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दुष्कर्म मामले में सांसद को समन पर स्टे

New Delhi Updated Sat, 09 Feb 2013 05:30 AM IST
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नई दिल्ली। अपहरण व दुष्कर्म मामले में कांग्रेस सांसद व उनके परिजनों के खिलाफ शुक्रवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट से जारी समन पर हाईकोर्ट ने स्टे लगा दिया। सांसद महाबल मिश्रा और उनके परिवार के पेश न होने के कारण जिला अदालत ने दोबारा समन जारी किया था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र भट की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सांसद, उनकी पत्नी उर्मिला, बेटी किरण व भाई हीरा मिश्रा को 18 फरवरी 2013 को पेश होने के लिए समन जारी किया था।
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सांसद व उनके भाई हीरा प्रसाद मिश्रा ने फास्ट ट्रैक कोर्ट के 4 फरवरी के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट की शरण ली थी। उन्होंने याचिका में निचली अदालत में मामले की सुनवाई पर रोक लगाने की मांग की।

जस्टिस जी पी मित्तल ने मिश्रा परिवार की याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुए नौ अप्रैल 2013 तक जवाब देने को कहा है। हाईकोर्ट ने पीड़िता के पिता से भी जवाब-तलब किया है। निचली अदालत का रिकार्ड भी हाईकोर्ट ने मंगाया है। जिला अदालत ने 2006 में एक नाबालिग लड़की के अपहरण व दुष्कर्म मामले में सांसद व परिजनों को समन जारी किया था। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि मिश्रा व उनके परिवार ने जान बूझ कर अदालती आदेश की अवमानना नहीं की है। मिश्रा व उनका परिवार महाकुंभ में शामिल होने के लिए इलाहाबाद में था और उनके भाई हीरा मिश्रा किसी संस्कार के लिए पटना गए हुए थे। समन जारी होने की बात उन्हें मीडिया के जरिए पता चली।
मिश्रा परिवार पर एक नाबालिग लड़की को बंधक बनाकर रखने का आरोप है। पीड़िता व उसके पिता का कहना है कि उसे अपहरण करने के बाद मिश्रा के महावीर एंक्लेव स्थित कार्यालय व उनके भाई के घर पर बंधक बनाकर रखा गया। मिश्रा परिवार ने पीड़िता पर मुख्य आरोपी प्रदीप सहरावत से शादी करने का दबाव डाला था। प्रदीप सहरावत पर दुष्कर्म का मुकदमा चल रहा है।

क्या है मामला
नवंबर 2006 को मुख्य आरोपी प्रदीप सहरावत ने 16 वर्षीय पीड़िता को ट्यूशन जाते समय अगवा कर लिया था। पुलिस ने इस मामले में प्रदीप, देवेंद्र, सुनील, सुरेंद्र व सतेंद्र के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। मिश्रा व उनके परिजनों को पुलिस ने पूरक आरोप पत्र में संदिग्धों की सूची में डाला था। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 2008 व सेशन कोर्ट ने 2010 में सबूतों के अभाव में मिश्रा के खिलाफ समन जारी करने से इनकार कर दिया था। पीड़िता के पिता की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने 2012 में निचली अदालत के आदेश को खारिज करते हुए मामले पर नए सिरे से विचार करने का आदेश दिया था।

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