राजधानी में पानी से लेकर आबोहवा तक प्रदूषित

New Delhi Updated Sat, 03 Nov 2012 12:00 PM IST
नई दिल्ली। यमुना का पानी हो या आबोहवा, देश की राजधानी में सब कुछ प्रदूषण की चपेट में है। इससे दिल्ली का दम फूलने लगा है। धुंध की चादर ओढ़े दिल्लीवाले इसे ठंड की फॉग समझ रहे हैं, लेकिन यह उनके वाहनों से निकलने वाले धुएं से बना स्मॉग है। यही नहीं यमुना में बह रहा पानी भी पीने लायक नहीं है। हरियाणा सेे अमोनिया युक्त पानी छोड़ने से जल उत्पादन कम हो गया है जिससे दिल्ली जल संकट से जूझ रही है। दिल्ली के फूलते दम की वजह बताती बृजेश सिंह की यह रिपोर्ट...

स्मॉग से ढकी दिल्ली
सांस रोगियों को हो रही परेशानी, आंखों के लिए भी खतरा
हम जिसे ठंड की दस्तक मानकर कोहरा मान रहे हैं। दरअसल, वह राजधानी में तेजी से बढ़ते वाहनों व अन्य कारणों से निकलने वाले प्रदूषित धुएं में पाए जाने वाले रासायनिक कण (स्मॉग) हैं। यह कण हवा में निचले स्तर पर आ जाते हैं। ऊपर से गर्म हवा और नीचे हवा में नमी के चलते यह प्रदूषक तत्व पीएम10 और पीएम 2.5 (बेहद छोटे-छोटे कण) निचले स्तर पर आ जाते हैं।
पर्टीकुलेट मैटर10 व 2.5 वातावरण में घुले प्रदूषक तत्व के छोटे-छोटे कण हैं। यह वाहनों, औद्योगिक इकाईयों, पावर प्लांट, लकड़ियों के जलाने से निकलते हैं। यह सॉलिड और लिक्विड कणों का मिलाजुला रूप है है। यह आदमी के बाल से भी 25 से 100 गुना पतले होते हैं। इसे सिर्फ इलेक्ट्रान माइक्रोस्कोप से देखा जा सकता है। वर्तमान में राजधानी में पीएम10 व 2.5 की मात्रा औसत 500 माइक्रोग्राम क्यूबिक मीटर है। निचले स्तर पर आने से यह सांस रोगियों के लिए खासी परेशानी बनता है। छोटा होने से यह सीधे सांस की नली से फेफड़े तक पहुंच जाता है। यह आंखों के जलन का कारण भी बनता है। इस समय यह हवा में औसत मात्रा से कई सौ गुना ज्यादा मौजूद है।
अलग-अलग हिस्सों में स्थिति
स्थान पीएम10 पीएम2.5
आनंद विहार -- 4985
मंदिर मार्ग 682 496
पंजाबी बाग 669 446
आरके पुरम् 715 419
आईजीआई 844 999
सिविल लाइन 356 244
(नोट: यह डीपीसीसी का रीयल टाइम डाटा शाम 5-5:30 के बीच का है। पीएम10 औसतन 100 व 2.5 60 माइक्रोग्राम क्यूबिक मीटर होना
चाहिए।)
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ठंड में यह समस्या बढ़ जाती है। हवा में नमी होने से मिक्सिंग हाइट कम हो जाती है। ठंड में ऊपर वातावरण में गरमी रहती है और हवा में नमी होने से छोटे-छोटे कण नीचे वातावरण में घुल जाते हैं। यह सांस रोगियों और बच्चों के लिए परेशानी के कारण बनते हैं।
- आर देबरॉय, पर्यावरण इंजीनियर, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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स्मॉग बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। इसके कण बेहद छोटे होते हैं जो श्वसन तंत्र को डैमेज करते हैं। ऐसी स्थिति में हमेशा मुंह पर कपड़ा बांधकर निकलना चाहिए। जरूरी हो तो तभी घर से निकलें। कार में चलने वाले शीशा बंद करके चलें तो बेहतर है। इससे आंखों में भी जलन होती है।
- एसएम रहेजा, एमडी मेडिसन, जीबी पंत

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यमुना में अमोनिया की मात्रा बढ़ी
यमुना का पानी दिल्ली के लिए सबसे बड़ा स्त्रोत है। हरियाणा से हाल ही में छोड़ गए पानी के साथ आए अमोनिया की मात्रा ने यहां के पानी को प्रदूषित कर दिया है। इसका सीधा असर दिल्ली के दो जलशोधन संयंत्रों पर पड़ा है। उत्पादन में 20 फीसदी से ज्यादा की कमी आई है जिससे राजधानी के कई इलाकों में पानी की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है।

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