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Dobaaraa Review: ‘दोबारा’ नहीं जमी अनुराग कश्यप और तापसी पन्नू की जोड़ी, त्रिकोणमिति से ज्यादा उलझी फिल्म

Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 19 Aug 2022 01:20 PM IST
सार

अनुराग कश्यप को अगले साल हिंदी सिनेमा में निर्देशक बने 20 साल हो जाएंगे। एलिस ओ कॉनर उर्फ एयन रैंड के उपन्यासों के दीवाने रहे अनुराग हिंदी सिनेमा में असली कहानियों का दम भरने वाले लेखक और निर्देशक रहे हैं। बतौर निर्देशक ‘दोबारा’ उनकी 22वीं फिल्म है।

दोबारा फिल्म
दोबारा फिल्म - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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Movie Review
दोबारा
कलाकार
तापसी पन्नू , पवैल गुलाटी , राहुल भट , शाश्वत चटर्जी , हिमांशी चौधरी , नासर और शौर्य दुग्गल
लेखक
निहित भावे (ओरिऑल पाउलो की फिल्म ‘मिराज’ पर आधारित)
निर्देशक
अनुराग कश्यप
निर्माता
शोभा कपूर , एकता कपूर , सुनीर खेत्रपाल और गौरव बोस
रिलीज डेट
19 अगस्त 2022
रेटिंग
2/5

विस्तार

बात कोई 10 दिन पहले की है। अनुराग कश्यप की फिल्म ‘दोबारा’ की समय से पहले की स्क्रीनिंग का न्यौता मिला। मेजबानी फिल्म क्रिटिक्स गिल्ड की थी और वादा था कि फिल्म पूरी होने के बाद इसके निर्देशक भी फिल्म देखने वालों से मिलने आएंगे। फिल्म क्रिटिक्स गिल्ड को निर्माता निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा की पत्नी और समीक्षक अनुपमा चोपड़ा चलाती हैं। निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ के रिव्यू को लेकर बना किस्सा सबको पता ही है। अनुराग की फिल्म की मेजबानी करके दस दिन पहले ही उन्होंने नई लकीर खींच दी था। बीते दो तीन दिनों से अनुराग और विवेक सोशल मीडिया पर भिड़े हुए हैं। फिल्म ‘दोबारा’ भी इसी के चलते चर्चा में है। उधर, स्पेन की जिस फिल्म ‘मिराज’ पर ये फिल्म बनी है, उसे नेटफ्लिक्स पर देखने वालों की संख्या हर रोज बढ़ती जा रही है।

दोबारा फिल्म
दोबारा फिल्म - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अबूझ रफ्तार उर्फ एस्केप वेलोसिटी सी कहानी
अनुराग कश्यप को अगले साल हिंदी सिनेमा में निर्देशक बने 20 साल हो जाएंगे। एलिस ओ कॉनर उर्फ एयन रैंड के उपन्यासों के दीवाने रहे अनुराग हिंदी सिनेमा में असली कहानियों का दम भरने वाले लेखक और निर्देशक रहे हैं। बतौर निर्देशक ‘दोबारा’ उनकी 22वीं फिल्म है। उनका अपना एक खास प्रशंसक वर्ग रहा है, दर्शकों मे भी और मीडिया में भी। अपनी हर फिल्म से पहले अनुराग अपनी फिल्म का एक आभामंडल रचते हैं। दर्शकों को ये समझाने की कोशिश करते हैं कि जो वह बना रहे हैं, अगर वह उनकी समझ में नहीं आ रहा है तो वही उनकी फिल्ममेकिंग की जीत है। देसी दर्शक ये जानकर उनके सिनेमा पर फिदा भी होते रहे कि हां, कुछ तो ऐसा बनाया अनुराग ने जो हिंदी सिनेमा की आम फिल्मों सा नहीं है। लेकिन, फिजिक्स में एस्केप वेलोसिटी जिन्होंने पढ़ी है, उन्हें पता है कि धरती का चक्कर काटने वाला ग्रह अगर एक निर्धारित गति से ज्यादा गति पकड़ ले तो वह अंतरिक्ष में खो जाता है।

