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पहल: दिल्ली के खर्च पर यूपी-हरियाणा का दूषित पानी होगा शोधित, दुर्गंध की समस्या से भी मिलेगी निजात

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नोएडा ब्यूरो Updated Thu, 16 Sep 2021 12:01 AM IST

सार

यमुना में हरियाणा के दो प्रमुख नालों से 105 एमजीडी दूषित पानी गिरता है। इसमें बादशाहपुर नाले और ड्रेन नंबर छह से आता है। इसी प्रकार उत्तर प्रदेश से 50 एमजीडी दूषित पानी दिल्ली के गाजीपुर नाले में गिरता है जो बाद में यमुना नदी में मिल जाता है।
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सत्येंद्र जैन
सत्येंद्र जैन - फोटो : एएनआई
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विस्तार

दिल्ली सरकार ने पड़ोसी राज्यों से यमुना में आने वाले प्रदूषित पानी की अपने खर्च पर साफ करने का निर्णय लिया है। हरियाणा और उत्तर प्रदेश से आने वाले दूषित पानी को एसटीपी और इन-सीटू तकनीक के जरिये शोधित किया जाएगा। इसके बाद पानी को झीलों और जल निकायों के कायाकल्प, भूजल पुनर्भरण के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं बचा हुआ पानी यमुना में छोड़ा जाएगा।
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जल मंत्री सत्येंद्र जैन ने यमुना में पड़ोसी राज्यों से होने वाले प्रदूषण को लेकर दिल्ली जल बोर्ड और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बुधवार को बैठक की। जैन के मुताबिक हरियाणा से 105 एमजीडी और उत्तर प्रदेश से 50 एमजीडी दूषित पानी आता है।


यमुना में हरियाणा के दो प्रमुख नालों से 105 एमजीडी दूषित पानी गिरता है। इसमें बादशाहपुर नाले और ड्रेन नंबर छह से आता है। इसी प्रकार उत्तर प्रदेश से 50 एमजीडी दूषित पानी दिल्ली के गाजीपुर नाले में गिरता है जो बाद में यमुना नदी में मिल जाता है।

सत्येंद्र जैन ने कहा कि ड्रेन नंबर छह लगभग 15 एमजीडी पानी ले रहा है। इसके प्रवाह को बैराज के माध्यम से टैप किया गया है और नरेला एसटीपी की ओर मोड़ दिया गया है, जो वर्तमान में 10 एमजीडी की अपनी क्षमता के मुकाबले लगभग 12 एमजीडी दूषित पानी को साफ करता है। इसके अलावा नरेला क्षेत्र की विभिन्न झीलों, जलाशयों, टैंकों और पुनर्भरण के लिए साफ किए गए पानी को ले जाने के लिए पाइपलाइन भी बिछाई जा रही है।

उन्होंने कहा कि कल्याणपुरी स्थित गाजीपुर ड्रेन से दूषित पानी निकालने और कोंडली एसटीपी तक पहुंचाने के लिए बैराज का काम पूरा कर लिया गया है। पांच से सात एमजीडी के प्रवाह को पहले ही मोड़ दिया गया है, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाकर 50 एमजीडी क्षमता तक पहुंचा दिया जाएगा।

दुर्गंध की समस्या से भी निजात मिलेगी
जैन ने कहा कि इस पहल से गंदे पानी से होने वाली दुर्गंध की समस्या से भी निजात मिलेगी और आसपास के क्षेत्रों के भूजल प्रदूषण की समस्या भी कम होगी। उन्होंने कहा कि पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाकर चार मिलीग्राम प्रति लीटर से ऊपर रखी जाएगी। नजफगढ़ ड्रेन 57 किलोमीटर लंबी है, जबकि बादशाहपुर ड्रेन के दूषित पानी की सफाई चार से पांच किलोमीटर में करने का लक्ष्य है।

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