जब ये नियम बने हुए हैं और नियमानुसार काम हो रहा है, तो फिर कमेटी की कुछ खास आवश्यकता नजर नहीं आ रही है। सबकुछ नियमानुसार चल रहा है, कहीं भी कोई गड़बड़ी नहीं है।’
- केदार भुरंडे, मुख्य अधिशासी अधिकारी, कैंटोनमेंट बोर्ड

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