ढाई सौ गरीब भूमिहीन परिवारों के लिए बने मसीहा, खुद किराये के मकान में करते हैं बसेरा

मुगुदा सूर्यनारायण आचार्य Updated Tue, 06 Mar 2018 02:19 PM IST
Muguda Suryanarayana Acharya
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प्रति व्यक्ति करीब पौने चार सौ वर्ग फुट भूभाग के दस्तावेजों को जिस दिन मैंने दस लोगों के नाम किया, उस दिन मानो मैं अपनी सबसे बड़ी जिम्मेदारी से निवृत्त हो गया। यह पूर्णाहुति थी, उस यज्ञ सरीखी प्रक्रिया की, जो मैंने 2.3 एकड़ जमीन दान करने के लिए शुरू की थी। मैंने अपनी जमीन के छोटे-छोटे टुकड़े श्रमिकों, विधवाओं और दूसरे गरीब जरूरतमंदों को दान की है।
मैं ओडिशा के कोरापुट जिले के जैपोर कस्बे में रहता हूं। मैं लोहे के दरवाजे और खिड़कियां बनाने वाला एक साठ वर्षीय कारीगर हूं। पंद्रह लोगों के अपने परिवार के साथ भले ही मैं किराये के घर में रहता हूं, लेकिन मैंने अपनी सारी जमीन भूमिहीन ग्रामीणों को दान कर दी है। इस काम की शुरुआत 1997 में हुई थी। उस वक्त मैं एक ऐसे परिवार का मुखिया था, जिसे गरीब इलाके में आर्थिक रूप से संपन्न कहा जा सकता था। मैंने अपने घर के पास एक शिव मंदिर बनवाया था।

एक दिन यों ही उसी मंदिर के पुजारी ने मुझसे कहा, मंदिर बनवाने की बात तो ठीक है, मगर यदि तुम सचमुच ईश्वर को खुश करना चाहते हो और उनका आशीर्वाद चाहते हो, तो अपने आसपास के गरीबों की मदद करो। मदद किस प्रकार की जा सकती है, पुजारी ने इसके लिए भी सलाह दी। उसने कहा कि कस्बे में अधिकतर गरीब भूमिहीन हैं। रहने के लिए उनके पास कोई निजी ठिकाना नहीं है।
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