पात्र नहीं, हस्ताक्षर-मुहर और अस्पताल भी फर्जी

New Delhi Updated Tue, 16 Oct 2012 12:00 PM IST
बुलंदशहर। विकलांगों को सहायता के नाम पर जिले में चला अभियान ही फर्जीवाड़े की भेंट चढ़ गया। जांच अभियान में खुलासा हुआ है कि केवल पात्र ही नहीं, अस्पताल और मुहर-हस्ताक्षर सब कुछ फर्जी ही फर्जी है।
अब विकलांगों को सहायता के नाम पर शासन ने रिपोर्ट मांगी तो हड़कंप मच गया। केवल विकलांग कल्याण विभाग ने ही नहीं, स्वास्थ्य विभाग ने भी अपनी रिपोर्ट में इस फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। विकलांगों को उपकरण देने से पहले स्वास्थ्य परीक्षण कराना दिखाया गया है। एनजीओ ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बुलंदशहर में स्वास्थ्य परीक्षण होना दिखाया था। प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी बुलंदशहर के इस पर हस्ताक्षर हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र नाम का कोई केन्द्र बुलंदशहर मुख्यालय पर नहीं है और न ही इस पद नाम का कोई चिकित्साधिकारी। अस्पताल के नाम के साथ ही एनजीओ की रिपोर्ट पर चिकित्साधिकारी की मुहर भी फर्जी है। जिस आकार की मुहर लगी दिखाई गई है, ऐसी मुहर स्वास्थ्य विभाग में नहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट की एक प्रति जिला विकलांग कल्याण कार्यालय को भी प्राप्त हुई है।
जिला विकलांग कल्याण अधिकारी ने बताया कि निदेशालय के पत्र के बाद चेक लिस्ट कराया गया। इसमें स्वास्थ्य विभाग से भी जांच मांगी गई थी, सब कुछ हवा-हवाई निकला है। बीडीओ से जिलेभर में जांच कराई जा रही है। एक साल पहले तत्कालीन सीडीओ ने बीडीओ को जांच का पत्र भेजा था। बीबीनगर और ऊंचागांव को छोड़कर अन्य की रिपोर्ट प्राप्त हो गई है।
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दिल से कोई गलती नहीं की गई : श्यौपाल
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तत्कालीन जिलाध्यक्ष चौधरी श्यौपाल सिंह का कहना है कि कागजात में कहां पर गलती हुई जानकारी नहीं है, लेकिन दिल से कोई गलती नहीं की गई है। विकलांगों को उपकरण बांटे गए हैं, रिकार्ड से मेल न खाने के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।


मृतकों को दे दिया गया लाभ
बुलंदशहर। विकलांगों की सहायता में ऐसे लाभार्थी को सहायता उपकरण देना दर्शाया गया है, जो कई साल पहले ही उपकरण प्राप्त कर चुके थे। पूर्व केन्द्रीय मंत्री कुंवर सुरेंद्र पाल के कैंप के पात्रों को ही नए सिरे से उपकरण वितरित होना दिखाया गया है। ऊंचागांव निवासी गजराज सिंह की मौत वर्ष 2009 में हो गई और ट्रस्ट द्वारा 16 अगस्त 2011 को उनको उपकरण देना दिखाया गया है। ऊंचागांव निवासी पूर्व केन्द्रीय मंत्री कुंवर सुरेंद्रपाल और उनके पौत्र कांग्रेस नेता आरपी सिंह द्वारा वर्ष 2007 में कैंप लगाकर गजराज सिंह को उपकरण दिया गया था। जहांगीराबाद कैंप में ट्रस्ट ने वही पुरानी पात्र सूची दोहरा दी। ऐसा ही बुगरासी क्षेत्र के गांव बरहाना की मुन्नी, कुमारी फहीम और प्रीति पुत्री राजेश गोस्वामी को भी ऊंचागांव कैंप में उपकरण दिया जाना दिखाया गया था। इन्हीं को जहांगीराबाद कैंप में भी पात्र बना दिया गया। यही हाल बीबीनगर ऊंचागांव, स्याना और जहांगीराबाद विकास खंड के ज्यादातर पात्रों का है। जिला विकलांग कल्याण विभाग के रिकार्ड के अनुसार ट्रस्ट ने वर्ष 2011 में कोई कैंप ही नहीं लगा है।


