अब लोग मुझे बेवकूफ नहीं कहेंगेः नीतू चंद्रा

सुप्रिया सोगले/संवाद्दाता, बीबीसी Updated Mon, 04 Apr 2016 05:20 PM IST
Neetu chandra talking about her carrier
- फोटो : BBC
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राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाली मैथिली फिल्म 'मैथिली मखान' की निर्माता नीतू चंद्रा का कहना है कि अब लोग उन्हें 'बेवकूफ' नहीं कहेंगे। अभिनेत्री नीतू चंद्रा ने साल 2005 में आई 'गरम मसाला' से बॉलीवुड में कदम रखा था। लेकिन अब उन्होंने क्षेत्रीय सिनेमा का रुख किया है।
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अपने बडे भाई नितिन चंद्रा के साथ उन्होंने दो क्षेत्रीय फिल्मों 'देसवा' और 'मैथिली मखान' का निर्माण किया है, जिसमें 'मैथिली मखान' को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। बिहार में पली बडी नीतू चंद्रा का कहना है, 'क्षेत्रीय फिल्मों की तरफ जाने के मेरे फैसले को लोग 'बेवकूफी भरा फैसला कह रहे थे, लेकिन अब राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के बाद लोग मुझे बेवकूफ नहीं कहेंगे।'


वो कहती हैं, 'यह सिर्फ बिहार के लिए नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व की बात है, क्योंकि हमने ऐसी भाषा में फिल्म बनाई है, जो मर रही है।'

'मर रही भाषाओं को बचाने की कोशिश है'

नीतू चन्द्रा कहती हैं, 'बिहार में पांच भाषाएं है - भोजपुरी, मैथिली, मगही, अंगिका और बज्जिका, जिसमे से अंगिका और बज्जिका खत्म हो चुकी हैं।'' मैथिली भाषा को बचाने के प्रयास पर नीतू आगे कहती हैं, 'राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने से हिम्मत बढती है और ऐसे प्रयासों को बल मिलता है।''

साल 2007 में आई फिल्म 'ट्रैफिक सिग्नल' में दिखने के बाद से नीतू अचानक परदे से गायब हो गईं। नीतू कहती हैं, 'लोग मुझे सलाह देते हैं कि परदे पर आने के लिए ही सही फिल्म कर लो, लेकिन चार गानों वाली फिल्म में दो रोमांटिक और दो डांस नंबर करने में मेरी दिलचस्पी नहीं है। मैं तो अच्छी फिल्मों का हिस्सा बनना चाहती हूं।'

नीतू कहती हैं कि इंडस्ट्री में अभिनेत्री के सुन्दर होने से मतलब है जबकि अभिनय सबसे आखिर में आता है। नीतू इन दिनों स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म 'लडाकू 'की तैयारी में जुटी हुई हैं। इस फिल्म में तायकवांडो करती नजर आएंगी। इस फिल्म निर्देशन उनके भाई नितिन चंद्रा ही कर रहे हैं।
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