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मदर्स डे पर अपनी माता की लम्बी आयु के लिए कराएं सामूहिक महामृत्युंजय मंत्रों का पाठ
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मदर्स डे पर अपनी माता की लम्बी आयु के लिए कराएं सामूहिक महामृत्युंजय मंत्रों का पाठ

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Digital Edition

संकट में सहायता : अमेरिका, यूएई, जर्मनी और रूस से मिली मदद, फ्रांस से 18 ऑक्सीजन प्लांट इसी माह

कोरोना काल में विदेशों से भारत को मिलने वाली सहायता का सिलसिला जारी है। राजधानी के सफदरजंग अस्पताल में अमेरिका से सहायता स्वरूप ऑक्सीजन सिलिंडर आ चुके हैं और यूएई से बाईपैप मशीन भी यहां आ गई है। जर्मनी के वेंटिलेटर भी मिले हैं। उधर, दिल्ली के ही लेडी हार्डिंग कॉलेज में जो ऑक्सीजन कंसंट्रेटर पहुंचे हैं वे रूस से आए हैं।  

राजधानी को इस माह मिलेंगे फ्रांस से 18 ऑक्सीजन प्लांट
राजधानी को 21 में से तीन प्रेशर स्विंग एडसोर्पशन (पीएसए) ऑक्सीजन प्लांट फ्रांस से मिल चुके हैं। शेष 18 प्लांट इस माह मिलने की उम्मीद है। ये जानकारी एक अधिकारी की ओर से शनिवार को दी गई। अधिकारी ने बताया कि जो तीन प्लांट मिले हैं उन्हें सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र अस्पताल, अंबेडकर अस्पताल और संजय गांधी अस्पताल में स्थापित किया गया है।

प्रधान परिवहन सचिव और विशेष कार्य अधिकारी-हेल्थ आशीष कुंद्रा ने एक ऑनलाइन ब्रीफिंग में बताया कि इस पूरे मामले में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और केंद्रीय विदेश मंत्रालय निगरानी कर रहे हैं। शेष 18 ऑक्सजीन प्लांट इस माह के अंत तक दिल्ली पहुंच जाएंगे। 

कुंद्रा ने बताया कि राजधानी में ऑक्सीजन की कुल खपत का 29 फीसदी रेलवे और 71 फीसदी आपूर्ति सड़क परिवहन के जरिये हो रही है। राजधानी में रोजाना 507.5 मीट्रिक टन ऑक्सीजन आ रही है।

केंद्र सरकार के अस्पताल 9.39 फीसदी, दिल्ली सरकार के अस्पताल 20.20 फीसदी और निजी अस्पताल 50.20 फीसदी ऑक्सीजन के कुल आवंटन का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि शेष 15.67 फीसदी ऑक्सीजन को आपात स्थिति के लिए सुरक्षित रखा जाता है और 3.03 फीसदी जिलों को दिया जाता है।
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अमेरिका से मिली मदद... अमेरिका से मिली मदद...

दिल्ली हाईकोर्ट : बीमा से जुड़े कर्मचारियों को अस्पताल और कार्यालय आने-जाने की छूट

उच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि कोविड-19 महामारी के दौरान चिकित्सा बीमा और स्वास्थ्य बीमा सेवाएं आवश्यक सेवाएं हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे में इनमें कार्यरत कर्मचारियों को अस्पतालों और उनके अपने कार्यालयों के बीच लॉकडाउन में भी आने-जाने की अनुमति रहेगी।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने मैक्स बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी की याचिका का निपटारा करते हुए से आदेश दिया है। याचिकाकर्ता ने दिल्ली सरकार द्वारा उनके कर्मचारियों के ई-पास के अनुरोध को अस्वीकार करने के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि 19 अप्रैल, 2021 के दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) के आदेश के अनुसार, बीमा कंपनियों को श्रेणी 4 (एल) के तहत वर्गीकृत किया जाता है। 

इस प्रकार इसके कर्मचारियों को लॉकडाउन के दौरान स्वतंत्र रूप से आने-जाने के लिए ई-पास की आवश्यकता होती है। हालांकि, जब कर्मचारियों ने ई-पास के लिए आवेदन किया तो उनके सभी आवेदन बिना किसी कारण के खारिज कर दिए गए।

