बस रूट में बीस साल बाद होगा बदलाव

New Delhi Updated Sat, 15 Dec 2012 05:30 AM IST
नई दिल्ली। राजधानी के लोगों को जल्द ही डीटीसी बसों के आने-जाने के समय और रूट पर होने वाली परेशानी से मुक्ति मिलेगी। दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) प्रबंधन अपने बीस साल पुराने रूटों में बदलाव करने जा रहा है। प्रबंधन की प्राथमिकता यात्रियों की सुविधा होगी। उसी के अनुसार बसों के रूट बढ़ाए और घटाए जाएंगे। हालांकि पहली बार प्रबंधन मेट्रो यात्रियों को भी बसों से जोड़ने की योजना बना रहा है।
डीटीसी ने बीस सालों से रूटों में कोई बदलाव ही नहीं किया था। प्रबंधन ने मात्र रूटों का विस्तार किया था, जिससे यात्रियों को अकसर शिकायत रहती थी। प्रबंधन डिम्ट्स की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर अब बदलाव तो करेगा, साथ ही मेट्रो से बसों को जोड़ने की भी विशेष व्यवस्था होगी। इसके अलावा मेट्रो स्टेशन से एसी बसों को अधिक से अधिक जोड़ने की भी योजना है। डीटीसी ने यात्रियों को और अधिक सुविधा मुहैया करवाने के उद्देश्य से वर्ष 2008 में डिम्ट्स को रूट अध्ययन करने का जिम्मा सौंपा था। एक साल पहले से तैयार रिपोर्ट आपसी तालमेल की कमी से दबी पड़ी थी।
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सभी रूटों की समीक्षा की जरूरत

सर्वे रिपोर्ट में डिम्ट्स ने लिखा है कि बीस साल पहले (वर्ष 1991) में दिल्ली की आबादी 94 लाख थी, जो वर्ष 2011 में 1.67 करोड़ के पार कर चुकी है। आबादी बढ़ने के साथ-साथ सैकड़ों नई कॉलोनियां भी बसी हैं, जिससे इलाकों का विस्तार हुआ है। हालांकि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था बीस सालों से पुराने ढर्रे पर ही दौड़ रही है। डीटीसी को अपने रूट में बदलाव की बेहद आवश्यकता है, ताकि यात्रियों को जरूरत के अनुसार सेवा मिल सके।
टीम ने रिपोर्ट में लिखा है कि डीटीसी को अपने सभी रूटों को रिव्यू करने की जरूरत है। रूट दिल्ली के मौजूदा विस्तार और मेट्रो को ध्यान में रखते हुए होने चाहिए। डीटीसी और डीएमआरसी के अधिकारियों को भी रूट बदलाव के समय मौजूद रहना चाहिए। हालांकि रिपोर्ट में 22 नए रूट का खाका भी तैयार किया गया है। इसके अलावा 169 ऐसे रूटों के बारे में भी लिखा है, जिसमें बदलाव की सबसे अधिक जरूरत है।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि रूट बढ़ाने के समय डीटीसी और क्लस्टर बसों का ध्यान में रखा जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग सेवा का लाभ उठा सकें। बसों की समय-सारिणी का भी विशेष ध्यान रखा जाए। सर्वे के दौरान यात्रियों की शिकायत मिली थी कि कई रूट पर घंटों इंतजार के बाद बस मिलती है, जबकि कई रूट पर एक के पीछे एक ही नंबर की बसें चलती हैं। सुबह-शाम के साथ दोपहर और देर शाम को भी संचालन नियमित होना चाहिए। टीम ने लोगों की शिकायत को आधार बनाते हुए लिखा है कि संचालन नियमित और समय से नहीं होने से लोग देरी से आफिस पहुंचते हैं, इसलिए अन्य परिवहन विकल्पों का सहारा लेना पड़ता है। रिपोर्ट में रिंग रोड के अलावा उत्तरी, पूर्वी, पश्चिमी और दक्षिणी दिल्ली के आधार पर बस चलाने की बात कही है।
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बातचीत के आधार पर हुआ था सर्वे
डिम्ट्स ने रिपोर्ट बनाने के लिए कई टीमों को सड़कों और कॉलोनियों में उतारा था। टीम ने सुबह, दोपहर, शाम और देर शाम पर यात्रियों की समस्याओं को सुनकर उनकी राय मांगी थी। टीम ने बसों में सामान्य यात्री बनकर रूटों और सेवाओं का जायजा लिया था। इसके अलावा लोगों को एक फार्म भी दिया गया था। जिसमें उन्हें अपनी मांग, समाधान और बदलाव के बारे में लिखना था। सर्वे में कामकाजी, घरेलू महिलाओं, कॉलेज और स्कूली छात्र-छात्राओं के अलावा सरकारी और निजी कर्मचारियों को शामिल किया गया था।

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