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राष्ट्रपति शासन: वो सब कुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है

एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Updated Fri, 15 Nov 2019 03:22 PM IST
राष्ट्रपति शासन
राष्ट्रपति शासन - फोटो : राष्ट्रपति शासन
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महाराष्ट्र में सियासी ड्रामा जारी है। 24 अक्तूबर को राज्य के नतीजे आने के बावजूद कोई भी पार्टी सरकार का गठन नहीं कर पाई है। ऐसे में राज्यपाल ने हस्तक्षेप करते हुए सबसे बड़ा दल होने की वजह से भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया लेकिन वह नियत समय के अंदर सरकार बनाने में असफल रही।
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जिसके बाद राज्यपाल ने शिवसेना को बुलाया लेकिन वह भी विधायकों का समर्थन पत्र नहीं सौंप पाई। अब गेंद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के पाले में है।   एनसीपी और कांग्रेस ने विधानसभा से पहले राज्य में मिलकर विधानसभा का चुनाव लड़ा था। इसलिए यदि सरकार बनती है तो दोनों दल मिलकर बनाएंगे। हालांकि अभी कांग्रेस का रुख स्पषट नहीं है, जिसकी वजह से मामला अधर में लटका हुआ है। समीकरणों को देखते हुए कैबिनेट ने राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की थी, जिसपर रामनाथ कोविंद ने मुहर लगा दी है। अब महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू हो चुका है। 

राष्ट्रपति शासन के क्या मायने हैं? अगर स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने पर ही राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है तो हरियाणा में राष्ट्रपति शासन क्यों नहीं लगा? राष्ट्रपति शासन कब लगाया जाता है? अगर आपके मन में भी यही सब सवाल उठ रहे हैं, तो आइए हम आपको बताते हैं राष्ट्रपति शासन के बारे में।

राष्ट्रपति शासन का मतलब है किसी राज्य का नियंत्रण भारत के राष्ट्रपति के पास चले जाना। लेकिन प्रशासनिक दृष्टि से केंद्र सरकार इसके लिए राज्य के राज्यपाल को कार्यकारी अधिकार प्रदान करती है। संविधान के अनुच्छेद 352, 356 और 365 में राष्ट्रपति शासन से जुड़े प्रावधान दिए गए हैं।

अनुच्छेद 356 के अनुसार राष्ट्रपति किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा सकते हैं यदि वे इस बात से संतुष्ट हों कि राज्य सरकार संविधान के मुताबिक काम नहीं कर रही है। अनुच्छेद 365 अनुसार राज्य सरकार केंद्र सरकार द्वारा दिए गए संवैधानिक निर्देशों का पालन नहीं करती तो उस हालात में भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। अनुच्छेद 352 के तहत आर्थिक आपातकाल की स्थिति में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है।
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किन परिस्थितियों में लगाया जाता है राष्ट्रपति शासन 

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