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JugJugg Jeeyo Review: शादियों को सफल बनाने की दिलचस्प कहानी, नीतू और अनिल कपूर की दमदार अदाकारी

Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 24 Jun 2022 09:13 AM IST
जुग जुग जियो रिव्यू
जुग जुग जियो रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
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Movie Review
जुग जुग जियो
कलाकार
वरुण धवन , कियारा आडवाणी , नीतू कपूर , अनिल कपूर , प्राजक्ता कोली और मनीष पॉल आदि
लेखक
अनुराग सिंह , ऋषभ शर्मा , सुमित भटेजा और नीरज उधवानी
निर्देशक
राज मेहता
निर्माता
धर्मा प्रोडक्शंस और वॉयकॉम 18 स्टूडियोज
24 जून 2022
रेटिंग
3/5

दो जान पहचान वाले युवा शादी करते हैं और नौबत पांच साल में ही तलाक की आ जाती है। दूसरा दंपती सीनियर है। ऊपर ऊपर सब ठीक चल रहा है। बेटी की शादी होने वाली है। लेकिन, पिता को अब भी प्यार की तलाश है। पत्नी उसका ख्याल तो रखती है लेकिन उसके साथ वह रोमांटिक नहीं हो पाता है। फिल्म ‘जुग जुग जियो’ एक तरह से धर्मा प्रोडक्शंस की ही 21 साल पहले रिलीज हुई फिल्म ‘कभी खुशी कभी गम’ का न्यू मिलेनियल्स के लिए बना मॉडर्न संस्करण है। ये उस दौर की कहानी है जिसमें बाप को पटरी पर लाने के लिए बेटे को मैदान में उतरना होता है। मैदान में परिवार की तीनों शादियां हैं। दो हो चुकी हैं, तीसरी होने वाली है। इस तीसरी शादी की तैयारियों के बीच ही घर की दो शादियों के तार बिखर रहे हैं। फिल्म ‘जुग जुग जियो’ तीनों शादियों को उलट पलट कर, बदल बदल कर अलग अलग नजरिये से परखती है। त्याग, बलिदान, अपेक्षाओं, आकांक्षाओं और उम्मीदों व भरोसों की नावों पर सवार ये कहानी जिंदगी की असली हकीकतों की मंझधार में हिचकोले खाते आगे बढ़ती है।

जुग जुग जियो
जुग जुग जियो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
पापा के तलाक में अटकी बेटे की प्रेम कहानी
फिल्म ‘जुग जुग जियो’ की कहानी शुरू होती है कनाडा से। कामयाबी की रफ्तार पर सवार नैना को अपनी ही कंपनी में बड़ा प्रमोशन मिला है और इसके लिए उसे अपने पति से दूर टोरंटो से न्यूयॉर्क जाना है। नैना और कुकू एक दूसरे को बचपन से जानते हैं। दोनों ने लव मैरिज की लेकिन शादी के पांच साल बाद ही दोनों का स्वाभिमान और अभिमान रिश्तों में दरार डाल चुका है। कुकू की बहन गिन्नी की भारत में शादी तय हो चुकी है और दोनों अपना तलाक इस शादी के पूरे होने तक मुल्तवी रखने की बात तय करते भारत आते हैं। कुकू के पापा भीम का कुकू की टीचर रही मीरा से अफेयर चल रहा है और शराब के नशे में भीम ये बात बेटे को बता भी देता है। अपने तलाक की बात करने का मौका ढूंढ रहा बेटा अपने पिता की तलाक की तैयारियों की बात जानकर सन्न रह जाता है। मां परिवार में पसर चुकी इन दोनों विपदाओं से अनजान है। बेटी भी सिर्फ परिवार की आन के लिए एक अनजान से शादी के लिए तैयार हो चुकी है जबकि प्यार वह एक ऐसे युवा से करती है जो संगीत की दुनिया में अपना वजूद तलाशने का संघर्ष कर रहा है।

