वेटिंग के नाम पर ऑटो रिक्शा की ब्लैक मार्केटिंग शुरू

New Delhi Updated Mon, 22 Oct 2012 12:00 PM IST
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने ऑटो रिक्शा के जो परमिट निकाले उस पर डीलर्स और फाइनेंसर्स की चांदी हो गई है। एक विशेष कंपनी के डीलर्स दो-तीन महीने की वेटिंग के नाम पर ब्लैक मार्केटिंग कर रहे हैं। फाइनेंसर्स के पास बिना सेल लेटर के ऑटो रिक्शा पहुंच रहे हैं। महज 1.64 लाख रुपये तक का ऑटो रिक्शा छोटे फाइनसर्स के पास ढाई लाख रुपये तक बिक रहा है। जबकि अब परिवहन विभाग से परमिट की स्वीकृति पूर्व में लेने की कोई दिक्कत नहीं है। वहीं परिवहन विभाग के अधिकारी कह रहे हैं कि आवेदनकर्ता बहुत कम आ रहे हैं।
ऑटो रिक्शा खरीदने के लिए हरि सिंह, मनोज कुमार, सतीश कुमार और तेजपाल ने अगस्त से 11 सितंबर के बीच 5 हजार रुपये देकर बुकिंग कराई। अभी तक इन्हें ऑटो रिक्शा नहीं मिले हैं। इनका कहना है कि जब भी संबंधित ऑटो डीलर से संपर्क करते हैं तो वेटिंग की जानकारी देते हैं। वहीं पूर्वी दिल्ली के झील-खुरंजा समेत कई अन्य जगह फाइनेंसर्स खरीददार से मोटी रकम वसूल रहे हैं। ऑटो डीलर्स फाइनेंसर्स की दुकान पर बिना सेल लेटर के डिस्प्ले में ऑटो रिक्शा खड़ा करवा रहे हैं जिसके कारण 50 हजार रुपये से 80 हजार रुपये तक की ब्लैक मार्केटिंग शुरू हो गई है। भारतीय प्राइवेट ट्रांसपोर्ट मजदूर महासंघ के अध्यक्ष राजेंद्र सोनी का कहना है कि ब्लैक मार्केटिंग में जुड़े विशेष कंपनी के डीलर्स की शिकायत अधिकारियों से कर दी है। परिवहन विभाग को भी शिकायत भेज रहे हैं। अगर ब्लैक में ऑटो रिक्शा चालक खरीदेंगे तो फिर सड़क पर यात्रियों से वसूली ज्यादा करेंगे। सरकार को भी मामले को गंभीरता से देखना चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा है कि एक सप्ताह तक हालात नहीं सुधरे तो इस विशेष कंपनी के शो-रूम के सामने प्रदर्शन होगा।
क्या है मामला
दिल्ली में ऑटो रिक्शा के परमिट पर प्रतिबंध था जिसे नवंबर, 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने हटाकर 45 हजार नए ऑटो रिक्शा को परमिट देने की अनुमति दी थी। 55 हजार ऑटो रिक्शा दिल्ली में पहले ही दौड़ रहे हैं। दिल्ली सरकार तमाम कागजी कार्रवाई में लगी रही और एक वर्ष का समय निकल गया। दो महीने पूर्व परिवहन विभाग ने 10 हजार ऑटो रिक्शा परमिट के लिए आवेदन मंगाए। उसमें साफ किया गया है कि लाइसेंस, बैज, पैनकार्ड, पता प्रमाण, बैंक अकाउंट के साथ ऑटो रिक्शा लेकर आने पर परमिट दे दिए जाएंगे।
प्रारंभ के एक महीने में आवेदन नहीं आए क्योंकि ऑटो मीटर और जीपीएस को लेकर कंफ्यूजन बना रहा। एक कंपनी को मीटर लगाने के लिए अधिकृत किया गया तो ऑटो रिक्शा के आवेदन आने लगे लेकिन एक विशेष कंपनी ने बुकिंग और दो से तीन महीने की वेटिंग के नाम पर ब्लैक मार्केटिंग शुरू कर दी है।
परिवहन विभाग को डीलर्स दे चुके हैं आश्वासन
परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ऑटो रिक्शा निर्माताओं की मीटिंग हुई थी। उसमें कंपनी अधिकारियों ने आश्वस्त किया था कि ऑटो रिक्शा की कमी नहीं है। दस हजार ही नहीं अगर 45 हजार परमिट निकाले जाते हैं तो वह भी पूरा कर सकते हैं।
शिकायत मिलने पर करेंगे कार्रवाई
परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि ऑटो रिक्शा की बाजार में कमी नहीं है। किसी खरीददार को ब्लैक में ऑटो रिक्शा लेने की जरूरत नहीं है। अगर एक कंपनी मना करती है तो दूसरी कंपनी से ले लें। लेकिन उपभोक्ता यदि उसी विशेष कंपनी का वाहन चाहते हैं तो सीधे विभाग को साक्ष्यों के साथ शिकायत दें। प्रतीक्षा सूची की बात डीलर्स ने कभी नहीं बताई। उपभोक्ता की तरफ से शिकायत मिलने पर डीलर के खिलाफ उनका ट्रेड सर्टिफिकेट तक कैंसिल करने की कार्रवाई की जाएगी।

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