अब सक्रिय रहेंगी ‘स्कूल प्रबंधन समितियां’

Ambala Updated Mon, 27 Aug 2012 12:00 PM IST
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अंबाला। राइट टू एजूकेशन एक्ट के तहत स्कूलों में गठित की गई स्कूल प्रबंधन समितियां (एसएमसी) अब पूरी तरह से सक्रिय रहेंगी। स्कूल के कार्यक्रम, जरूरत, कमियां और पढ़ाई के स्तर को ऊंचा उठाने से संबंधित ये समितियां अब अपनी पूरी भागेदारी देगी। इसके लिए निदेशक मौलिक शिक्षा हरियाणा ने सूबे में सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों को स्कूल प्रबंधन समितियों के संबंध में कुछ जरूरी दिशा-निर्देश भेजे हैं।
निर्देश में इन्हें जल्द से जल्द लागू कर रिपोर्ट भेजने का कहा गया है। राइट टू एजूकेशन एक्ट के तहत स्कूलों में विद्यालय प्रबंधन समितियों का गठन पहले ही किया जा चुका है। इसमें स्कूल का मुखिया अध्यक्ष हैं। इन समितियों में छात्रों के अभिभावक व पंचायत के प्रतिनिधियों को भी सदस्य बनाया गया है। इन समितियों का गठन तो हो गया, लेकिन इसके काम करने के तौर-तरीकों के बारे में अभी तक कुछ भी तय नहीं था। अंबाला के खंड मौलिक शिक्षा अधिकारी सुधीर कालड़ा के अनुसार निदेशक, मौलिक शिक्षा हरियाणा ने जो निर्देश दिए हैं, उससे ये समितियां भी सक्रिय रहेंगी और सक्रिय योगदान देंगी। उनके अनुसार उन्होंने अपने खंड के सभी स्कूलों में ये निर्देश भिजवा दिए हैं।

ये हैं निर्देश
- आरटीई के तहत गठित की गई स्कूल प्रबंधन समितियोें की बैठक अब प्रत्येक माह के अंतिम शनिवार को होगी।
- समितियों की आम सभा त्रिमासिक जुलाई, अक्तूबर, जनवरी और अप्रैल में होगी। दोनों सूरतों में यदि अंतिम शनिवार को अवकाश पड़ता है, तो यह बैठक एक दिन पहले शुक्रवार को होगी।
- बैठक ये पहले स्कूल का मुखिया अपने स्कूल की समिति का एजेंडा तैयार करेगा।
- बैठक की सूचना चार दिन पहले विद्यालय के मुखिया तक पहुंच जानी चाहिए। साथ ही इन सभी बैठकों का रिकार्ड एक रजिस्टर में लिखा जाएगा और शिक्षा विभाग का उच्च अधिकारी समय-समय पर उसका निरीक्षण करेंगें।
- विद्यालयों में हो रहे निर्माण कार्यों, बच्चों की वर्दी की खरीद व अन्य अनुदान राशियों से खर्च होने वाले सभी कार्यों में समितियों के सदस्यों को साथ रखा जाएगा।
- समय-समय पर समितियों के सदस्यों से स्कूलों में मिड-डे मील व्यवस्था का निरीक्षण भी करवाया जाएगा।
- समिति के जिन सदस्यों के बच्चे विद्यालयों में नहीं पढ़ रहे हैं, तो ऐसे सदस्यों को तुरंत बदलने की व्यवस्था भी करवाई जाएगी।
- यदि किसी विद्यालय में समिति की मासिक बैठक नहीं होती या समिति के सदस्यों का अनुदान राशियों के निपटान में सहयोग न हीं लिया जाता तो शिक्षा विभाग द्वारा इसे शिक्षा के अधिकार अधिनियम की उल्लंघना मानी जाएगी और इसे अति गंभीर मामला व विद्यालय स्तर पर अनियमितता माना जाएगा।

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