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नगर निगम के 66 आवासों पर रसूखदारों का 'कब्जा', हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी इस विभाग में कैद है फाइल

राजीव रंजन, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 22 Jun 2020 02:00 PM IST

सार

  • कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए बनवाए गए मकानों में रह रहे बाहरी
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवैध कब्जेदारों व नियम विरुद्ध आवंटन पर कार्रवाई के आदेश दिए थे, लेकिन फाइल रेंट विभाग में पड़ी है
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gorakhpur news - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

नगर निगम के कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए बनवाए गए 66 आवासों पर बाहरी लोगों का कब्जा है। हाईकोर्ट ने इसे खाली कराने का आदेश भी दिया है, लेकिन पिछले पांच साल से यह फाइल नगर निगम के रेंट विभाग में कैद है। कुछ दिनों पहले निगम कर्मचारियों ने आवास की दिक्कत बताई, तो नगर आयुक्त अंजनी कुमार सिंह ने फाइलें तलब कीं, तब यह हकीकत सामने आई।

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प्रारंभिक छानबीन से पता चला कि नगर निगम के 59 सरकारी आवास मामूली किराए या लीज पर प्रभावशाली लोगों को उनके अच्छे दिनों में  आवंटित किए गए। नगर निगम से मिली जानकारी के मुताबिक 75 से 650 रुपये प्रति माह की किराएदारी पर ये सरकारी आवास मनमाने तरीके से आवंटित किए गए हैं। इनमें से सात मकानों पर अवैध कब्जे भी हैं। इस तरह कुल 66 आवासों पर निर्धारित पात्रता के बिना लोग रह रहे हैं।


केस-1
पूर्व केंद्रीय मंत्री व राज्यसभा सांसद शिव प्रताप शुक्ल को रीड साहब के धर्मशाला के सामने नगर निगम का आवास संख्या दो किराएदार के रूप में आवंटित है। यह नगर निगम के जच्चा-बच्चा केंद्र के नाम से दर्ज है। 1991 में तत्कालीन मुख्य नगर अधिकारी ने यह आवास आवंटित किया था।

केस-2
सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष व दर्जा प्राप्त मंत्री रहे जगदीश यादव और उनके पुत्र मनोज कुमार यादव के नाम से टाउन हाल उत्तरी गेट प्रथम तल पर एक-एक आवास किराएदार के रूप में आवंटित है। 1994 और 1995 में तत्कालीन मुख्य नगर अधिकारी ने दोनों को ये आवास  आवंटित किए थे। तब से ये मकान इन दोनों के पास हैं, जबकि इनका तारामंडल में अपना भव्य मकान बना हुआ है।

केस-3
जीडीए कर्मचारी मनीष कुमार तिवारी टाउन हाल उत्तर गेट के प्रथम पल बने आवास संख्या सात में रह रहे हैं। नगर निगम के दस्तावेज में उन्हें कब्जेदार बताया गया है। इनका राप्तीनगर फेज 3 में दो मंजिला आलीशान मकान है। नगर निगम के दस्तावेजों में मनीष कुमार तिवारी को अवैध कब्जेदार बताया गया है।

बाहरी व्यक्ति के आधार पर हाईकोर्ट ने किया था आवंटन निरस्त

शिव प्रताप शुक्ला का आवास।
शिव प्रताप शुक्ला का आवास। - फोटो : अमर उजाला।
इन घरों पर काबिज कई लोग ऐसे भी हैं, जिनके पास अपने आलीशान मकान हैं। निगम के आवासों पर काबिज कुछ लोगों ने इसमें भी धंधा तलाश लिया है। वे नगर निगम को 650 रुपये महीने किराया देते हैं और उन्होंने इन्हें काफी ज्यादा किराए पर किसी दूसरे को उठा रखा है। मौजूदा वक्त में इन आवासों का मासिक किराया 15-20 हजार रुपये से कम नहीं होगा।
 
नगर निगम में कार्यरत कर्मचारी बलराम उपाध्याय को टाउन हॉल मियां बाजार स्थित आवास नंबर पांच आवंटित था। स्वास्थ्य खराब होने के आधार पर 2007 में तत्कालीन नगर आयुक्त ने उस आवास का आवंटन बलराम उपाध्याय के पुत्र अशोक कुमार उपाध्याय के नाम कर दिया। इसके कुछ समय बाद तत्कालीन नगर आयुक्त राजेश कुमार त्यागी ने बाहरी व्यक्ति का हवाला देते हुए आवास के आवंटन को रद्द किया था।

इसके विरोध में 2016 में अशोक कुमार उपाध्याय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। इसमें टाउन हॉल स्थित अन्य आवासों को बाहरी लोगों के नाम आवंटित करने का हवाला दिया गया था। 2016 में ही हाईकोर्ट ने नगर आयुक्त को नगर निगम के आवासों पर अवैध ढंग से कब्जा करने वाले और नियम के विरुद्ध आवंटन की जांच कर रिपोर्ट पेश करने को कहा था।