दिल्ली सरकार ने कहा कि कर्मचारियों द्वारा पेश दस्तावेजों में विभिन्न विसंगतियों के कारण यह खारिज किया गया है। अदालत ने कहा डीडीएमए ने वैध पहचान पत्र/फोटो प्रवेश पास के आधार पर कुछ श्रेणियों के लोगों को प्रतिबंधों से छूट दी है। इनमें चिकित्सा कर्मी और अन्य अस्पताल सेवाएं जैसे जांच प्रयोगशालाएं, क्लीनिक, फार्मेसियों, दवा कंपनियां, चिकित्सा ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ता, अन्य आकस्मिक सेवाएं आदि शामिल हैं।

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता के कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों या मेडिक्लेम आदि से संबंधित दावों की प्रोसेसिंग और क्लीयरिंग से निपट रहे है। इसलिए उनकी सेवाएं उ न सेवाओं के लिए प्रासंगिक होंगी जिन्हें प्रतिबंधों से छूट दी गई है। कोविड-19 महामारी की स्थिति के दौरान चिकित्सा बीमा और स्वास्थ्य बीमा सेवाएं आवश्यक सेवाएं हैं।
 
अदालत ने कहा कि इस प्रकार याचिकाकर्ता कंपनी के कर्मचारियों को अस्पतालों और उनके अपने कार्यालयों के बीच स्वतंत्र रूप से आने-जाने की अनुमति दी जानी चाहिए, ताकि चिकित्सा बीमा दावों के प्रसंस्करण में तेजी लाई जा सके। इतना ही नहीं अदालत ने राय दी है कि महामारी के दौरान ई-पास को एक जटिल प्रक्रिया में शामिल करने से स्वास्थ्य बीमा सेवाओं में काफी देरी होगी। 
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मदर्स डे पर विशेष : हौसला रखो मम्मा, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

हौसला रखो मम्मा, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती है। मन में विश्वास रखो, हम होंगे कामयाब और कोरोना को देंगे मात। आप चिंता मत करो, दोनों छोटे भाइयों को मैं घर पर रह कर संभाल लूंगी। आप अपनी पूरी जांच करा कर जांच सेंटर से आओ। बेटी के इसी विश्वास से 15 दिनों से कोरोना संक्रमण की चपेट में रही वंदना चावला को जीत की प्रेरणा मिलती रही। आज वह परिवार के साथ स्वस्थ हैं।

कोरोना की जंग में बेटियों का हिम्मत बढ़ाना और परिवार की जिम्मेदारी संभालना भी बड़ा संबल बना हुआ है। मुखर्जी नगर की वंदना चावला जब तेज बुखार, सर्दी-खांसी की चपेट में आईं तो उनकी चौथी क्लास में पढ़ने वाली नौ साल की बेटी वंशिका ने हौसला बुलंद रखा। यहां तक कि अपनी मां को छोटे भाइयों की जिम्मेदारी से मुक्त कर लाई जय और यीशु को नहलाना और खिलाने की जिम्मेदारी भी संभाल ली। 

वंदना चावला कहती हैं कि मदर्स डे पर यह मेरे लिए बेटी की तरफ से सबसे बेहतर उपहार रहा जो कभी ना भूलने वाला है। हालांकि, इस बीच उन्हें कभी ना भूलने वाला दर्द भी कोविड-19 ने दिया। चावला कहती हैं कि संक्रमण के दौरान ही सबसे अजीज श्वेता भाभी ने अपने पति को खो दिया। ये ऐसा गम है जो कभी नहीं भूला जा सकता।

बेहद समझदारी से रखा ध्यान
कोरोना फाइटर बनकर उभरी वंदना ने बताया कि शुरू के दस दिन तो बुखार रहा, इस दौरान कोरोनिल, गर्म पानी की भाप, विटामिन सी समेत कई दवाएं लेती रहीं। जब ठीक नहीं हुआ तो दोबारा जांच में कोरोना पॉजिटिव आया। तब पड़ोस में रहने वाले डॉ. सुमन अचानक से फरिश्ता बनकर आए और उन्होंने इलाज शुरू किया। अब पति और तीनों बच्चों के साथ स्वस्थ हूं। गर्म पानी पीना, खाने में ध्यान देना और परिवार के सदस्यों के साथ घर में ही रहती हूं।

शिक्षिका कहती हैं कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती: वंशिका चावला
वंशिका का कहना है कि कोरोना तो पिछले साल भी आया था। तब तो कुछ भी नहीं हुआ। इसी का अहसास मुझे था और विश्वास भी था कि मम्मा का कोरोना संक्रमण कुछ भी नहीं बिगाड़ पाएगा। मेरी मम्मा सबसे प्यारी है और मेरे पापा व छोटे भाई। अप्राजिता मैम बार-बार कहती है कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
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 दिल्ली : 860 करोड़ की हेरोइन के साथ अफगानी दंपती गिरफ्तार, पंजाब जानी थी नशे की खेप

