एफडीआई : दोनों सदनों से मंजूरी लेना अनिवार्य

New Delhi Updated Thu, 01 Nov 2012 12:00 PM IST
नई दिल्ली । विदेशी निवेश (एफडीआई) को मंजूरी देने से पहले सरकार को दोनों सदनों से मंजूरी लेना अनिवार्य हो गया है। विरोध को देखते हुए सरकार अभी तक इससे बच रही थी। कंफेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के मुताबिक एफडीआई के लिए भारतीय रिजर्व बैंक को फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट 1999 में संशोधन करना होगा।
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि सरकार को एफडीआई को मंजूरी से पहले फेमा के नियमों और उपनियमों में संशोधन कर मंजूरी लेने के लिए दोनों सदनों में जाना पड़ेगा। उनके मुताबिक उच्चतम न्यायालय एक याचिका पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को फेमा के नियम और उपनियमों में संशोधन के बाद ही एफडीआई के मंजूरी देने का निर्देश जारी कर चुका है। मामले की अगली सुनवाई पांच नवंबर को है। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया ने बताया कि फेमा कानून विदेश व्यापार और विदेशी मुद्रा विनिमय के लिए बनाया गया है। वर्तमान व्यवस्था में एफडीआई की मंजूरी तीन चरणों में पूरा होगी। पहले चरण में डीआईपीपी द्वारा नीति बनाई जाती है। दूसरे चरण में फेमा के नियम और उपनियमों में संशोधन भारतीय रिजर्व बैंक करेगा। इसके बाद संशोधन को मंजूरी के लिए दोनों सदनों में भेजा जाएगा।

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