बुलंदशहर जिले में लगाए गए विकलांग सहायता शिविरों की जानकारी ही विभाग के पास नहीं है। केवल वर्ष 2010 के कैंप का रिकार्ड है। कांग्रेस के दावे के विपरीत उन्होेंने बताया कि जिले में 2011 में कोई कैंप लगा ही नहीं है। विभाग अब भौतिक सत्यापन भी करा रहा है।
- एसके गौतम, जिला विकलांग कल्याण अधिकारी

जिले में एक दो स्थानों पर कैंप नहीं लगे थे। इसकी रिपोर्ट शासन को भेज चुकी हूं। अब ज्यादा याद नहीं है कि वो जगह कौन सी थी। फाइल मंगवाई है, उसके बाद ही ज्यादा बता पाऊंगी।
- रश्मि, तत्कालीन जिला विकलांग कल्याण अधिकारी। (वर्तमान डीएसटीओ बागपत)


सीडीओ नहीं, रजिस्ट्रार के नाम बना था हलफनामा
लखनऊ। डॉ. जाकिर हुसैन ट्रस्ट द्वारा विकलांगों को उपकरण बांटे जाने के समर्थन में लगाया गया जेबी सिंह का फर्जी हलफनामा लखनऊ में ही तैयार कराया गया था। खास बात यह है कि हलफनामा लखनऊ विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार के नाम से बना था, न कि सीडीओ मैनपुरी के नाम। 27 सितंबर 2012 को तैयार कराए गए हलफनामे के जरिए अक्तूबर 2008 से 2010 तक के बीच में लगे कैंप का वजूद साबित करने की कोशिश की गई थी। फिलहाल तत्कालीन सीडीओ एवं वर्तमान में लविवि के रजिस्ट्रार जेबी सिंह पीसीएस अफसर हैं।
डॉ. जाकिर हुसैन ट्रस्ट पर लगे आरोपों की सफाई में ट्रस्ट की डायरेक्टर लुईस खुर्शीद द्वारा पेश हलफनामे पर 27 सितंबर 2012 की तारीख पड़ी है। निदेशक, विकलांग कल्याण को संबोधित हलफनामे में जेबी सिंह की ओर से कहा गया है कि वह 8 अक्तूबर 2008 से अक्तूूबर 2010 तक मैनपुरी के सीडीओ रहे थे और इस अवधि में उनके द्वारा डॉ. जाकिर हुसैन ट्रस्ट द्वारा आयोजित किए दो विकलांग कैंपों का उद्घाटन किया गया और मौके पर टेस्ट चेक किया गया। इस हलफनामे के दस्तखत को जेबी सिंह ने फर्जी बताया है। हलफनामे में और भी तथ्य हैं, जो उसे गलत साबित करते हैं। जेबी सिंह पहले भी साफ कर चुके हैं कि ऐसे किसी मामले में प्रशासनिक अधिकारी के जरिए नोटरी पर हलफनामा देने का कोई प्रावधान नहीं है। सलमान खुर्शीद द्वारा कैंप में शामिल होने की उनकी फोटो पर उन्होंने कहा कि मैंने हलफनामा नकारा है न कि कैंप का आयोजन। दो वर्ष में मुख्य विकास अधिकारी रहा। इस दौरान न जाने कितने शिविरों एवं कैंप में हिस्सा लिया। हो सकता है इस ट्रस्ट के कैंप में भी मैंने भाग लिया हो। लेकिन इससे फर्जी हलफनामे का कोई संबंध नहीं है।

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