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दोबारा फिल्म - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
समझ सको तो समझो दिलबर जानी
स्पैनिश फिल्म ‘मिराज’ से प्रेरित अनुराग कश्यप की नई फिल्म ‘दोबारा’ की गति भी एस्केप वेलोसिटी जैसी ही है। ये शुरू से लेकर आखिर तक रेडियो और टेलीविजन पर प्रसारित हो रही खबरों के जरिये ये बताती रहती है कि जो तूफान परदे पर दिख रहा है, वैसा मौसम जब भी बनता है कुछ ऐसी चीजें घटती रही हैं जिनका कारण विज्ञान भी नहीं समझ पाया है। इन धारणाओं के साथ फिल्म की कहानी शुरू होती है। कहानी दो अलग अलग कालखंडों की है जिसे जोड़ता है एक पुरानी टेलीविजन। दो कालखंडों में बंटी कहानी के पहले हिस्से में एक हत्या होती है और उसके चश्मदीद बालक की सड़क हादसे में मौत हो जाती है। कहानी के दूसरे हिस्से में जो आज के समय में घट रही है उसमें एक अस्पताल में नर्स का काम करने वाली महिला के घर में रखे पुराने टेलीविजन पर उसे वही किशोर दिखता है और वह उसे बाहर जाने से रोक लेती है। यानी कि इस कहानी के हिसाब से अब बालक नहीं मरता है। तो अब शुरू होती है त्रिकोणमिति सी गणित कि अगर बालक नहीं मरा तो फिर उस कहानी का क्या क्या बदल जाएगा? और, क्या होगा अगर अपनी कहानी में नर्स बनी ये महिला, उस बालक की कहानी में किसी और पहचान के साथ नजर आएगी?

दोबारा फिल्म
दोबारा फिल्म - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
विदेशी फिल्म की कहानी, अनुराग की जुबानी
अनुराग कश्यप को अपने दर्शकों की मेधा का इम्तिहान लेने में मजा आता है। फिल्म ‘दोबारा’ भी किसी मृगतृष्णा जैसा छलावा ही रचती है, मिराज समझते हैं ना। कहानी समझ में ना आई हो तो पिछला पैराग्राफ दोबारा पढ़कर देख सकते हैं लेकिन फिल्म पहली बार समझ में ना आई हो तो क्या उसे दोबारा देखने की कोशिश करेंगे? यही इस फिल्म को देखने के बाद का ‘कौन बनेगा करोड़पति’ जैसा साढ़े सात करोड़ का सवाल है। फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग पर अपने वादे के मुताबिक अनुराग नहीं आए तो ताज्जुब इस बात का हुआ कि किसी ने भी उनके न आने को फिल्म खत्म होने के बाद मुद्दा नहीं बनाया। ना ही किसी ने उनके वहां ना होने पर कोई बात ही की। सब फिल्म में ही खोए रहे और ये समझते रहे कि जो उन्हें समझ आया क्या वैसा ही कुछ बगल वाली कुर्सी पर बैठे समीक्षक को भी समझ आया होगा।