पश्चिम जिला पुलिस ने नशे की तस्करी करने वाले एक बड़े गैंग का पर्दाफाश कर 125.840 किलो से अधिक हेरोइन बरामद की है। बरामद हेरोइन की कीमत 860 करोड़ रुपये आंकी गई है। पुलिस ने इस संबंध में एक अफगानी दंपती को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान मोहम्मद शफी (48) और तरीना (36) के रूप में हुई है। दोनों कार से हेरोइन को पश्चिम दिल्ली के ख्याला इलाके में लेकर जा रहे थे। यहां से हेरोइन को पंजाब भेजा जाना था। कोर्ट में पेशी के बाद दोनों को पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। 

पश्चिम जिला पुलिस उपायुक्त उर्विजा गोयल ने बताया कि शुक्रवार को जिले की एएटीएस टीम को सूचना मिली थी कि नशे के सौदागर वजीराबाद से ख्याला नाला रोड, गैस एजेंसी के पास आने वाले हैं। सूचना के बाद फौरन इंस्पेक्टर प्रमोद तोमर, एसआई ईश्वर सिंह, शैलेंद्र व अन्य की टीम को जांच के लिए लगा दिया गया।

शाम करीब 4.35 बजे पुलिस टीम ने देखा कि एक शेवरले-बीट कार गैस एजेंसी के पास आकर रुकी। उसमें एक बुर्के वाली महिला व एक शख्स खड़े होकर किसी का इंतजाम करने लगे। कुछ देर बाद पुलिस टीम ने जानकारी पुख्ता करने के बाद दोनों को दबोच लिया। कार की तलाशी ली गई तो उसमें प्लास्टिक के सात बैग में सफेद रंग का पाउडर मिला। जांच करने पर पता चला कि यह हेरोइन है।

फौरन दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों ने बताया कि वह अफगानिस्तान के रहने वाले हैं। दोनों अपने परिवार के साथ पिछले 12 सालों से वजीराबाद के हनुमान चौक पर रहते हैं। गिरफ्तारी के समय दोनों ही अपना पासपोर्ट व अन्य दस्तावेज नहीं दिखा पाए। दोनों खुद को अफगानी शरणार्थी बता रहे थे। आरोपी मोहम्मद शफी का हेरोइन तस्करी का काम है। 

अफगानिस्तान से हेरोइन बनाने का कच्चा माल आता है। दिल्ली में उससे हेरोइन तैयार कर उसे पंजाब में दूसरे लोगों को भेज दिया जाता है। शफी ने तैयार हेरोइन को ख्याला में गैंग के दूसरे सदस्यों को देना था। जिसके बाद इसे आगे पंजाब जाना था। शफी ने बताया कि हेरोइन तस्करी के समय किसी को शक न हो इसलिए वह अपनी बच्चों को गाड़ी लेकर चलता था। शुक्रवार को उसके छह बच्चे घर पर थे। वह पत्नी के साथ हेरोइन तस्करी के लिए निकला था। अब पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर मामले की जांच कर रही है। इनके गैंग के बाकी सदस्यों की तलाश की जा रही है।
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महंगाई की मार : खाद्य तेलों के दाम सातवें आसमान पर, रसोई के बजट पर वार

गिरफ्त में आरोपी...
कोरोना काल में महंगाई एक बार फिर सातवें आसमान पर है। इसमें भी रोजमर्रा की जरूरतों में शामिल खाद्य तेल के भाव तो चढ़ते जा रहे है। ना केवल सरसों तेल बल्कि सोयाबीन, पाम ऑयल, राइस ऑयल, तिल का तेल, सन फ्लॉवर समेत सभी वेजिटेबल तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है। ऐसे में देशी सरसों तेल भी पीछे नहीं है। खुदरा भाव की बात करें तो 150-170 रुपये प्रति लिटर से कम कोई भी खाद्य तेल नहीं है।

घर की रसोई हो या रेस्टोरेंट, ढाबा। खाना पकाने के लिए सबसे जरूरी खाद्य तेल की कीमत में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। पेट्रोल की कीमत में जिस तरह आग लगी हुई है उससे सब्जियों व दाल में तड़का लगाना भी महंगा साबित हो रहा है। इसके पीछे मुख्य वजह है अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी है और चीन का भंडारण। जून-जुलाई से फसल बेहतर होने पर ही भाव मंदा होगा।

