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आखिर सुभाष ने हारी जिंदगी की दूसरी जंग

New Delhi Updated Wed, 26 Dec 2012 05:30 AM IST
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नई दिल्ली। आखिर जिंदगी की दूसरी जंग सुभाष चंद हार गए...। यह दूसरा मौका था जब किसी वारदात के बाद गंभीर रूप से घायल होकर वे अस्पताल में भर्ती हुए थे। परिजनों के मुताबिक, वर्ष 1989 में माल रोड पर डीटीसी बस में हुए बम विस्फोट में सुभाष बुरी तरह जख्मी हुए थे। तब भी उनकी जान पर बन आई थी लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।
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मूल रूप से जिला बागपत बड़ोली गांव निवासी सुभाष वर्ष 1987 में दिल्ली पुलिस में सिपाही भर्ती हुए थे। गांव में सुभाष के पिता चौल सिंह तोमर, मां पितमो देवी, बड़े भाई हरबीर, रणबीर, नरेश और छोटा भाई रमेश हैं। सुभाष फिलहाल दिल्ली के गोकुल पुरी स्थित मीत नगर में पत्नी अमरेश के अलावा बेटी ज्योति (24), बेटा दीपक (21) व आदित्य (18) के साथ रह रहे थे। ज्योति बड़ोत से बीएड कर रही है। जबकि दीपक गाजियाबाद के एक कॉलेज से बीबीए कर रहा है। वहीं, छोटा बेटा 12वीं करने के बाद आर्किटेक्ट की तैयारी कर रहा है। दीपक ने बताया कि रविवार को उन्हें आरएमएल अस्पताल से पिता के घायल होने की सूचना मिली थी। उनका परिवार भी गैंगरेप पीड़िता के साथ है। यहां तक देश में हो रहे गैंगरेप के खिलाफ प्रदर्शन का भी हम समर्थन करते हैं। दीपक ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान नेताओं के भड़काने के बाद भीड़ गुस्साई और पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। दीपक ने आरोपियों की पहचान कर उन्हें कड़ी सजा देने की मांग की। आदित्य ने बताया कि उसके पिता ड्यूटी के बहुत पाबंद थे। ड्यूटी के चलते उन्होंने कभी कोई त्योहार परिवार के साथ नहीं मनाया।

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