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राष्ट्रीय शिक्षा नीति: प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस स्वीकृत पदों के 10 फीसदी से ज्यादा नहीं होंगे, यूजीसी ने दिए आदेश

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 02 Oct 2022 05:34 AM IST
सार

यूजीसी के सचिव रजनीश जैन ने बताया कि इस तरह की नियुक्तियों को संस्थान के लिए स्वीकृत शैक्षणिक पदों से अलग रखा जाएगा। इसके अलावा यह साफ किया कि पीओपी की नियुक्ति से नियमित नियुक्तियां प्रभावित नहीं होनी चाहिए। 

यूजीसी
यूजीसी - फोटो : पीटीआई
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विस्तार

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), 2020 के तहत उच्च शिक्षा संस्थानों (एचईआई) में कुल स्वीकृत शैक्षणिक पदों की तुलना में 10 फीसदी तक प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस (पीओपी) नियुक्ति किए जा सकेंगे। छात्रों के पेशेवर कौशल को निखारने व उन्हें संबंधित उद्योग या पेशे के मुताबिक ढलने में मदद करने वाले विशेषज्ञों की पीओपी के तौर पर नियुक्ति बिना पीएचडी, नेट या औपचारिक शिक्षा के होगी। 



यूजीसी के सचिव रजनीश जैन ने पत्र लिखकर पीओपी की नियुक्ति को लेकर संस्थानों को दिशा-निर्देशों की जानकारी दी है। जैन ने बताया कि इस तरह की नियुक्तियों को संस्थान के लिए स्वीकृत शैक्षणिक पदों से अलग रखा जाएगा। इसके अलावा यह साफ किया कि पीओपी की नियुक्ति से नियमित नियुक्तियां प्रभावित नहीं होनी चाहिए। 


इन क्षेत्रों के पेशेवरों को मिलेगा मौका 
इंजिनीयरिंग, विज्ञान, मीडिया, साहित्य, उद्यम, समाज विज्ञान, ललित कला, सिविल सेवक और सैन्य बलों के पेशेवर प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के तौर पर नियुक्त किए जा सकेंगे।

शिक्षण से जुड़े पेशेवरों के लिए नहीं
पत्र में जैन साफ किया कि पीओपी के तौर पर उन लोगों को नियुक्त नहीं किया सकता, जो पहले से ही शिक्षण के पेशे में हैं, या इस पेशे से सेवानिवृत्त हुए हैं।

अधिकतम कार्यकाल तीन वर्ष
नियुक्ति एक वर्ष से लेकर अधिकतम तीन वर्ष तक के लिए की जा सकती है। किसी उल्लेखनीय मामले में एक वर्ष का सेवा विस्तार दिया जा सकता है। इस तरह किसी भी सूरत में किसी पेशेवर को चार वर्ष से अधिक समय के लिए नियुक्त नहीं किया जा सकता है।

15 वर्ष का अनुभव है जरूरी  
अपने क्षेत्रों में वरिष्ठ पदों पर मौजूद कम से कम 15 वर्ष का अनुभव रखने वाले पेशेवरों को प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के तौर पर नियुक्त किया जा सकेगा।

तीन तरह से नियुक्ति 
पहली श्रेणी में किसी उद्योग की तरफ से वित्त पोषित व्यक्ति को नियुक्त किया जा सकता है, दूसरी श्रेणी में उच्च शिक्षण संस्थान अपने खर्च पर नियुक्ति कर सकते हैं व तीसरी श्रेणी में मानद नियुक्ति की व्यवस्था है।

चयन समिति करेगी नियुक्ति
यूजीसी के निर्देशों के मुताबिक उप-कुलपति, प्रिंसिपल या निदेशक पीओपी के लिए प्रख्यात विशेषज्ञों से नामांकन आमंत्रित कर सकते हैं। विशेषज्ञ संस्थान और छात्रों के लिए अपने अनुभव से क्या दे सकते हैं इसकी रूपरेखा के साथ अपना विस्तृत बायोडाटा भेजेंगे, जिसे एक चयन समिति के सामने रखा जाएगा, जिसमें संस्थान के दो वरिष्ठ प्रोफेसर और एक प्रतिष्ठित बाहरी सदस्य शामिल होगा। समिति की सिफारिश के अधार पर संस्थान की अकादमिक व कार्यकारी परिषद नियुक्ति पर फैसला करेगी।

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