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Film Review: अक्षय ने असली 'पैडमैन' बनकर जमाया रंग, लोगों को किया जागरूक

रवि बुले Updated Fri, 09 Feb 2018 01:49 PM IST
film Review Of akshay kumar starring Padman
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-निर्माताः ट्विंकल खन्ना
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-निर्देशकः आर. बाल्कि

-सितारेः अक्षय कुमार, राधिका आप्टे, सोनम कपूर

रेटिंग ***

नारीवादी विमर्श के बीच बीते कुछ दशक से ‘असली मर्द’ की तलाश जारी है। बॉक्सऑफिस पर इस रेस में अक्षय कुमार सबसे आगे हैं। पिछले साल टॉयलेटः एक प्रेमकथा में उन्होंने बताया कि पत्नी के लिए घर में टॉयलेट का इंतजाम करने वाला असली मर्द है। पैडमैन में उनका डायलॉग है, ‘औरत की शर्म से बड़ी कोई बीमारी नहीं है। शर्म को सम्मान में बदलने के लिए जो करना होगा करूंगा।’ शर्म यहां ‘मासिक धर्म’ है और सम्मान सैनेटरी पैड। फिल्म इस विषय को छुपाने/नकारने/अपवित्र बताने वाली सोच पर प्रहार करती है।

आप भले ही पिछड़े न हों लेकिन पैडमैन बिना भेद-भाव के पूरे समाज को धिक्कारते हुए इन दिनों में महिलाओं के लिए सैनेटरी पैड के महत्व/इस्तेमाल/सस्ती दरों पर मुहैया कराने की मुहिम छेड़ती है। नायक-नायिका यहां नेताओं-सरकारी अधिकारियों की तरह आंकड़ों में बात करते हैं। कुछ दृश्यों में लगता है कि दूरदर्शन के लिए सैनेटरी पैड के विज्ञापन बनें तो वह कुछ इसी अंदाज में होंगे। पैडमैन पहले हिस्से में कहानी से ज्यादा डॉक्युमेंट्री का आभास देती है।

ज्ञान-दान इसका उद्देश्य है। फिल्म में दिखाया समय रानी मुखर्जी के जमाने का है, जहां देविका रानी के दौर की सोच रखने वालों पर नायक झल्लाया रहता है। पहला हिस्सा उन्हें अच्छा लग सकता है जिन्हें बायोलॉजी के बेसिक नहीं पता लेकिन अगर आपने दुनिया देखी-समझी है तो जरूर लगेगा कि निर्माता-निर्देशक कौन से जमाने में रह रहे हैं!
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सिनेमाई स्वतंत्रता के साथ बनाया गया है

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