चीन कर रहा है खाद्य तेल को स्टोर 
अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेल की कीमत में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। चीन लगातार वेजिटेबल ऑयल को अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीद कर स्टोर कर रहा है। दिल्ली में जहां रोज 15 सौ टन की खपत है तो भारत में पूरे साल में दो सौ लाख टन की खपत होती है। इसमें डेढ़ सौ लाख टन आयात किया जाता है। यानी भारत में खपत होने वाला खाद्य तेल 75 प्रतिशत विदेशों से आता है। 

पिछले छह महीने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। मलयेशिया, इंडोनेशिया से पाम व पामोलिव रिफाइंड आता है। अर्जेंटीना व अमेरिका से सोयाबीन का तेल आता है। वहां फसल खराब होने की वजह से भाव बढ़े हुए हैं। बाहर से आने वाले सब खाद्य तेलों के भाव तेज हैं तो सरसों तेल में भी तेजी आना स्वाभाविक है। भारत के किसानों को सरसों की उपज का उचित दाम मिल पा रहा है। जून-जुलाई में तेल के भाव कम होने की उम्मीद है।
- हेमंत कुमार गुप्ता, महामंत्री दिल्ली वेजिटेबल ऑयल ट्रेडर्स एसोसिएशन 

रसोई से आई आवाज...

एक तरफ जहां कोरोना जानलेवा बना हुआ है तो वहीं महंगाई भी दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है। स्वास्थ्य के लिए तेल जरूर कम इस्तेमाल करना चाहिए लेकिन इसके बिना सब्जियां स्वादहीन हो जाएंगी। इस दौरान रुचिकर खाना भी आवश्यक है।
- प्रीति सिंह, गृहणी 

रसोई का बजट इन दिनों बिगड़ा हुआ है। खाद्य तेल की कीमत तो ऐसे बढ़ रही है जैसे पट्रोल की कीमत। हर दिन दुकान पर एक नया भाव सुनने को मिलता है। जहां सरसों तेल की दिनोंदिन महंगाई बढ़ रही है तो इसके साथ ही वेजिटेबल ऑयल की कीमत पिछले छह महीने से कम नहीं हो रही है। 
- मधुलिका गुप्ता

कोरोना काल में एक तरफ लोगों का रोजगार खत्म हो रहा है तो दूसरी तरफ महंगाई दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। कम से कम रोजमर्रा की चीजों के भाव में वृद्धि नहीं होनी चाहिए। एक गृहणी के लिए रसोई का बजट संभालना मुश्किल हो रहा है। रसोई गैस की कीमत के साथ खाद्य पदार्थों में बेतहाशा वृद्िध हो रही है। दुकान पर जब जाओ तो भाव दो-पांच रुपये बढ़े ही मिलते हैं।
- पूजा सिंह, गृहणी 
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लगातार 5वें दिन आई कोरोना केस में कमी : दिल्ली में शनिवार को सामने आए 17 हजार से अधिक नए मामले, 332 की मौत

दिल्ली में संक्रमण से हालात कुछ बेहतर होते नजर आ रहे हैं। शनिवार को कोरोना के 17,364 मामले आए और 332 लोगों को मौत हो गई। 22 दिन बाद दिल्ली में 18 हजार से कम मामले आए हैं। पिछले 5 दिनों से दैनिक संक्रमितों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है।
    
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, दिल्ली में अब कुल संक्रमितों की संख्या 13,10,231 हो गई है। इनमें से 12,03, 253 लोग स्वस्थ हो चुके हैं। जबकि, कुल 19,071 लोगों की मौत हो चुकी है। संक्रमण के मामलों में भले ही गिरावट आ रही है, लेकिन दैनिक मौत के मामले अभी कम नहीं हो रहे हैं। इससे दिल्ली में कोरोना से मृत्युदर बढ़कर 1.46 फीसदी हो गई है। 
   


 

विभाग के अनुसार, फिलहाल सक्रिय मरीज 87,907 हो गए हैं। इनमें से अस्पतालों में 19,838 मरीज भर्ती हैं।  कोविड केयर केंद्रों में 840 भर्ती हैं। होम आइसोलेशन में भर्ती रोगियों की संख्या 49,865 हो गई है। कोरोना की जांच के लिए शनिवार को 74,384 टेस्ट हुए, जिसमें 23.34 फीसदी मरीज कोरोना संक्रमित पाए गए। इनमें से आरटीपीसीआर से 62,921 और रैपिड एंटीजन से 11,463 टेस्ट हुए। दिल्ली में अभी तक 1 करोड़ 77 लाख 51 हजार लोगों की जांच हो चुकी है। बढ़ते मामलों के साथ रेड जोन की संख्या बढ़कर 51,338 हो गई है।