किसने क्या कहा-

जगदीश यादव का आवास।
जगदीश यादव का आवास। - फोटो : अमर उजाला।
इसके बाद नगर निगम ने 66 लोगों को नोटिस देकर एक महीने के अंदर आवास खाली करने का आदेश दिया था। हालांकि इस आदेश पर कुछ नहीं हुआ। फाइल रेंट विभाग में लावारिस पड़ी है।

अपर नगर आयुक्त डीके सिन्हा ने बताया कि नगर निगम के कर्मचारियों के आवास अन्य किसी को आवंटित नहीं हो सकते हैं। शासन ऐसे मकानों को खाली कराने का आदेश पहले ही दे चुका है।

नगर आयुक्त अंजनी कुमार सिंह ने बताया कि नगर निगम के जितने आवासों का आवंटन बाहरी लोगों को है, सबका परीक्षण कराया जाएगा। अगर, आवंटन नियमानुसार नहीं है तो उसे निरस्त किया जाएगा।

राज्यसभा सांसद शिवप्रताप शुक्ल ने बताया कि जब कांग्रेस नेता पवन बथवाल मेयर थे, उस वक्त मुझे यह आवास किराए के तौर पर दिया गया है। इसके बाद से लगातार उसका किराया दे रहा हूं। नगर आयुक्त नियमानुसार इसका परीक्षण करा सकते हैं।   

सपा नेता मनोज कुमार यादव ने बताया कि मुझे और मेरे पिता को यह आवास नगर निगम द्वारा किराएदार के रूप में आवंटित किया गया है। समय से किराया दिया जाता है। यह मकान किसी को किराए पर नहीं दिया गया है। किसी ने गलत जानकारी दी है।

निगम के दस्तावेजों में हैं ये कब्जेदार

मनीष कुमार तिवारी का आवास।
मनीष कुमार तिवारी का आवास। - फोटो : अमर उजाला।
जीडीए कर्मचारी मनीष कुमार तिवारी ने बताया कि 1990 से मकान आवंटित है। जब नगर निगम और जीडीए एक ही विभाग थे, उसी समय यह आवास आवंटित किया गया था। राप्ती नगर फेज 3 में मेरा मकान है, लेकिन मैं इसी मकान में भी रहता हूं। कई लोग ऐसे हैं जिनका अपना मकान है, लेकिन उनके नाम सरकारी आवास भी हैं।

जमुना बक्स सिंह, मनीष कुमार तिवारी, कांती देवी, एजाज अली, उमेश प्रसाद चौरसिया, सोमारु राम और सतीश त्रिपाठी।

इन्हें किराएदार के रूप में आवंटित है मकान
ध्रुव नारायण (पूर्व सभासद), शकुन मिश्रा (पार्षद), जमुनाबक्स सिंह, श्यामसुंदर सिंह ऑडिटर, अजय सिंह (पूर्व सभासद), बेचन राम (पूर्व विधायक), जयशंकर मिश्र, रामलली पांडेय, रत्नाकर सिंह, गौरी देवी, विमला सिंह, जगदीश यादव, मनोज कुमार यादव, मनीष कुमार तिवारी, शिवप्रताप शुक्ल, महामंत्री अंबेडकर परिवार कल्याण परिषद, अध्यक्ष बहुजन समाज पार्टी।  

इन्हें लीज पर आवंटन
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व देवरिया से सांसद रमापति राम त्रिपाठी, समीर कुमार सिंह, रतनपाल सिंह, रामश्रय सिंह, अध्यक्ष हिंदू जागरण मंच, जिला संगठन मंत्री (भारतीय मजदूर संघ), आदित्य कुमार (जागरण मंच), देवेंद्र प्रताप सिंह, ओपी त्रिपाठी, शशि भूषण तिवारी, उदयराज यादव, शिवशंकर सिंह, लल्लन प्रसाद त्रिपाठी, शरद चंद्र दीक्षित, श्रुति दीक्षित, मिथिलेश राय, प्रशांत सिंह, सत्यप्रकाश यादव, बृजेंद्र सिंह, जोगेंद्र कौर, गायत्री मिश्र, विजय कुमार खेमका, किरनलता चौधरी, विपिन बिहारी श्रीवास्तव, रमावती पांडेय, कृष्ण मुरारी सिंह, अविनाश साधू, उत्कर्ष कुमार सिंह, निशिप्रभा गुप्ता, माया देवी,  प्रभा सिंह, हरेंद्र कुमार (अभाविपि), चंदा सिंह, रामप्रकट, राजनारायण पासवान, करुण सिंह, योगेंद्र चंद्र, शैलेेंद्र कुमार तिवारी।
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