एसटीबी को लेकर टीवी दर्शक ऊहापोह में

New Delhi Updated Tue, 30 Oct 2012 12:00 PM IST
नई दिल्ली। दो दिनों बाद सेट टॉप बॉक्स (एसटीबी) के बिना टीवी नहीं चलेगा, लेकिन अभी हजारों घर ऐसे है, जहां इसका काम अधूरा है। उपभोक्ताओं को अभी यह तक पता नहीं है कि मनपसंद चैनल देखने के लिए उन्हें महीने में कितना खर्च करना पड़ेगा। केबल ऑपरेटर भी उन्हें इस संबंध में कुछ जानकारी नहीं दे पा रहे हैं।
उपभोक्ता मामले के विशेषज्ञ व एसटीबी टास्क फोर्स के सदस्य हेमंत उपाध्याय ने बताया कि कंज्यूमर को अभी तक यह पता नहीं है कि चैनल प्रसारण के लिए उनसे पैसा कितना वसूला जाएगा। अलग-अलग क्षेत्रों में एसटीबी की अलग-अलग कीमत वसूली जा रही है। कहीं 699 रुपये लिए जा रहे हैं तो कहीं 1000 रुपये। उपभोक्ताओं को 15 रुपये एसटीबी का रेंट हर महीना केबल ऑपरेटर को देना है, इसकी जानकारी नहीं है। उपाध्याय का कहना है कि अगले महीने से केबल ऑपरेटर और उपभोक्ताओं के बीच तू-तू, मैं-मैं शुरू होने वाली है, क्योंकि जैसे ही चैनल प्रसारण का बिल उपभोक्ताओं के पास पहुंचेगा, वे परेशान हो जाएंगे। केबल ऑपरेटरों की भी मनमानी बढ़ जाएगी। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में सरकार, चैनल प्रसारण करने वाली कंपनी और केबल ऑपरेटर को ही फायदा पहुंचेगा, उपभोक्ताओं को नहीं। घरों में एसटीबी लगाने का आंकड़ा झूठा साबित हो रहा है।
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घर बदलने पर लेना होगा नया एसटीबी
डिजिटल एड्रेसेबल केबल टीवी सिस्टम (डैस) के कुछ ऐसे पहलू भी है, जिनके बारे में उपभोक्ताओं को जानकारी नहीं है। केबल ऑपरेटर फेडरेशन ऑफ इंडिया की अध्यक्ष रूप शर्मा का कहना है कि अगर आप घर बदलेंगे तो आपको एसटीबी बदलना होगा, क्योंकि जो चार्ज केबल ऑपरेटर एसटीबी का आपसे ले रहे हैं, वह एसटीबी की कीमत नहीं है, बल्कि एक्टिवेशन चार्ज है।
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होटल में टीवी वाले कमरे होंगे महंगे
अस्पताल और होटल के टीवी वाले कमरे का बिल डैस की वजह से बढ़ जाएगा। ऐसा इसलिए है, क्योंकि पहले एक ही केबल कनेक्शन से सभी कमरों में चैनल का प्रसारण होता था, लेकिन अब एक टीवी चलाने के लिए एक एसटीबी की जरूरत होगी। इसी तरह जितने चैनल होंगे, उतना बिल भी प्रति कमरे का अलग से आएगा। ऐसा में टीवी वाले कमरे महंगा हो जाएंग।
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केवाईसी फॉर्म भरे बिना लगे एसटीबी
डिजिटल एड्रेसेबल केबल टीवी सिस्टम (डैस) के तकनीकी जानकार कर्नल खरे का कहना है कि सरकार इस मामले में विफल साबित हुई है। बिना नो योर कस्टमर (केवाईसी) फॉर्म भरे ही एसटीबी घरों में लगा दिया गया है। इसमें न तो उपभोक्ताओं से चैनल की च्वाइस मांगी गई है और न ही उन्हें रेट बताया गया है। कोई कस्टमर आईडी भी अभी तक नहीं बनी है, जहां वे अपनी शिकायत दर्ज करा सके।
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एसटीबी रिमोट संभाल कर रखें
आपको एसटीबी के रिमोट को संभाल कर रखना होगा, क्योंकि अभी तक दिल्ली में ऐसा कोई रिपयरिंग सेंटर नहीं है, जहां रिमोट की मरम्मत कराई जा सके। केबल ऑपरेटर विक्की चौधरी ने बताया कि रिमोट के टूटने की स्थिति में पूरा एसटीबी सेट ही बदलना पड़ेगा।

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