आईआईटी दिल्ली का अगला पड़ाव झज्जर में

New Delhi Updated Sat, 27 Oct 2012 12:00 PM IST
नई दिल्ली। हरियाणा के सोनीपत स्थित राजीव गांधी एजुकेशन सिटी में कैंपस बनाने के बाद आईआईटी दिल्ली अब अगला सेंटर हरियाणा के ही झज्जर में स्थापित करेगी। रिसर्च कैंपस के लिए झज्जर के गांव भाड़सा में 125 एकड़ अतिरिक्त जमीन दिए जाने को लेकर हरियाणा सरकार से बात चल रही है। आईआईटी को उम्मीद है कि जल्द ही इस बारे में निर्णय ले लिया जाएगा। आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर आर के शेवगांवकर ने बताया कि संस्थान में तमाम गतिविधियां होती हैं, जिनके विस्तार की जरूरत है। कुछ ही समय पहले अपना सेंटर बनाने के लिए सोनीपत स्थित कुंडली के राजीव गांधी एजुकेशन सिटी में 50 एकड़ जमीन की मंजूरी मिली है। उन्होंने बताया कि अब झज्जर के पास 125 एकड़ जमीन की मांग की गई है। इस बारे में हरियाणा सरकार से बातचीत जारी है। एम्स कैंपस भी इसी जगह के पास बन रहा है, लिहाजा भविष्य में दोनों संस्थानों को लाभ मिलेगा।
प्रोफेसर शेवगांवकर ने बताया कि यह एक रिसर्च कैंपस होगा, लिहाजा विभिन्न कोर्स से संबंधित गतिविधियों को अंजाम दिया जाएगा। आईआईटी का मानना है कि रिसर्च कैंपस के बनने से भारत भी रिसर्च के क्षेत्र में काफी आगे जाएगा।
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इनोवेशन सेंटर को मिलेगा विस्तार
नई दिल्ली। आईआईटी दिल्ली के 1986 बैच के छात्रों के फंड से फरवरी में शुरू हुए स्टूडेंट इनोवेशन सेंटर को जल्द ही विस्तार मिलने वाला है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सेंटर को आगे बढ़ाने के मंजूरी दे दी है। उम्मीद है कि करीब छह माह में यह शुरू हो जाएगा। सेंटर को शुरू करने के पीछे आईआईटी का उद्देश्य छात्रों को उद्यमी के तौर पर तैयार करना है। खास बात यह है कि इसमें बाहर के छात्रों को भी मौका मिलेगा। इस पर कुल 25 करोड़ रुपये की लागत आएगी। आईआईटी निदेशक प्रो आर के शिवगांवकर ने बताया कि यह एक तरह से डिजाइन इनोवेशन सेंटर होगा। इसमें छात्रों को प्रोडक्ट को डिजाइन करने के साथ ही उसे बाजार में बेचने की कला से रूबरू कराया जाएगा। इसमें ट्रिपलआईटी दिल्ली, आईआईटी मंडी और इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी दिल्ली के छात्र रिसर्च कर सकेंगे।

मेटा यूनिवर्सिटी के लिए आईआईटी भी तैयार
रिसर्च के लिए अब आईआईटी भी मेटा मोड अपनाने के लिए तैयार है। इसके लिए आईआईटी ने शिक्षा, पब्लिक हेल्थ और क्लाइमेंट चेंज का चुनाव किया है। प्रो शेवगांवकर के मुताबिक यह तीन क्षेत्र ऐसे हैं, जिस पर फिलहाल कोई भी संस्थान काम नहीं कर रहा है। चारों संस्थानों से रिसर्च को आगे बढ़ाने के लिए तीन-तीन सदस्य होंगे, जो कि इन चुने गए क्षेत्रों की रिसर्च को आगे बढ़ाने का काम करेंगे। उन्होंने बताया कि अभी शोध कार्यों के लिए समझौता हुआ है, बाद में कोर्स शुरू करने के बारे में सोचा जाएगा।

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