कम नहीं हुआ खादी का क्रेज

New Delhi Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
नई दिल्ली। बापू के चरखे से निकली खादी का क्रेज कल भी था, आज भी है और कल भी रहेगा। नए कलेवर में आई खादी युवाओं से लेकर बड़ों के लिए फैशन स्टेटमेंट बन गई है। यह साबित कर रहा है प्रगति मैदान का हॉल नंबर 15 में बना खादी पवेलियन, जहां खादी से जुड़े उत्पादों के 160 स्टॉल पर दर्शक अपने को जाने से रोक नहीं पा रहे हैं।
खादी व ग्रामीण औद्योगिक आयोग के निदेशक एसपी सिंह का कहना है कि यहां आए उद्यमियों को इस पवेलियन के जरिए मार्केटिग के लिए एक प्लेटफॉर्म मिल रहा है, जिससे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खादी को नई पहचान मिल रही है। यहां आए लोगों ने अपने उत्पादों के जरिए खादी को नया रूप दिया है। चाहे वह कपड़े हों या फिर अन्य उत्पाद। इस पवेलियन की खास बात है कि यहां अधिकतर स्टॉल महिलाएं संभाल रही हैं। इससे महिला सशक्तीकरण का भी संदेश जा रहा है। उन्होंने कहा कि खादी उत्पादों के प्राकृतिक, पर्यावरण के अनुकूल, शुद्ध और टिकाऊ होने के कारण दर्शकों का अच्छा रेस्पॉंस मिल रहा है। पवेलियन में 200 से लेकर 4000 रुपये तक की साड़ी, सूट, कुर्ता पजामा और अन्य उत्पाद मौजूद हैं।
खादी को तैयार करने का चरखा, गांधी जी का प्रिय भजन वैष्णव जन तो... खादी पवेलियन में बापू की याद दिला रहे हैं। यही वजह है कि हर आयु वर्ग के लोग इस कोने में चले आते हैं। माता-पिता अपने बच्चों को यह बताने से नहीं चूकते कि गांधी जी इस तरह से कपड़ा बनाते थे। आंध्र प्रदेश से आईं आठ महिलाएं खास किस्म की पुंडरू खादी बनाने के तरीकों को प्रदर्शित कर रही हैं। इसमें मछली के दांत से कपास को साफ करना, कपास के बीजों को निकालना, बीजों की सफाई करना, रूई की पिसाई व बुनाई करना, पूनी बनाना, बारीक सूत निकालना और गुंडी बनाना शामिल है। इस प्रक्रिया से एक साड़ी कम से कम दो माह में बनती है। दाम सुन कर आप चौंक भी सकते हैं। एक साड़ी की कीमत है आठ हजार रुपये। इसके बावजूद ऐसी साड़ियों की बिक्री जोरों पर है।
यह खादी का ही कमाल है कि इससे डिजाइनर भी जुड़ने लगे हैं। चंडीगढ़ की डिजाइनर पूनम ठाकुर का खादी का स्टॉल है। वह कपड़ों के जरिए खादी को प्रमोट कर रही हैं। उनके सूट व अन्य मैटीरियल की खासियत है कि यह हाथ से बना फैब्रिक है, जो कि सिकुड़ता नहीं है। वहीं, दिल्ली की विजया अरोड़ा ने बताया कि उन्होंने डिजाइनिंग में डिप्लोमा किया है। खादी से बने कपड़ों को वह तैयार करती हैं। उन्होंने बताया कि महंगी होने के बावजूद दर्शकों में खादी का क्रेज काफी ज्यादा है। हर सीजन के मुताबिक यहां कपड़े उपलब्ध हैं।

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