सरहद पार की ‘दोस्ती’ का हो रहा ब्रेक डाउन

New Delhi Updated Mon, 17 Dec 2012 05:30 AM IST
नई दिल्ली। भारत-पाकिस्तान के बीच दोस्ती का पैगाम लेकर दौड़ने वाली पाकिस्तान की ‘दोस्ती’ बस में आए दिन कुछ न कुछ तकनीकी खामी आती रहती है। यात्रियों की सुरक्षा के चलते अब दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) केंद्रीय गृह और विदेश मंत्रालय को तकनीकी खामी की रिपोर्ट देगा, ताकि समस्या का हल निकाला जा सके।
भारत-पाक रिश्तों में मिठास घोलने के लिए लाहौर बस सेवा शुरू की गई थी। इसके तहत पाकिस्तान की दो बसों (‘दोस्ती’) को भारत का परमिट मिला है। उनमें से एक बस पुरानी है। उसमें अक्सर तकनीकी खामी आती रहती है। पिछले दिनों पंजाब के पास टायर के नट (पुर्जे) निकल गए। सूत्रों के अनुसार, उस समय बस की गति बहुत कम थी। अगर गति तेज होती तो बस पलट भी सकती थी। उसके बाद से डीटीसी प्रबंधन घबराया हुआ है और तकनीकी खामी की रिपोर्ट बनाई जा रही है। डीटीसी ने इस बारे में केंद्रीय गृह और विदेश मंत्रालय को रिपोर्ट देने का फैसला किया है, ताकि वे पाकिस्तान सरकार से बात करें और पुरानी की जगह नई बस भेज सकें।
बता दें कि लाहौर बस सेवा की सारी जिम्मेदारी डीटीसी पर है। आते-जाते वक्त अगर बस में तकनीकी खामी आती है तो अन्य बस का इंतजाम करना डीटीसी की जिम्मेदारी है। छोटी-मोटी खामी तो अक्सर मैकेनिक बुलाकर ठीक करवा ली जाती है, लेकिन दिल्ली से बाहर बड़ी तकनीकी खामी आने पर डीटीसी दिल्ली से बस भिजवाता है या फिर पंजाब और हरियाणा सरकार से मांग करके दूसरी बस का इंतजाम करता है। जो अन्य बस मुहैया करवाई जाती है, वह परमिट न होने पर बाघा बॉर्डर पार नहीं कर सकती। ऐसे में पाकिस्तान सरकार को बॉर्डर पर दूसरी बस भेजने की सूचना डीटीसी को ही देनी पड़ती है।
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दो बार बदली है अपनी बस
पाकिस्तान की ‘दोस्ती’ बस में पहली बीर 2005 में तकनीकी खामी आई थी, लेकिन तब से वह चल ही रही है। इस बीच भारत की बस सदा-ए-सरहद 2004 के बाद 2008 में बदल चुकी है। डीटीसी सूत्रों के अनुसार, यह अंतरराष्ट्रीय बस सेवा है, जिसमें यात्रियों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है। इसीलिए समय-समय पर डीटीसी अपनी बसों की जांच करते हुए मोटर विशेषज्ञों से राय भी लेता रहता है। विशेषज्ञों ने डीटीसी प्रबंधन को बताया है कि पाकिस्तानी बस का रखरखाव ठीक नहीं है। तकनीकी खामी के चलते कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। सुरक्षा के चलते दो पुलिस की गाड़ियां बस के आगे-पीछे चलती हैं और इस बीच बस की स्पीड सौ से 120 किमी के बीच होती है। ऐसे में तकनीकी खामी आती है तो जान-माल का नुकसान हो सकता है।
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कब, कहां हुई गड़बड़
3 जुलाई अंबाला
14 सितंबर दिल्ली
15 सिंतबर दिल्ली
26 सिंतबर पंजाब
27 सिंतबर पंजाब
24 नवंबर दिल्ली
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कोट....
पुरानी होने के चलते पाकिस्तान की बस में अक्सर तकनीकी खराबी आ रही है। सुरक्षा के लिहाज से यह ठीक नहीं है। भारतीय सीमा में बस के ब्रेकडाउन होने से डीटीसी को ही व्यवस्था करनी पड़ती है। जल्द ही केंद्रीय गृह और विदेश मंत्रालय को रिपोर्ट दी जाएगी, ताकि वे पाकिस्तान सरकार से नई बस चलाने की मांग कर सकें।
रमाकांत गोस्वामी, परिवहन मंत्री, दिल्ली सरकार

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