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Gorakhpur: सरकारी जमीनों का होगा सत्यापन, खुल सकते हैं कई और खेल

अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 17 Aug 2022 03:20 PM IST
सार

डीएम के पास रिपोर्ट आते ही कई लोगों पर कार्रवाई तय है। फिलहाल के लिए अभी सिर्फ तहसीलदार और पेशकार को सदर तहसील से हटाया गया है। वहीं, दूसरी तरफ इस खेल में तत्कालीन राजस्व निरीक्षक घनश्याम शुक्ला और लेखपाल शैलेष चंद सिंह की भी भूमिका संदिग्ध मानकर जांच की जा रही है।

गोरखपुर डीएम कृष्णा करुणेश।
गोरखपुर डीएम कृष्णा करुणेश। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

सदर तहसील के जंगल डुमरी नंबर-दो में 26 एकड़ जमीन सरकारी घोषित किए जाने के बाद उसकी वरासत हो जाने का खेल सामने आने के बाद अब सभी सरकारी जमीनों का सत्यापन होगा। डीएम कृष्णा करुणेश ने एहतियातन जिले की सभी सरकारी जमीनों का सत्यापन कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। तहसील प्रशासन को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। डीएम खुद इसकी मॉनीटरिंग करेंगे।



सत्यापन के दौरान जमीन की मौजूदा स्थिति देखी जाएगी। सिर्फ कागज में ही सत्यापन नहीं होगा बल्कि, मौके पर जाकर जमीन का स्वरूप देखा जाएगा। माना जा रहा है कि सत्यापन में सरकारी जमीन के मामले में राजस्व अभिलेखों से लेकर मौके पर कब्जा समेत कई खेल और उजागर हो सकते हैं। कुछ जगहों पर पट्टे की जमीनों की रजिस्ट्री हो गई और उसका नामांतरण भी हो गया है। समय-समय पर ऐसे कई मामले सामने भी आए।


कुछ में कार्रवाई भी हुई तो कुछ मामले दबा दिए गए। इन सभी जमीनों के अभिलेख फिर से खंगाले जाएंगे। डीएम कृष्णा करुणेश ने बताया कि सरकारी जमीनों का सत्यापन कराया जाएगा। देखा जाएगा कि कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई है।

 

फिर तेज होगी जंगल डुमरी मामले की जांच
आजादी के 75 साल पूरे होने पर इस बार स्वतंत्रता दिवस का जश्न भव्य तरीके से मनाया जा रहा है। 13 अगस्त से 17 अगस्त तक कई कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इसके चलते जंगल डुमरी नंबर दो की 26 एकड़ जमीन का मामला तीन-चार दिन के लिए प्रभावित हो गया था। अब यह जांच फिर रफ्तार पकड़ेगी। सप्ताह भर के भीतर इस मामले की जांच पूरी हो जाने की उम्मीद है। प्रारंभिक जांच में कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं।

माना जा रहा है कि डीएम के पास रिपोर्ट आते ही कई लोगों पर कार्रवाई तय है। फिलहाल के लिए अभी सिर्फ तहसीलदार और पेशकार को सदर तहसील से हटाया गया है। वहीं, दूसरी तरफ इस खेल में तत्कालीन राजस्व निरीक्षक घनश्याम शुक्ला और लेखपाल शैलेष चंद सिंह की भी भूमिका संदिग्ध मानकर जांच की जा रही है।

यह है जंगल डुमरी की जमीन का मामला
कोलकाता निवासी अतुलकृष्ण बनर्जी, केदारनाथ मुखर्जी, शैलेंद्रनाथ मुखर्जी, लक्खी देवी के नाम भटहट ब्लाक के जंगल डुमरी नंबर दो में करीब 26 एकड़ से अधिक जमीन दर्ज थी। इनमें से किसी के भी गोरखपुर या कोलकाता में बताए पते पर मौजूद नहीं पाए जाने के बाद जमीन को 2019 में लावारिस घोषित करते हुए गाम सभा के नाम दर्ज कर दिया गया था। बाद में इसे नगर निगम को आवंटित किया गया।

कुछ महीने बाद ही इस आवंटन को निरस्त कर जमीन वेटरिनरी कॉलेज के नाम दर्ज कर दिया गया। मई 2022 में अचानक इस जमीन की वरासत कर दी गई। पूरी जमीन दो मूल खातादारों के पुत्रों के नाम कर दी गई। जुलाई में दोबारा से वरासत को खारिज कर जमीन के कुछ हिस्से को डीएम ने उद्यान विभाग को आवंटित कर दिया।
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