जुग जुग जियो रिव्यू
जुग जुग जियो रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
राज मेहता की हिंदी सिनेमा को गुड न्यूज
निर्देशक राज मेहता ने धर्मा प्रोडक्शंस और यशराज फिल्म्स में दूसरे निर्देशकों के सहायकों के रूप में लंबा वक्त गुजारा और फिर तीन साल पहले अपनी पहली फिल्म बनाई ‘गुड न्यूज’। एक गंभीर विषय को हास्य के रस में पिरोकर कहानी कहने का उनका यही अंदाज फिल्म ‘जुग जुग जियो’ की शुरुआत में भी आगे बढ़ता दिखता है। इंटरवल तक यही लगता है कि राज मेहता विषय को ठीक से पकड़ नहीं पा रहे हैं। फिल्म के अलग अलग ट्रैक में उनका निर्देशन भटकता भी नजर आता है लेकिन इंटरवल के बाद फिल्म की गाड़ी पटरी पर आती है और दर्शकों को अपने साथ बांधना शुरू करती है। और, इसमें राज को मदद मिलती है अनिल कपूर और नीतू कपूर की दमदार अदाकारी से। राज मेहता ने फिल्म को इसके बाद खूबसूरती से समेटा है और हर कलाकार के लिए उनकी अदाकारी साबित करने वाले अलग अलग दृश्य गढ़कर फिल्म को हैपी एडिंग तक पहुंचाया है।

जुग जुग जियो रिव्यू
जुग जुग जियो रिव्यू - फोटो : insta
अनिल और नीतू के अनुभव का आसमान
कलाकारों में फिल्म ‘जुग जुग जियो’ अनिल कपूर और नीतू कपूर के अनुभव से खाद पाती है। जब भी फिल्म जरा सी भी कमजोर होती दिखती है, अनिल कपूर अपने अतरंगी किरदार से इसमें रंग भरते हैं। अपने अफेयर की पोल खुलने पर उनका बीमार पड़ने का ढोंग कहानी को संभालता है तो नीतू कपूर जब मीरा बनी टिस्का चोपड़ा के सामने अपने पति को ‘दान’ में देने वाले दृश्य में उनकी आदतों और परेशानियों की बात करती हैं तो फिल्म खिलने लगती है। फिल्म को इसके सहायक कलाकारों खासतौर से मनीष पॉल और प्राजक्ता कोली से भी काफी मदद मिलती है। गिन्नी का अपने माता पिता और भैया भाभी को आदर्श दंपती के खांचे में फिट न बैठ पाने के लिए लताड़ना फिल्म का हाईलाइट प्वाइंट है। और, मनीष पॉल ने अरसे से हिंदी सिनेमा में चली आ रही एक युवा हास्य कलाकार की कमी को पूरा करने की पूरी कोशिश की है। उनके वन लाइनर फिल्म की उम्दा कॉमिक रिलीफ हैं।

जुग जुग जियो रिव्यू
जुग जुग जियो रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
वरुण की संजीवनी, कियारा का करिश्मा
फिल्म ‘जुग जुग जियो’ की अंतर्धारा कुकू और नैना की प्रेम कहानी है। दोनों की शादी फिल्म की शुरुआत में ही हो जाती है। इसके बाद दोनों का पहले इस शादी से बाहर निकलने का और फिर इस शादी को बचाने का संघर्ष है। 35 के हो चुके वरुण धवन के लिए ये फिल्म सबसे कठिन चुनौती रही। उनकी पिछली फ्लॉप फिल्म ‘कलंक’ पर इसमें तंज भी है। पांच साल पहले आई फिल्म ‘जुड़वा 2’ के बाद से वरुण का करियर डगमगाता रहा है। ‘अक्टूबर’ और ‘सुई धागा’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय की तारीफें हुईं पर फिल्मों की कमाई नहीं हुई। फिर ‘कलंक’, ‘स्ट्रीट डांसर 3डी’ और ‘कुली नंबर वन’ में तो यूं लगा कि वह रेस से ही बाहर हो जाएंगे लेकिन फिल्म ‘जुग जुग जियो’ में अपनी मेहतन से वह फिर पटरी पर लौटते दिख रहे हैं। वरुण ऊर्जावान अभिनेता है और राज मेहता ने उनको फिल्म में बिल्कुल सही किरदार में पेश किया है। वरुण धवन ने मौके का बिल्कुल सही इस्तेमाल किया और अपना असर छोड़ने में सफल भी रहे। कियारा आडवाणी फिल्म दर फिल्म निखरती जा रही हैं। उनका अभिनय कई बार वाकई हेमा मालिनी की याद दिलाता है। वरुण धवन के साथ झगड़े वाले सीन में उनका उबल पड़ना और फिर अपनी गलती का एहसास करना उनकी अभिनय क्षमता को दर्शाता है।

