New Education Policy 2020: पढ़ाई का नया कायदा: शिक्षा नीति में बदलाव, जानें सबकुछ यहां

एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 30 Jul 2020 11:12 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई

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सार

  • यूजीसी, एआईसीटीई, एसीटीई की जगह एक नियामक बनाया जाएगा
  • केंद्रीय विश्वविद्यालय, डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी, राज्य और निजी यूनिवर्सिटी के एक नियम
  • वैज्ञानिक व सामाजिक अनुसंधानों को नेशनल रिसर्च फाउंडेशन बनाकर बढ़ावा दिया जाएगा

विस्तार

देश में शैक्षणिक माहौल, शिक्षा की गुणवत्ता, रोजगार परक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने साढे़ तीन दशक बाद शिक्षा नीति के नए मसौदे को मंजूरी दे दी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष के कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति ने पिछले वर्ष ही मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को शिक्षा नीति का मसौदा सौंपा था। इस मसौदे पर दो लाख से ज्यादा सुझाव आए थे। इन सुझावों की समीक्षा के बाद बनी नई नीति को केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दे दी।
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केंद्रीय कैबिनेट से गुरुवार को मंजूर राष्ट्रीय शिक्षा नीति में पूरे शैक्षणिक ढांचे में व्यापक बदलाव किया गया है। अब कॉलेज में स्नातक पाठ्यक्रम में दाखिला लेने के बाद तीन साल तक पढ़ाई के बाद ही डिग्री मिलने की अनिवार्यता खत्म हो गई। छात्र तीन या चार साल से पहले कभी भी कॉलेज छोड़ सकते हैं।
बीच में पढ़ाई छोड़ने पर ड्रापआउट का धब्बा नहीं लगेगा। इसके तहत तीन वर्षीय डिग्री प्रोग्राम एक साल पूरा करने पर प्रमाण पत्र, दो साल पढ़ाई पर डिप्लोमा और तीन साल पूरे करने पर डिग्री मिलेगी। जबकि चार वर्षीय डिग्री प्रोग्राम बहुविषयक स्नातक कार्यक्रम होगा।
 

देश में खुलेंगे दुनिया के टॉप सौ संस्थानों के कैंपस

भारत के शिक्षण संस्थानों को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ शिक्षण संस्थानों में शामिल करने के लिए इंटरनेशनल रैकिंग के टॉप सौ संस्थानों के कैंपस भारत में खोलने की अनुमति दी जाएगी। विदेशी शिक्षकों व छात्रों को भारत से जोड़ा जाएगा।

नालंदा, तक्षशिला की तर्ज पर भारतीय प्राचीन विश्वविद्यालयों को आगे बढ़ाया जाएगा। बहुविषयक शिक्षण वाली विवि और कॉलेज खोले जाएं। साहित्य, भाषा, खेल, योग, आयुर्वेद, प्राचीन, मध्यकालीन इतिहास और संगीत पर फोकस होगा।
 

बंद होंगे पुराने और अनुपयोगी कोर्स

विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों का काम अकादमिक और रिसर्च पर फोकस पर रहेगा। परीक्षा से लेकर दाखिले तक का काम नेशनल टेस्टिंग एजेंसी करेगी। अब एक विषय की जगह बहुविषयक डिग्री प्रोग्राम शुरू होंगे। जिन कोर्स में छात्रों की संख्या कम है या पुराने हो चुके हैं, उनकी जगह पर नए कोर्स शुरू होंगे।
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 नालंदा-तक्षशिला की तरह होगी पढ़ाई

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