डीसी के आदेशों को ठेंगा!

Ambala Updated Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
अंबाला। वाहनों द्वारा सवारियों को क्षमता से अधिक बैठाना और बार-बार हो रहे हादसे, लेकिन फिर भी प्रशासन की नींद नहीं टूटती। डीसी के निर्देश हैं, लेकिन फिर भी मजबूरी है कि लोग इसी तरह जान जोखिम में डालते रहेें और इसी खतरे पर वाहन चालक अपनी कमाई करते रहें। हाल ही में डीसी ने अधिकारियों की ड्यूटी लगाई थी कि वे इस संबंध में चेकिंग करें और रोजाना रिपोर्ट करें, लेकिन हालात अभी भी सुधर नहीं रहे हैं। 2 जनवरी 2012 को साहा हादसे के बाद प्रशासन ने इस कदर चुस्ती दिखाई कि एक के बाद एक करके वाहनों के चालान काटने तक शुरू कर दिए। यहां तक कि आटो चालकों पर भी पूरी तरह से शिकंजा कस दिया गया, जो स्कूली बच्चों को क्षमता से अधिक भरकर चलते थे। यह सख्ती कुछ समय तक तो चलती रही, लेकिन बाद में सब कुछ सामान्य हो गया। अब फिर से हालात वही हो चुके हैं और वाहनों में क्षमता से अधिक सवारियों को ढोया जा रहा है।

बसों में क्षमता से अधिक सवारियां
बसों में क्षमता से अधिक सवारियां ढोई जा रही है। इस बात को रोडवेज विभाग भी जानता है, लेकिन कोई हल नहीं है। गांवों को जाने वाली बसों की हालत खराब है। यही नहीं स्कूल कालेजों की छुट्टी के दौरान तो नजारा यह होता है कि बसें फुल होती है और जबरदस्ती छात्र इन में चढ़ते हैं। फिलहाल रोडवेज की आठ बसें स्कूलों में चल रही हैं।

‘बसों की कमी है, जिसके कारण यह स्थिति पैदा होती है। यदि सारी बसें स्कूल कालेजों के लिए लगाएंगे, तो आम जनता को परेशानी होगी। फिर भी कोशिश है कि बसें ओवरलोड न हों।’
- भंवरजीत सिंह, जीएम रोडवेज

पैसेंजर वाहनों में सवारियां अधिक
मैक्सी कैब, टैक्सी, आटो रिक्शा जैसे पैसेंजर वाहनों में क्षमता से अधिक सवारियां बैठाई जाती हैं। आज तक इस समस्या का हल प्रशासन नहीं निकाल पाया है। पुलिस की नाक नीचे, ओवरब्रिज के नीचे, वाहनों में ओवरलोडिंग होती है, लेकिन फिर भी कोई कार्रवाई नहीं। इसी तरह स्टेट हाईवे पर पड़ने वाले गांवों में जाने वाली सवारियां अन्य पैसेंजर वाहनों में क्षमता से अधिक रहती हैं। सिर्फ चालान तक ही कार्रवाई सिमटी है, हल आज तक नहीं निकला।

‘क्षमता से अधिक सवारियां वाहनों में बैठाने वालों पर कार्रवाई होती है। यह चालक फिर भी नहीं मानते। चालान करने के अलावा इंपाउंड की कार्रवाई होती है, लेकिन फिर भी नहीं सुधरते। आरटीए विभाग कार्रवाई कर सकता है, जबकि नियम इन चालकों को मानने हैं।’
-कुलदीप बख्शी, सहायक सचिव आरटीए

नहीं मानते स्कूल वाले भी
स्कूलों में भी ट्रैफिक नियमों की पालना कोई नहीं करता। स्कूल के द्वार से ही तिपहिया चालक बच्चों को ठूंस-ठूंसकर भरते हैं। यही नहीं छोटे बच्चे तक वाहन लेकर आते हैं, लेकिन अभी तक यह स्थिति नहीं सुधर पाई है। कई बार हादसे तक हो चुके हैं, लेकिन फिर भी कोई नहीं सुनता।

‘स्कूलों को कई बार लिखित में निर्देश दिए गए हैं। यह निर्देश देकर थक चुके हैं, लेकिन कोई मानता नहीं। आटो चालक हैं, वे क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाते हैं, कुछ स्कूल बसें आज भी नियमों की पालना पूरी तरह नहीं करती। ट्रैफिक पुलिस तो चालान कर रही है।’
-ललित सिंह, सब इंस्पेक्टर, ट्रैफिक-

बीस दिन में तीन हादसे
अगस्त में ही बीस दिन के भीतर ओवरलोडिंग तिपहिया वाहनों के तीन हादसे हो चुके हैं, जिसमें एक बच्चे की मौत हो चुकी है। छावनी के नन्हेड़ा के पास एक आटो पलटा, जिसमें एक छात्र की मौत हुई और आठ घायल हुए। इसी तरह हंडेसरा मोड़ पर आटो पलटा, जिसमें सवार छह लोग घायल हो गए। उधर, अंबाला-जगाधरी हाईवे पर इंडस्ट्रियल एरिया के पास आटो पलटा, जिसमें 11 लोग घायल हुए।

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