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दोबारा फिल्म - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
दर्शकों का इम्तिहान लेने की ठानी
और, फिर अगले दिन, और उसके अगले दिन और उसके अगले दिन सवाल ये कि फिल्म को कितने स्टार दे रहे हैं? ये कहने पर भी कि फिल्म जल्दी देखने का मतलब फिल्म की समीक्षा पर उसे लिखे जाने से पहले चर्चा करना ठीक नहीं, फिल्म से जुड़े लोगों का उत्साह घटा नहीं। कुछ लोगों ने इस ‘प्रेशर’ में फिल्म को पांच स्टार भी दे दिए हों तो बड़ी बात नहीं। मेरे हिसाब से फिल्म ‘दोबारा’ अनुराग की पिछली कुछ फिल्मों की तरह ही दर्शक की मेधा का इम्तिहान लेने वाली फिल्म है। खालिस मनोरंजन के लिए फिल्म देखने वालों को फिल्म समझ में ना आए तो इसमें अनुराग कश्यप का दोष नहीं है क्योंकि उन्होंने ये फिल्म दर्शकों के मनोरंजन के लिए बनाई भी नहीं है। उन्होंने स्पैनिश फिल्म देखी, उन्हें अच्छी लगी। मन किया कि इसे हिंदी में भी बनाते हैं, एकता कपूर, सुनील खेत्रपाल और गौरव बोस जैसे निर्माताओं ने हां कर दी और फिल्म बन गई। उनके लिए फिल्ममेकिंग इतना ही चक्र है।

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दोबारा फिल्म - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
तापसी पन्नू की यहां आकर खोई रवानी
अनुराग कश्यप निर्देशक कमाल के रहे हैं। कहानियां भी ऐसी पकड़ते हैं जो दर्शकों ने पहले ना सुनी हों लेकिन देखी हों। लेकिन फिल्म ‘दोबारा’ के ट्रेलर रिलीज पर ही इसके ‘मिराज’ की रीमेक होने की बात होशियार लोगों ने पकड़ ली। अनुराग ने सफाई दी कि उनकी फिल्म ‘मिराज’ की रीमेक नहीं है। फिल्म ‘दोबारा’ शुरू होती है तो अनुराग बताते हैं कि इसका ‘मिराज’ से रिश्ता क्या है? हिंदी सिनेमा से लापता हुई ईमानदारी ही इसको दिनोंदिन दीमक की तरह कमजोर कर रही है। और, कोरोना संक्रमण काल में लोगों ने इतना कुछ देख डाला है कि उनकी मेधा शक्ति का इम्तिहान लेने की कोशिश भी अब फिल्में बनाने वालों को भारी पड़ने वाली हैं। उधार की कहानी का हिंदी में हू ब हू रूपांतरण अनुराग की बतौर निर्देशक बनी हैसियत को कमजोर करता है और उससे भी ज्यादा ये फिल्म तापसी पन्नू की ब्रांड वैल्यू को कमजोर करती है क्योंकि पूरी फिल्म में वह ऐसा कुछ करती नहीं है कि लगे कि क्या कमाल एक्टिंग की है!

दोबारा फिल्म
दोबारा फिल्म - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
देखें कि ना देखें
फिल्म ‘दोबारा’ में तमाम जाने पहचाने और कुछ नए चेहरे दिखते हैं। पवैल गुलाटी अनुराग कश्यप की ही खोज रहे हैं, वह काम भी अच्छा करते हैं। राहुल भट का किरदार दोनों कहानियों में बीवी को धोखा देता रहता है और फिल्म खत्म होने से ठीक पहले उसके किरदार के चरित्र का फैसला भी हीरोइन सुना देती है। दोनों कहानियों के फंदे बुनने वाला किरदार जिस बालक का है उसे शौर्य दुग्गल ने बेहतर तरीके से निभाया है। फिल्म में सिल्वेस्टर फोनसेका की सिनेमैटोग्राफी ही फिल्म को देखने का आकर्षण बनाए रखती है, हालांकि फिल्म का संपादन और बेहतर हो सकता था और गीत संगीत के मामले में भी फिल्म कमजोर है। अनुराग कश्यप के तगड़े प्रशंसकों के लिए ही ये फिल्म बनी है, बाकी आम मेधा शक्ति वाले इस फिल्म को पहली बार में शायद ही समझ पाएं और फिल्म दोबारा देखने की हिम्मत ना हो तो ‘दोबारा’ से दूर ही रहें।
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