79,800 लोगों का टीकाकरण हुआ
कोरोना टीकाकरण अभियान में बीते 24 घंटे में कुल 79,800 लोगों को टीका लगाया गया।इनमें 67,753 लोगों को पहली और 12,047 को दूसरी खुराक दी गई।दिल्ली में अबतक कुल 37 लाख 46 हजार लोगों का टीकाकरण किया जा चुका है।

वहीं शनिवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शनिवार को चिराग दिल्ली के सर्वोदय गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल के टीकाकरण केंद्र का निरीक्षण किया। वहां 18-44 आयु वर्ग के लोगों को टीका लगाया जा रहा है। सीएम केजरीवाल ने लाभार्थियों से बातचीत भी की।

केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली के 100 स्कूलों में टीके लगाए जा रहे हैं और प्रतिदिन 1 लाख लोगों को टीका लगाया जा रहा है। हम इसे 300 स्कूलों तक विस्तारित करने और प्रति दिन 3 लाख तक टीकाकरण करने की योजना बना रहे हैं। 

 
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अब भी कम नहीं है प्रवासियों का दर्द, धैर्य देने लगा है जवाब

तीन सप्ताह बाद भी बेड की किल्लत: दिल्ली में भर्ती होने के लिए भटक रहे हैं कोरोना के गंभीर मरीज, आरएमएल में सबसे ज्यादा भीड़

दिल्ली में तीन सप्ताह पहले संक्रमण से हालात खराब होना शुरू हुए थे। तब से अभी तक भी अस्पतालों में बेड कि किल्लत बनी हुई है। लोग आईसीयू बेड के लिए भटक रहे हैं। शुक्रवार शाम 7 बजे तक  सिर्फ 43 आईसीयू बेड खाली थे। इन अस्पतालों में जब बेड की जानकारी ली गई तो पता चला कि इन पर भी मरीजों को भर्ती करने की प्रक्रिया चल रही है।

दिल्ली कोरोना एप के मुताबिक इस समय राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, एम्स और परमानंद अस्पताल में ही आईसीयू बेड खाली हैं। कोरोना एप पर राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में 325 आईसीयू बेड में से 10 बेड खाली दिख रहे थे। खाली बेड की स्थिति जानने के लिए एप पर उपलब्ध नंबरों पर फोन किया तो दो फोन नंबर पर उपलब्ध नहीं थे।

जब तीसरे नंबर फोन डायल कर खाली बेड होने के बारे में पूछा तो फोन ऑपरेटर ने कहा कि बेड खाली नहीं है। जब प्रशासन से पूछा गया कि एप पर 10 बेड खाली होने की जानकारी दी जा रही हो तो उन्होंने  कहा कि इन खाली बेड पर मरीजों को भर्ती करने के लिए खिड़की पर प्रक्रिया जारी है। इसी प्रकार एम्स और परमानंद अस्पताल के भी नंबरों पर फोन किया गया। वहां से भी यही जवाब मिला कि खाली बेड को भरने की प्रक्रिया जारी है।

बड़े अस्पतालों से मरीजों को रेफर किया जा रहा
दिल्ली के बड़े अस्पतालों की बात करें तो किसी में कोरोना मरीजों के लिए आईसीयू बेड खाली नहीं है। आरएमएल अस्पताल के बाहर मरीजों की काफी भीड़ रहती है। यहां रोगियों को ऑक्सीजन बेड तो मिल रहा है, लेकिन अस्पताल में एक भी आईसीयू बेड खाली नहीं है। ऐसे में गंभीर मरीजों को यहां से वापस जाना पड़ रहा है। इसी प्रकार लोकनायक, जीटीबी सफदरजंग, अपोलो, मैक्स, फोर्टिस जैसे बड़े अस्पतालों में भी कोई आईसीयू बेड खाली नहीं हैं। यहां आने वाले गंभीर मरीजों को अन्य अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है।

दिल्ली में बेड की स्थिति
कुल बेड-22192
मरीज भर्ती- 19955
खाली-2237

आईसीयू बेड-5612
मरीज भर्ती- 5569
खाली- 43

बेड की संख्या बढ़ानी होगी
दिल्ली के जिन अस्पतालों ने ऑक्सीजन कि कमी के चलते बेड कि संख्या घटाई थी। उन सभी अस्पतालों को दिल्ली सरकार ने बेड संख्या को वापस पहले जितनी करने को कहा है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि अब दिल्ली को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलने लगी है। इसलिए जितने भी अस्पताल हैं वह अपने यहां बेड की संख्या को बढ़ाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि ऑक्सीजन की कमी से किसी मरीज की मौत न हो। 
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