जुग जुग जियो
जुग जुग जियो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
संगीत सबसे कमजोर कड़ी
निर्माता करण जौहर ने फिल्म ‘जुग जुग जियो’ के लिए बिल्कुल सही कलाकारों का चुनाव किया है। फिल्म पर उनकी मेकिंग का असर भी दिखता है। भव्यता इसके सेट्स में साफ झलकती है। वेशभूषा पर खूब खर्च किया गया है और बड़े परदे के लिए जरूरी हर दृश्यावली सजाने के लिए उन्होंने पैसे की कमी नहीं दिखने दी है। फिल्म ‘जुग जुग जियो’ की दिक्कतें इसके संगीत और इसके तकनीकी टीम में हैं। फिल्म के कम से कम तीन गाने रीमिक्स हैं। ‘नच पंजाबन’ पाकिस्तानी गायक अबरार उल हक के गाने का, ‘रंगीसारी’ शोभा गुर्टू की मशहूर ठुमरी का और ‘दुपट्टा’ भी बीती सदी के हिट पंजाबी गाने का रीमिक्स है। धर्मा प्रोडक्शंस जैसी कंपनियों से हिंदी सिनेमा के संगीत का स्तर ऊपर ले जाने और मूल संगीत के लिए संजीवनी तलाशने की उम्मीद रहती है। लेकिन, फिल्म ‘जुग जुग जियो’ संगीत के स्तर पर बहुत निराश करती है। जय पटेल की सिनमैटोग्राफी औसत दर्जे की है और मनीष मोरे का संपादन भी खास प्रभावित नहीं करता। फिल्म की अवधि भी इंटरवल से पहले कम से कम 15 मिनट कम हो सकती है।

जुग जुग जियो
जुग जुग जियो - फोटो : insta
देखें कि न देखें
अपने पति के अफेयर की बात सुनकर गीता सैनी जब अपनी बहू नैना के साथ झील के किनारे वाइन पीने बैठती है तो पूरी फिल्म का सार यहां नीतू कपूर को मिले संवादों में सिमट आता है। अनजाने पुरुष के साथ ब्याह दी गई बेटियां दूसरे घर में प्यार की उम्मीद लेकर आती हैं। दोनों ठीक से पति पत्नी बन भी पाएं, उससे पहले ही दोनों माता पिता बन जाते हैं। फिर जब बच्चे बड़े होते हैं और दूर चले जाते हैं तो दोनों को फिर से पति पत्नी बनने का मौका मिलता है, लेकिन तब तक दोनों एक दूसरे की आदत बन चुके होते हैं। अब इंसान अच्छा हो या बुरा, लेकिन आदतें कहां छूट पाती हैं! यही फिल्म ‘जुग जुग जियो’ का सार है। फिल्म इसीलिए पारिवारिक मनोरंजन की कसौटी पर पास हो जाती है क्योंकि यहां मामला दो पीढ़ियों के जेनरेशन गैप के अलावा दो पीढ़ियों की बदलती सोच में सामंजस्य बिठाने का भी है। वीकएंड पर फैमिली आउटिंग के लिए फिल्म ठीक है।
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